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देवघर के सारवां क्षेत्र में पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख ने ईद-उल-फितर पर शुभकामनाएं दीं और पन्नाटाड़ गांव में बजरंगबली मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के तहत कलश यात्रा में शामिल हुए। पढ़ें पूरी खबर।
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ईद-उल-फितर पर बादल पत्रलेख ने दी शुभकामनाएं, पन्नाटाड़ में कलश यात्रा में हुए शामिल
सारवां क्षेत्र में दिखा गंगा-जमुनी तहजीब का अद्भुत संगम, धार्मिक और सामाजिक एकता का संदेश
संवाददाता | देवघर | 21 मार्च 2026

ईद-उल-फितर शुभकामना संदेश देते बादल पत्रलेख
देवघर जिले के सारवां प्रखंड में इस बार ईद-उल-फितर का पर्व और धार्मिक आयोजन एक साथ मिलकर सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता की मिसाल बन गए। पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने जहां एक ओर ईद-उल-फितर के अवसर पर देशवासियों को बधाई दी, वहीं दूसरी ओर पन्नाटाड़ गांव में आयोजित बजरंगबली मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के तहत भव्य कलश यात्रा में शामिल होकर लोगों के बीच एकता का संदेश भी दिया।
ईद-उल-फितर: भाईचारे और सौहार्द का संदेश
ईद-उल-फितर के पावन अवसर पर अपने शुभकामना संदेश में बादल पत्रलेख ने कहा कि यह पर्व मुस्लिम समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, जो पवित्र रमजान महीने के समापन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ईद केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह समाज में प्रेम, भाईचारा और आपसी विश्वास को मजबूत करने का अवसर भी है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि रमजान के दौरान किए गए रोज़े, इबादत और आत्मसंयम व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाते हैं। ईद का दिन इन प्रयासों का उत्सव है, जो हमें सिखाता है कि हम अपने मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे के करीब आएं और समाज में सकारात्मक वातावरण का निर्माण करें।
बादल पत्रलेख ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे इस त्योहार को शांति, सद्भाव और भाईचारे के साथ मनाएं, ताकि समाज में एकता और सद्भाव की भावना और अधिक प्रगाढ़ हो सके।

पन्नाटाड़ में कलश यात्रा का दृश्य
पन्नाटाड़ में बजरंगबली मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भव्य आयोजन
इधर सारवां प्रखंड के पन्नाटाड़ गांव में नव-निर्मित बजरंगबली मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस धार्मिक आयोजन में पूरे गांव का उत्साह देखने लायक था।
कलश यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए, जिनमें महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। महिलाएं पारंपरिक परिधान में सुसज्जित होकर सिर पर कलश लेकर चल रही थीं, जबकि युवा और अन्य ग्रामीण पूरे आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए थे।
पूरे गांव में “जय बजरंगबली” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु भक्ति और उत्साह के साथ मंदिर परिसर तक पहुंचे, जहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न हुई।
पूर्व मंत्री ने भी लिया भाग, किया विधि-विधान से पूजन
इस अवसर पर बादल पत्रलेख स्वयं पन्नाटाड़ गांव पहुंचे और श्रद्धालुओं के साथ कलश यात्रा में शामिल हुए। उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन न केवल आस्था को सशक्त करते हैं, बल्कि समाज में एकजुटता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने ग्रामीणों के उत्साह और आयोजन की भव्यता की सराहना करते हुए कहा कि गांव स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम समाज को जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।
ग्रामीणों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यजमान के रूप में ललन ठाकुर, मनोज ठाकुर, संजय कोल, पांचू ठाकुर, रोहित ठाकुर, मुकेश ठाकुर और सुरेश ठाकुर सहित कई लोगों ने सक्रिय योगदान दिया।
कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हुआ। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से यह धार्मिक आयोजन एक यादगार अवसर बन गया।
सामाजिक समरसता की मिसाल बना सारवां क्षेत्र
ईद-उल-फितर की शुभकामनाएं और साथ ही हिंदू धार्मिक आयोजन में सक्रिय भागीदारी—इन दोनों घटनाओं ने सारवां क्षेत्र में गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत तस्वीर पेश की।
यह आयोजन इस बात का प्रतीक है कि अलग-अलग धर्मों और परंपराओं के बावजूद समाज में एकता और भाईचारे की भावना सर्वोपरि है। ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता को भी नई दिशा देते हैं।
निष्कर्ष
देवघर के सारवां प्रखंड में ईद-उल-फितर और पन्नाटाड़ की कलश यात्रा ने यह साबित कर दिया कि भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता है। पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख की पहल और ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया। यह आयोजन आने वाले समय में सामाजिक और सांस्कृतिक समन्वय की प्रेरणा देता रहेगा।
Q1. बादल पत्रलेख ने ईद-उल-फितर पर क्या संदेश दिया?
A. उन्होंने ईद को भाईचारे, प्रेम और सामाजिक एकता का पर्व बताते हुए सभी से इसे शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से मनाने की अपील की।
Q2. पन्नाटाड़ में किस आयोजन का आयोजन किया गया था?
A. पन्नाटाड़ गांव में नव-निर्मित बजरंगबली मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भव्य कलश यात्रा निकाली गई थी।
Q3. कलश यात्रा में किन-किन लोगों ने भाग लिया?
A. इसमें गांव की महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
Q4. आयोजन को सफल बनाने में किसका योगदान रहा?
A. स्थानीय ग्रामीणों और यजमानों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया।
Q5. इस आयोजन का सामाजिक महत्व क्या है?
A. यह आयोजन सामाजिक समरसता, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना।









