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अति रुद्र महायज्ञ देवघर में पर्यावरण संरक्षण का दिव्य संदेश – यज्ञ, वर्षा और समृद्धि का वैज्ञानिक आधार
देवघर में अति रुद्र महायज्ञ के दौरान पर्यावरण संरक्षण, यज्ञ के वैज्ञानिक महत्व और सामाजिक समरसता पर संतों व विद्वानों ने विशेष प्रकाश डाला।
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अति रुद्र महायज्ञ में पर्यावरण संरक्षण का दिव्य संदेश, यज्ञ से वर्षा और समृद्धि का वैज्ञानिक आधार प्रकट
देवघर। अति रुद्र महायज्ञ और श्रीमद्भागवत कथा के आज के दिव्य प्रसंग में पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति संतुलन और यज्ञों के वैज्ञानिक महत्व पर व्यापक चर्चा हुई। कथा स्थल पर उपस्थित संतों, आचार्यों और विद्वानों ने बताया कि भारतीय संस्कृति में यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संतुलन का प्रमुख माध्यम है।
यज्ञ: पर्यावरण शुद्धि और प्राकृतिक संतुलन का आधार
कथावाचक ने कहा कि शास्त्रों में यज्ञ को जीवन, कृषि और वर्षा का मूल माना गया है।
उन्होंने बताया—
> “यज्ञ से वर्षा होती है, वर्षा से कृषि समृद्ध होती है और कृषि से राष्ट्र उन्नति की ओर अग्रसर होता है। इसलिए यज्ञ केवल पूजा नहीं, राष्ट्रीय समृद्धि का वैज्ञानिक आधार है।”

यज्ञ की अग्नि से वातावरण शुद्ध होता है, वायुमंडल पवित्र होता है और प्रकृति में संतुलन आता है।
आज के समय में पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और ओजोन परत क्षरण जैसी चिंताओं के बीच यज्ञों का महत्व और बढ़ गया है।
सामाजिक समरसता का प्रतीक है यज्ञ
कथा में भारतीय संस्कृति की सामाजिक एकता पर भी प्रकाश डाला गया।
कथावाचक ने कहा—
> “हमारी संस्कृति में बिना भेदभाव के हर वर्ग के लोग एक साथ परिक्रमा करते, स्नान करते और अनुष्ठान में शामिल होते हैं। यही ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का वास्तविक स्वरूप है।”

वेदों में उल्लेखित ‘अंतरिक्ष शांति’, ‘पृथ्वी शांति’ और ‘औषधि शांति’ का संदेश यही बताता है कि मानव का विकास तभी संभव है, जब प्रकृति सुरक्षित हो।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का प्रेरक संदेश
मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाना होगा।
उन्होंने बताया—
> “जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और पूर्वजों की पुण्यतिथि को केवल उत्सव न बनाएं। इन अवसरों पर वृक्षारोपण करें और प्रकृति को बचाने का संकल्प लें—यही सनातन परंपरा का वास्तविक पालन है।”
उन्होंने कहा कि जब प्रत्येक परिवार अपने संस्कारों को प्रकृति से जोड़ेगा, तभी समाज और राष्ट्र सुरक्षित व समृद्ध बनेंगे।
कला निकेतन देवघर द्वारा भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति
अति रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में आज कला निकेतन देवघर द्वारा शुद्ध शास्त्रीय नृत्य और भजनों की मनमोहक प्रस्तुति दी गई।
मुख्य आकर्षण
सलोनी द्वारा सरस्वती वंदना
रिया एवं अदिति द्वारा भजन प्रस्तुति
वाद्य संगति: मोहन घर केसरी, श्री गोपाल पांडे, पप्पू जी
पं. बिरजू महाराज के परम शिष्य संजीव परीहस्त के शिष्यों द्वारा
शिव स्तुति
तराना
सरगम
विविध शास्त्रीय नृत्य
नृत्य प्रस्तुति देने वालों में सौम्या, अंजलि, स्नेहा, आस्था, अर्पिता, आर्या, आराध्या शामिल रहीं।
इसके बाद दीपक मिश्रा द्वारा शिव तांडव सहित अन्य नृत्य नाटिकाएं प्रस्तुत की गईं।
समिति की महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में इन सदस्यों का योगदान रहा—
प्रेम कुमार सिंघानिया (संयोजक), राजेश सतनालीवाला (मुख्य यजमान), विनोद कुमार सुल्तानिया (अध्यक्ष), रमेश कुमार बाजला (महामंत्री), CA गोपाल चौधरी (कोषाध्यक्ष)
तथा
पंकज कुमार पचेरीवाला, रोहित सुल्तानिया, बजरंग बथवाल, संजय बाजला, हरीश तोलासरिया, अक्षत सिंघानिया, प्रत्यूष सुल्तानिया, कृष्ण सुल्तानिया, अनिल टेकरीवाल, दिलीप सिंघानिया, पवन गर्ग, गिरधारी अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, रितेश पचेरीवाला, सुनील भोपालपुरिया, शुभकरण सुल्तानिया, रेनू सिंघानिया
सहित सैकड़ों महिला-पुरुष मौजूद रहे।
कल का कार्यक्रम
समिति के मुख्य सलाहकार डा. गिरधारी लाल अग्रवाल ने बताया कि
कल प्रातः 8 बजे अति रुद्र यज्ञ में आहुतियां समर्पित की जाएंगी।
श्रीमद्भागवत कथा में वामन भगवान की आकर्षक झांकी प्रस्तुत होगी।









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