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देवघर में निजी स्कूलों की फीस पर लगाम लगाने की मांग तेज, मेयर रवि कुमार राउत ने उपायुक्त को पत्र लिखकर वार्षिक शुल्क और पुनः प्रवेश शुल्क पर रोक की मांग की।
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देवघर में निजी स्कूलों की फीस पर लगेगी लगाम?
मेयर ने उपायुक्त को लिखा पत्र, वार्षिक और पुनः प्रवेश शुल्क पर रोक की मांग तेज
संवाददाता | देवघर | 30 मार्च 2026

देवघर में निजी स्कूलों द्वारा ली जा रही बढ़ती फीस को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। नगर निगम के मेयर रवि कुमार राउत ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए जिले के उपायुक्त को पत्र लिखकर निजी विद्यालयों की मनमानी फीस वसूली पर रोक लगाने की मांग की है। खासतौर पर हर नए शैक्षणिक सत्र में लिए जाने वाले वार्षिक शुल्क और पुनः प्रवेश शुल्क को अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता जताई गई है।
अभिभावकों पर बढ़ता आर्थिक दबाव
मेयर द्वारा लिखे गए पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि देवघर शहर में कई मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जहां हजारों छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। लेकिन हर वर्ष नए सत्र की शुरुआत में इन विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से वार्षिक शुल्क के साथ-साथ पुनः प्रवेश शुल्क भी लिया जाता है।
यह अतिरिक्त शुल्क सामान्य और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कई अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है, जिससे शिक्षा का अधिकार भी प्रभावित हो सकता है।
“शिक्षा का बोझ संतुलित रहना जरूरी” – मेयर
मेयर रवि कुमार राउत ने अपने पत्र में कहा है कि शिक्षा एक मूलभूत आवश्यकता है, लेकिन निजी स्कूलों की फीस संरचना इस तरह बढ़ती जा रही है कि आम लोगों के लिए इसे वहन करना कठिन होता जा रहा है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि शिक्षा का बोझ संतुलित रहे और अभिभावकों को राहत मिल सके।

पहले भी उठ चुका है मुद्दा
इस मामले में मेयर ने यह भी याद दिलाया है कि पूर्व में तत्कालीन शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन द्वारा भी निजी विद्यालयों को इस तरह की शुल्क वसूली पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे।
इतना ही नहीं, झारखंड के गढ़वा और पलामू जिलों में जिला प्रशासन ने इस मुद्दे पर कार्रवाई करते हुए कई स्कूलों में फीस संरचना को नियंत्रित किया था। इससे वहां के अभिभावकों को राहत मिली थी और शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनी थी।
समाधान के लिए समन्वय जरूरी
मेयर ने उपायुक्त से यह भी अनुरोध किया है कि इस मुद्दे का स्थायी समाधान निकालने के लिए छात्रों, अभिभावकों और विद्यालय प्रबंधन के बीच समन्वय स्थापित किया जाए।
उनका मानना है कि यदि सभी पक्षों को साथ बैठाकर पारदर्शी नीति बनाई जाए, तो यह समस्या लंबे समय तक हल हो सकती है और शिक्षा व्यवस्था में संतुलन बना रहेगा।
अभिभावकों में बढ़ी उम्मीद
इस पहल के बाद अभिभावकों में उम्मीद जगी है कि प्रशासन जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस निर्णय ले सकता है। कई अभिभावकों का कहना है कि यदि फीस पर नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो बच्चों की पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
शहर में यह मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बनता जा रहा है और सोशल स्तर पर भी अभिभावकों का समर्थन मेयर की इस पहल को मिल रहा है।
प्रशासन के अगले कदम पर टिकी नजरें
अब इस पूरे मामले में जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि प्रशासन इस दिशा में सक्रिय पहल करता है, तो यह निर्णय हजारों परिवारों को राहत दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फीस नियंत्रण के साथ-साथ स्कूलों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है, ताकि शिक्षा का स्तर प्रभावित न हो।
Conclusion
देवघर में निजी स्कूलों की फीस को लेकर उठी यह आवाज अब एक बड़े जनमुद्दे का रूप ले चुकी है। मेयर की पहल ने इस विषय को प्रशासन के केंद्र में ला दिया है। यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते हैं, तो यह न सिर्फ अभिभावकों को राहत देगा बल्कि शिक्षा व्यवस्था को भी अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाएगा।
Q1. देवघर में निजी स्कूलों की फीस को लेकर क्या मुद्दा है?
A. निजी स्कूलों द्वारा वार्षिक शुल्क और पुनः प्रवेश शुल्क के नाम पर अतिरिक्त फीस ली जा रही है, जिससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
Q2. मेयर ने क्या मांग की है?
A. मेयर ने उपायुक्त को पत्र लिखकर इन अतिरिक्त शुल्कों पर रोक लगाने और फीस नियंत्रण की मांग की है।
Q3. क्या पहले भी इस पर कार्रवाई हुई है?
A. हाँ, झारखंड के गढ़वा और पलामू जिलों में प्रशासन ने इस तरह की फीस वसूली पर कार्रवाई की थी।
Q4. इससे किसे लाभ होगा?
A. इससे खासतौर पर मध्यम और निम्न वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी और शिक्षा का बोझ कम होगा।
Q5. आगे क्या हो सकता है?
A. यदि प्रशासन कार्रवाई करता है, तो फीस नियंत्रण की नई नीति लागू हो सकती है, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
Disclaimer:
यह खबर उपलब्ध जानकारी और आधिकारिक पत्र के आधार पर तैयार की गई है। प्रशासनिक निर्णय आने के बाद स्थिति में बदलाव संभव है।








