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झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। धीरज साहू की बढ़ी सक्रियता, झामुमो की रणनीति और अंजनी-कल्पना सोरेन के नामों ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है।
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झारखंड राज्यसभा चुनाव: दिल्ली से रांची तक बढ़ी हलचल, धीरज साहू की दौड़ ने बदला सियासी माहौल
इंडिया गठबंधन में अंदरखाने मंथन तेज, झामुमो के फैसले पर टिकी सबकी नजर
सुनील झा | रांची | 29 मई 2026

राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की राजनीति में तेज हुई हलचल, नेताओं की मुलाकातों ने बढ़ाई अटकलें।
झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, लेकिन सत्ता के गलियारों में इसकी आहट साफ सुनाई देने लगी है। रांची से दिल्ली तक बैठकों, संपर्कों और राजनीतिक समीकरणों का दौर तेज हो चुका है। सबसे ज्यादा चर्चा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता धीरज साहू को लेकर हो रही है, जिनकी सक्रियता ने यह संकेत दे दिया है कि इस बार वे राज्यसभा की दौड़ में पूरी ताकत से मैदान में उतर चुके हैं।
पिछले कुछ दिनों में धीरज साहू ने जिस तरह राजनीतिक संपर्क बढ़ाया है, उसने विपक्ष से लेकर सत्ता पक्ष तक सबका ध्यान खींचा है। पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात और फिर दिल्ली पहुंचकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से बातचीत ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। भले इन बैठकों को औपचारिक मुलाकात कहा जा रहा हो, लेकिन झारखंड की राजनीति को करीब से देखने वाले इसे सीधे राज्यसभा चुनाव की तैयारी मान रहे हैं।
धीरज साहू ने बढ़ाई राजनीतिक सक्रियता
झारखंड कांग्रेस में लंबे समय से प्रभाव रखने वाले धीरज साहू इस बार किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं दिख रहे। पार्टी के भीतर भी यह माना जा रहा है कि यदि कांग्रेस दूसरी सीट पर दावा ठोकती है तो सबसे मजबूत नाम धीरज साहू का ही होगा।
दिल्ली में हुई बैठकों को लेकर कांग्रेस के भीतर कई तरह की चर्चाएं हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि धीरज साहू सिर्फ पार्टी नेतृत्व ही नहीं, बल्कि गठबंधन सहयोगियों का भरोसा भी मजबूत करने में जुटे हैं। यही वजह है कि उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती नजर आ रही है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि कांग्रेस नहीं चाहती कि राज्यसभा चुनाव के समय कोई असमंजस की स्थिति बने। इसलिए पार्टी पहले से ही रणनीतिक तैयारी में लगी हुई है।
विधानसभा का गणित इंडिया गठबंधन के पक्ष में
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं और राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को 28 वोटों की जरूरत होगी। मौजूदा स्थिति में इंडिया गठबंधन संख्या बल के मामले में मजबूत दिखाई देता है।
झामुमो, कांग्रेस, राजद और सहयोगी दलों को मिलाकर गठबंधन आरामदायक स्थिति में है। यही कारण है कि राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यदि सबकुछ सामान्य रहा तो दोनों सीटों पर इंडिया गठबंधन का कब्जा हो सकता है।
दूसरी ओर भाजपा ने भी चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं, लेकिन उसके सामने संख्या बल की चुनौती साफ दिखाई दे रही है। भाजपा के पास 21 विधायक हैं और एनडीए के सहयोगियों के तीन विधायकों का समर्थन जोड़ने पर संख्या 24 तक पहुंचती है। ऐसे में भाजपा को जीत के लिए अतिरिक्त चार की जरूरत होगी।
क्रॉस वोटिंग और भाजपा
यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग और अंदरूनी रणनीति को लेकर चर्चाएं अभी से शुरू हो गई हैं। हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक किसी संभावित उम्मीदवार का नाम सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे में भाजपा सोरेन परिवार की बहु व स्व दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन पर भाजपा दांव खेल सकती है। फिलहाल भाजपा वेट एंड वाच की स्थिति में है।

