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रामनवमी के अवसर पर सारवां प्रखंड के विभिन्न गांवों में मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, कलश यात्रा और कीर्तन कार्यक्रम में पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख शामिल हुए। जानें पूरी खबर।
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रामनवमी पर सारवां में भक्ति का सागर: मंदिर प्राण प्रतिष्ठा और शोभा यात्राओं में शामिल हुए बादल पत्रलेख
कलश यात्रा, कीर्तन और अष्टाजाम से गूंजा इलाका, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया भाग
संवाददाता | देवघर (झारखंड) | 25 मार्च 2026

रामनवमी के पावन अवसर पर देवघर जिले के सारवां प्रखंड में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। विभिन्न गांवों में नव-निर्मित मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा, भव्य कलश यात्राएं, कीर्तन और अष्टाजाम जैसे धार्मिक आयोजनों ने पूरे क्षेत्र को राममय बना दिया। इस दौरान झारखंड सरकार के पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने भी कई कार्यक्रमों में भाग लेकर श्रद्धालुओं के साथ पूजा-अर्चना की और क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
बिशनपुर में भव्य कलश यात्रा और प्राण प्रतिष्ठा समारोह
सारवां प्रखंड के बिशनपुर गांव में नव-निर्मित बजरंगबली मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के अवसर पर भव्य कलश यात्रा और शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया।
पूरे गांव में जय श्रीराम और हनुमान जी के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर बादल पत्रलेख ने कार्यक्रम में शामिल होकर पूजा-अर्चना की और कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में एकता, सद्भाव और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं।
मुनियातरी गांव में कीर्तन और पूजन से भक्ति का माहौल
रामनवमी के ही अवसर पर मुनियातरी गांव में भी नव-निर्मित बजरंगबली मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के साथ भव्य पूजन और कीर्तन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भक्ति गीतों तथा राम नाम के संकीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। बादल पत्रलेख ने यहां भी पहुंचकर भगवान के दर्शन किए और सभी के कल्याण की प्रार्थना की।
उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हमें सत्य, मर्यादा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
गोंदलवारी में 24 घंटे का अष्टाजाम और हरिनाम संकीर्तन
सारवां के लखोरिया क्षेत्र अंतर्गत गोंदलवारी (मंडल टोला) में मंदिर नवनिर्माण के उपलक्ष्य में 24 घंटे का अष्टाजाम और हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया गया।
इस धार्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और लगातार 24 घंटे तक भक्ति संगीत और संकीर्तन का आयोजन हुआ।
बादल पत्रलेख ने यहां भी पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद लिया और क्षेत्रवासियों की खुशहाली की कामना की।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़, प्रमुख लोग रहे उपस्थित
इन सभी कार्यक्रमों में क्षेत्र के कई प्रमुख लोग और श्रद्धालु उपस्थित रहे। मुख्य रूप से धनंजय मंडल, राजेंद्र मंडल, राजाराम मंडल, दिलीप मंडल, सागर मंडल, सीताराम मंडल, अमित मंडल, उगन मंडल, चंदरकिशोर मंडल, दीपक मंडल, सुदामा मंडल, गुणाधर मंडल और राजीव मंडल सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि क्षेत्र में धार्मिक आस्था और परंपराओं के प्रति लोगों की गहरी आस्था बनी हुई है।
रामराज्य और जनकल्याण की भावना पर जोर
कार्यक्रम के दौरान रामराज्य की अवधारणा और भगवान श्रीराम के आदर्शों पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि भगवान राम एक आदर्श शासक थे, जिनमें सामंतवादी सोच का अभाव था और जो सदैव प्रजा के कल्याण और जनमत का सम्मान करते थे।
बादल पत्रलेख ने कहा कि समाज को आज भी भगवान राम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर एक बेहतर और समरस समाज का निर्माण करना चाहिए।
पूरे क्षेत्र में दिखी भक्ति और एकता की मिसाल
रामनवमी के अवसर पर सारवां प्रखंड के विभिन्न गांवों में आयोजित इन कार्यक्रमों ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का भी संदेश दिया।
कलश यात्राओं में महिलाओं की भागीदारी, युवाओं की सक्रियता और बुजुर्गों का आशीर्वाद—इन सभी ने मिलकर इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
निष्कर्ष
रामनवमी के पावन अवसर पर सारवां प्रखंड में आयोजित मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, कलश यात्रा, कीर्तन और अष्टाजाम कार्यक्रमों ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। बादल पत्रलेख की उपस्थिति ने आयोजन को और भी खास बना दिया।
इन आयोजनों ने यह साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति में धार्मिक पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज को जोड़ने, प्रेरित करने और एक नई ऊर्जा देने का कार्य भी करते हैं।
Q1. यह आयोजन कहां हुआ था?
A. सारवां प्रखंड के बिशनपुर, मुनियातरी और गोंदलवारी गांवों में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
Q2. कार्यक्रम में कौन शामिल हुए थे?
A. पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख सहित सैकड़ों श्रद्धालु और स्थानीय ग्रामीण शामिल हुए थे।
Q3. कौन-कौन से धार्मिक कार्यक्रम हुए?
A. प्राण प्रतिष्ठा, कलश यात्रा, शोभा यात्रा, कीर्तन और 24 घंटे का अष्टाजाम आयोजित किया गया।
Q4. आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
A. धार्मिक आस्था को बढ़ावा देना, सामाजिक एकता को मजबूत करना और भगवान श्रीराम के आदर्शों का प्रचार करना।
Q5. रामनवमी का महत्व क्या है?
A. रामनवमी भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और यह धर्म, सत्य और मर्यादा का प्रतीक है।








