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देवघर में इस्कॉन की भव्य रथयात्रा: हरे कृष्ण महामंत्र से गूंजा शहर, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल
देवघर में इस्कॉन की भव्य रथयात्रा में हरे कृष्ण महामंत्र के संकीर्तन से भक्तिमय माहौल बन गया। आचार्य गोपाल दास के नेतृत्व में निकली शोभायात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा।
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हरे कृष्ण महामंत्र से गुंजायमान हुआ देवघर, इस्कॉन की रथयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब
आचार्य गोपाल दास के नेतृत्व में निकली भव्य शोभायात्रा, भगवान जगन्नाथ के रथ के आगे सेवा भाव से हुई मार्ग की सफाई, हरिनाम संकीर्तन में देर तक झूमते रहे श्रद्धालु
सुनील:देवघर:16.07.206

भगवान जगन्नाथ की पावन रथयात्रा के अवसर पर गुरुवार को इस्कॉन देवघर की ओर से निकाली गई भव्य रथयात्रा ने पूरे शहर को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। झौसागढ़ी गौशाला परिसर से प्रारंभ हुई शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य रथ के साथ “हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम, हरे राम, राम राम हरे हरे” महामंत्र का अखंड संकीर्तन करते हुए आगे बढ़े। पूरे मार्ग में “जय जगन्नाथ” के उद्घोष, मृदंग और करताल की मधुर ध्वनि तथा भक्तों के उल्लासपूर्ण नृत्य ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बनाया कि पूरा देवघर भक्तिभाव में डूबा नजर आया।
आचार्य गोपाल दास के नेतृत्व में निकली भक्तिमय शोभायात्रा
रथयात्रा का नेतृत्व इस्कॉन देवघर के आचार्य गोपाल दास ने किया। उन्होंने श्रद्धालुओं को हरिनाम संकीर्तन की महिमा बताते हुए भगवान श्रीकृष्ण के नाम-स्मरण को कलियुग का सबसे सरल और श्रेष्ठ साधन बताया। उनके नेतृत्व में निकली शोभायात्रा में महिला, पुरुष, युवा, बुजुर्ग और बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। संकीर्तन मंडली के भजनों पर श्रद्धालु पूरे रास्ते नृत्य करते हुए भगवान का गुणगान करते रहे।
आचार्य गोपाल दास ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि प्रेम, सेवा, समानता और मानवता का संदेश देने वाला महापर्व है। उन्होंने सभी लोगों से अपने जीवन में भक्ति, सेवा और सदाचार अपनाने का आह्वान किया।

रथ के आगे स्वर्णाभ झाड़ू से की गई सेवा, भावुक हुए श्रद्धालु
रथयात्रा का सबसे आकर्षक और आध्यात्मिक दृश्य भगवान जगन्नाथ के रथ के आगे की गई मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई रही। डॉ. राजीव रंजन सहित कई श्रद्धालुओं ने स्वर्णाभ झाड़ू से रथ के आगे सड़क की सफाई करते हुए भगवान के प्रति अपनी विनम्र सेवा और समर्पण का परिचय दिया।
सनातन परंपरा में यह सेवा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और अहंकार का त्याग ही सच्ची भक्ति का मार्ग है। इस दृश्य को देखकर मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
फव्वारा चौक पर दिखा अद्भुत संयोग
रथयात्रा के दौरान शहर के फव्वारा चौक के समीप एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। उसी समय बालानंद आश्रम से लौट रही रथयात्रा भी वहां पहुंच गई। दोनों रथयात्राओं के आमने-सामने आने से पूरा क्षेत्र “जय जगन्नाथ” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा।
कुछ देर के लिए ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरा शहर भक्ति के महासागर में डूब गया हो। श्रद्धालुओं ने दोनों रथों के दर्शन कर इसे भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा और शुभ संयोग बताया।

यातायात पुलिस की रही सराहनीय भूमिका
भारी भीड़ के बावजूद पूरे आयोजन के दौरान यातायात व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रित रही। यातायात पुलिस ने समय रहते वन-वे व्यवस्था लागू कर पहले बालानंद आश्रम की रथयात्रा को सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाया। इसके बाद इस्कॉन देवघर की रथयात्रा को उसके निर्धारित मार्ग से इस्कॉन मंदिर की ओर रवाना किया गया।
पुलिसकर्मियों की तत्परता और बेहतर समन्वय के कारण कहीं भी जाम या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई, जिससे श्रद्धालुओं ने भी प्रशासन की सराहना की।

पूजा, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
झौसागढ़ी गौशाला परिसर में रथयात्रा के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, हरिनाम संकीर्तन, भजन-कीर्तन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. पूजा राय की देखरेख में हुआ।
श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की आरती में भाग लिया तथा प्रसाद ग्रहण कर आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया। देर शाम तक भक्ति संगीत और संकीर्तन का सिलसिला चलता रहा।

जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
रथयात्रा में विधायक सुरेश पासवान, मेयर रवि कुमार राउत, डिप्टी मेयर टिप चटर्जी, डॉ. रीता ठाकुर, ताराचंद जैन, रमेश बाजला सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी ने भगवान जगन्नाथ के रथ का दर्शन कर राज्य और देश की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद पूरे आयोजन में अनुशासन और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने पूरे उत्साह के साथ रथयात्रा में भाग लिया।
रथयात्रा का आध्यात्मिक संदेश
इस्कॉन देवघर की यह भव्य रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन भर नहीं रही, बल्कि सेवा, समर्पण, प्रेम, समानता और मानव कल्याण का संदेश भी देती नजर आई। हरिनाम संकीर्तन में शामिल श्रद्धालुओं का मानना था कि भगवान जगन्नाथ की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त होता है।
रथयात्रा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जब समाज भक्ति, सेवा और सद्भाव के सूत्र में बंधता है, तब सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना दोनों मजबूत होती हैं।
देवघर में इस्कॉन की रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के रथ के साथ हरिनाम संकीर्तन करते श्रद्धालु एवं सेवा भाव से मार्ग की सफाई करते भक्त।
देवघर में इस्कॉन की रथयात्रा 2026 के दौरान भगवान जगन्नाथ के रथ के साथ हरे कृष्ण महामंत्र का संकीर्तन करते श्रद्धालु।
निष्कर्ष
इस्कॉन देवघर की रथयात्रा ने इस वर्ष भी श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरी। भगवान जगन्नाथ के जयघोष, हरिनाम संकीर्तन और हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता ने यह सिद्ध कर दिया कि देवघर केवल बाबा बैद्यनाथ की नगरी ही नहीं, बल्कि जीवंत आध्यात्मिक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
प्रश्न 1. देवघर में इस्कॉन की रथयात्रा कहां से निकली?
उत्तर: रथयात्रा झौसागढ़ी गौशाला परिसर से प्रारंभ हुई।
प्रश्न 2. रथयात्रा का नेतृत्व किसने किया?
उत्तर: इस्कॉन देवघर के आचार्य गोपाल दास ने रथयात्रा का नेतृत्व किया।
प्रश्न 3. रथयात्रा में किन देवताओं का रथ निकाला गया?
उत्तर: भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य रथ का नगर भ्रमण कराया गया।
प्रश्न 4. रथ के आगे झाड़ू लगाने का क्या महत्व है?
उत्तर: यह सेवा, विनम्रता और भगवान के समक्ष अहंकार त्यागने का प्रतीक माना जाता है।
प्रश्न 5. रथयात्रा में कौन-कौन शामिल हुए?
उत्तर: बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ विधायक सुरेश पासवान, मेयर रवि कुमार राउत, डिप्टी मेयर टिप चटर्जी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।