परिमल नथवाणी चर्चा में, लेकिन मैदान में नहीं
राज्यसभा चुनाव को लेकर एक समय उद्योगपति और राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी का नाम भी तेजी से उछला था। राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा था कि वे फिर से मैदान में उतर सकते हैं।
लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई राजनीतिक सक्रियता नजर नहीं आई। न तो उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई रणनीतिक बयान दिया और न ही नेताओं से मुलाकातों का सिलसिला दिखा। यही कारण है कि फिलहाल राजनीतिक चर्चा का केंद्र धीरज साहू बन गए हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि राजनीति में सिर्फ नाम चर्चा में होना काफी नहीं होता, सक्रियता भी मायने रखती है। और इस समय सक्रियता के मामले में धीरज साहू बाकी संभावित चेहरों से आगे नजर आ रहे हैं।
झामुमो के पत्ते सबसे अहम
इस पूरे चुनाव में सबसे दिलचस्प भूमिका झामुमो की मानी जा रही है। पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन जिन नामों की सबसे ज्यादा चर्चा है उनमें शिबू सोरेन की बेटी अंजनी सोरेन और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन शामिल हैं।
यदि झामुमो अंजनी सोरेन को राज्यसभा भेजने का फैसला करता है तो इसे गुरुजी शिबू सोरेन की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के संदेश के तौर पर देखा जाएगा। अंजनी सोरेन लंबे समय से संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं और ओडिशा में भी सक्रिय राजनीतिक भूमिका निभाती रही हैं।
दूसरी ओर कल्पना सोरेन का नाम भी तेजी से उभरा है। गांडेय उपचुनाव जीतने के बाद उनकी राजनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ी है। झामुमो के कार्यक्रमों और जनसभाओं में उनकी मौजूदगी ने पार्टी के भीतर उनकी स्थिति मजबूत की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि झामुमो कल्पना सोरेन पर दांव खेलता है तो यह सिर्फ राज्यसभा चुनाव का फैसला नहीं होगा, बल्कि आने वाले वर्षों की राजनीति का संकेत भी माना जाएगा।
कांग्रेस-झामुमो रिश्तों की भी होगी परीक्षा
राज्यसभा चुनाव को इंडिया गठबंधन की अंदरूनी एकजुटता की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। कांग्रेस दूसरी सीट पर अपना दावा मजबूत मान रही है, जबकि झामुमो अपने राजनीतिक हितों और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहेगा।
यदि दोनों दलों के बीच तालमेल बना रहता है तो चुनाव आसान हो सकता है, लेकिन उम्मीदवारों को लेकर खींचतान की स्थिति बनी तो राजनीतिक तस्वीर बदल भी सकती है।
भाजपा इसी संभावित असंतोष पर नजर बनाए हुए है। हालांकि संख्या बल उसके पक्ष में नहीं है, लेकिन राजनीति में आखिरी वक्त तक समीकरण बदलने की संभावना हमेशा बनी रहती है।
आने वाले दिनों में और तेज होगी राजनीतिक गर्मी
राज्यसभा चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आएगी, वैसे-वैसे झारखंड की राजनीति और गर्म होती जाएगी। नेताओं की दिल्ली दौड़ बढ़ेगी, गठबंधन की बैठकों का दौर तेज होगा और राजनीतिक बयानबाजी भी धार पकड़ती जाएगी।
फिलहाल इतना तय माना जा रहा है कि इस चुनाव में सिर्फ सीटों की लड़ाई नहीं होगी, बल्कि यह झारखंड की भविष्य की राजनीति का संकेत भी तय करेगा। धीरज साहू की बढ़ी सक्रियता, झामुमो की रणनीतिक चुप्पी और सोरेन परिवार के नामों की चर्चा ने चुनाव को अभी से दिलचस्प बना दिया है।

Q1. झारखंड में राज्यसभा की कितनी सीटों पर चुनाव होना है?
A. इस बार झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है।
Q2. कांग्रेस की ओर से सबसे चर्चित नाम कौन है?
A. कांग्रेस की ओर से धीरज साहू का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
Q3. झामुमो की ओर से किन नामों की चर्चा चल रही है?
A. अंजनी सोरेन और कल्पना सोरेन के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
Q4. भाजपा के पास कुल कितने विधायक हैं?
A. भाजपा और उसके सहयोगियों को मिलाकर एनडीए के पास 24 विधायक हैं।
Q5. राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोट चाहिए?
A. एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 28 वोटों की आवश्यकता होगी।









