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जरमुंडी में सड़क सुदृढ़ीकरण को लेकर सियासत तेज, महतोडीह–मंडलडीह समेत कई सड़कों पर श्रेय विवाद से गरमाया माहौल। जानें पूरी खबर।
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जरमुंडी में सड़क सुदृढ़ीकरण पर सियासी घमासान, महतोडीह–मंडलडीह समेत कई सड़कों पर ‘श्रेय की जंग’
पुरानी स्वीकृति बनाम नई घोषणा: महतोडीह मोड़–महतोडीह–मंडलडीह, आरईओ रोड ककनपुर सहित कई सड़कों पर छिड़ी बहस
संवाददाता | देवघर | 11 अप्रैल 2026

जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों सड़क सुदृढ़ीकरण कार्य को लेकर सियासत चरम पर है। महतोडीह मोड़ से महतोडीह–मंडलडीह पथ के सुदृढ़ीकरण कार्य के भूमि पूजन की घोषणा के साथ ही विकास की चर्चा तेज हुई, लेकिन इसके साथ ही श्रेय लेने की राजनीति ने भी जोर पकड़ लिया है।
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब केवल एक सड़क तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सारवां प्रखंड के अंतर्गत आने वाली कई प्रमुख सड़कों—जैसे आरईओ रोड से ककनपुर, महतोडीह–मंडलडीह पथ, और अन्य ग्रामीण संपर्क मार्ग—को लेकर राजनीतिक खींचतान खुलकर सामने आ गई है।
“पहले स्वीकृति, अब श्रेय?” – विपक्ष का सीधा आरोप
विपक्षी खेमे से जुड़े नेताओं और समर्थकों का दावा है कि इन सड़कों के सुदृढ़ीकरण कार्य की प्रशासनिक स्वीकृति 30 जनवरी 2024 को तत्कालीन कृषि मंत्री बादल पत्रलेख की अनुशंसा पर मिल चुकी थी।
उनका कहना है कि कई सड़कों का शिलान्यास भी पहले ही किया जा चुका है और अब जब कार्य प्रारंभ होने की स्थिति में है, तो वर्तमान विधायक इसे अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह आरोप तेजी से गूंज रहा है कि “पुरानी योजनाओं को नया बताकर श्रेय लेने की कोशिश की जा रही है।”

सोशल मीडिया बना सियासी युद्ध का मैदान
इस पूरे विवाद में सोशल मीडिया ने अहम भूमिका निभाई है। फेसबुक और व्हाट्सएप पर पोस्ट, फोटो और दस्तावेज साझा कर दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात को मजबूत करने में लगे हैं।
एक ओर जहां भूमि पूजन कार्यक्रम की तस्वीरें और घोषणाएं वायरल हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर पुराने स्वीकृति पत्र और सूची साझा कर यह साबित करने की कोशिश की जा रही है कि योजना की नींव पहले ही रखी जा चुकी थी।
कमेंट सेक्शन में भी आम जनता खुलकर अपनी राय रख रही है। कुछ लोग इसे “झूठा श्रेय लेने की राजनीति” बता रहे हैं, तो कुछ इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं।
18 महीने का रिपोर्ट कार्ड: जनता पूछ रही सवाल
स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पिछले लगभग 18 महीनों में वर्तमान विधायक देवेंद्र कुंवर की अनुशंसा पर कितनी नई सड़क परियोजनाएं शुरू हुईं।
कई नागरिकों का कहना है कि यदि नई सड़कों का निर्माण या जर्जर सड़कों का पहली बार सुदृढ़ीकरण होता, तो जनता को ज्यादा भरोसा होता।
एक स्थानीय युवक ने कहा,
“हमें इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि श्रेय कौन ले रहा है, लेकिन अगर नई सड़कें नहीं बन रही हैं और पुराने कामों का ही उद्घाटन हो रहा है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।”
ग्रामीण इलाकों के लिए सड़क क्यों है सबसे बड़ा मुद्दा?
जरमुंडी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि विकास की जीवनरेखा मानी जाती हैं।
खराब सड़कों के कारण लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में जब किसी सड़क के सुदृढ़ीकरण की घोषणा होती है, तो स्थानीय लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ जाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महतोडीह–मंडलडीह और अन्य संपर्क मार्ग बेहतर बनते हैं, तो इसका सीधा असर स्थानीय व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा।
विकास बनाम राजनीति: क्या असली मुद्दा छूट रहा है?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विकास कार्यों में श्रेय लेने की होड़ आम बात है, लेकिन जब यह विवाद जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो असली मुद्दा पीछे छूट जाता है।
जरमुंडी में भी फिलहाल यही स्थिति देखने को मिल रही है। सड़क निर्माण जैसे अहम कार्य पर फोकस होने के बजाय, यह बहस ज्यादा हो रही है कि इसका श्रेय किसे मिलना चाहिए।
हालांकि, कुछ लोग इसे सकारात्मक प्रतिस्पर्धा के रूप में भी देख रहे हैं। उनका मानना है कि यदि इस प्रतिस्पर्धा के कारण विकास कार्यों में तेजी आती है, तो अंततः इसका लाभ जनता को ही मिलेगा।
जमीन पर क्या है हकीकत?
जमीनी स्तर पर देखा जाए तो कई सड़कों पर कार्य शुरू होने की तैयारी चल रही है। भूमि पूजन कार्यक्रम के बाद प्रशासनिक प्रक्रिया को गति दी जा रही है।
लेकिन यह भी सच है कि कई परियोजनाएं लंबे समय से कागजों में ही थीं और अब जाकर उन पर काम शुरू हो रहा है। यही वजह है कि श्रेय को लेकर विवाद और गहराता जा रहा है।

निष्कर्ष: सड़क से ज्यादा ‘श्रेय’ की दौड़
जरमुंडी में महतोडीह मोड़–महतोडीह–मंडलडीह पथ सहित अन्य सड़कों का सुदृढ़ीकरण क्षेत्र के विकास के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन फिलहाल इन सड़कों से ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि इनका श्रेय किसे मिलेगा।
जनता की नजर अब इस पर टिकी है कि यह सियासी घमासान कब थमता है और सड़कों का निर्माण कितनी तेजी और गुणवत्ता के साथ पूरा होता है।
आखिरकार, लोगों की प्राथमिकता साफ है—उन्हें बेहतर सड़क चाहिए, न कि श्रेय की राजनीति।
Q1. जरमुंडी में सड़क विवाद क्यों हो रहा है?
A. जरमुंडी में सड़क सुदृढ़ीकरण परियोजनाओं के श्रेय को लेकर वर्तमान विधायक और विपक्षी खेमे के बीच विवाद चल रहा है।
Q2. किन सड़कों को लेकर विवाद है?
A. महतोडीह मोड़–महतोडीह–मंडलडीह पथ, आरईओ रोड से ककनपुर सहित कई ग्रामीण संपर्क मार्ग इस विवाद के केंद्र में हैं।
Q3. विपक्ष क्या आरोप लगा रहा है?
A. विपक्ष का कहना है कि इन सड़कों की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी थी और अब इसका श्रेय लेने की कोशिश हो रही है।
Q4. जनता की क्या प्रतिक्रिया है?
A. जनता का कहना है कि उन्हें श्रेय से ज्यादा अच्छी और मजबूत सड़क चाहिए, जिससे उनका जीवन आसान हो सके।
(डिस्क्लेमर: यह खबर स्थानीय स्रोतों, सोशल मीडिया चर्चाओं और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई है।)










