देवघर भू-अर्जन कार्यालय में एसीबी की बड़ी कार्रवाई प्रधान लिपिक व अनुसेवक 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, शिकायत के बाद एसीबी ने बिछाया जाल

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देवघर भू-अर्जन कार्यालय में एसीबी की बड़ी कार्रवाई। प्रधान लिपिक निरंजन कुमार और अनुसेवक नूनदेव यादव 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार। शिकायत के बाद बिछाया गया था जाल।

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देवघर भू-अर्जन कार्यालय में एसीबी की बड़ी कार्रवाई

प्रधान लिपिक व अनुसेवक 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, शिकायत के बाद एसीबी ने बिछाया जाल

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संवाददाता | देवघर | 13 मार्च 2026

भू-अर्जन कार्यालय में एसीबी कार्रवाई के बाद गिरफ्तार कर्मियों को ले जाती टीम

 

देवघर समाहरणालय परिसर स्थित भू-अर्जन कार्यालय में शुक्रवार को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो सरकारी कर्मियों को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में प्रधान लिपिक निरंजन कुमार और अनुसेवक नूनदेव यादव शामिल हैं।

एसीबी की यह कार्रवाई कुंडा थाना क्षेत्र के गौरीपुर गांव निवासी ब्रह्मदेव यादव की शिकायत के आधार पर की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि भू-अर्जन से संबंधित एक कार्य को पूरा करने के बदले कार्यालय के कर्मियों द्वारा उनसे 10 हजार रुपये की रिश्वत मांगी जा रही है। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और पूरी योजना के तहत जाल बिछाकर कार्रवाई को अंजाम दिया।

शिकायत के बाद एसीबी ने तैयार की रणनीति

प्राप्त जानकारी के अनुसार ब्रह्मदेव यादव ने एंटी करप्शन ब्यूरो से संपर्क कर बताया था कि उनके भू-अर्जन से जुड़े कार्य को आगे बढ़ाने के लिए कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही है।

शिकायत मिलने के बाद एसीबी के अधिकारियों ने पहले मामले की गोपनीय जांच कराई। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद टीम ने शिकायतकर्ता के साथ मिलकर ट्रैप की योजना तैयार की। इसके तहत रिश्वत की राशि को प्रमाण के तौर पर चिन्हित किया गया और पूरी कार्रवाई के लिए टीम को पहले से सतर्क कर दिया गया।

जैसे ही सौंपे पैसे, एसीबी ने दबोच लिया

योजना के अनुसार शुक्रवार को शिकायतकर्ता ब्रह्मदेव यादव भू-अर्जन कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने पूर्व निर्धारित योजना के तहत रिश्वत की राशि दोनों कर्मचारियों को सौंपी।

जैसे ही राशि आरोपियों के हाथ में पहुंची, पहले से निगरानी कर रही एसीबी की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रधान लिपिक निरंजन कुमार और अनुसेवक नूनदेव यादव को रंगे हाथ पकड़ लिया।

कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि कार्यालय परिसर में मौजूद लोगों को कुछ देर तक समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। देखते ही देखते एसीबी की टीम ने दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया और आवश्यक कागजी प्रक्रिया शुरू कर दी।

 

समाहरणालय परिसर में मची हलचल

इस कार्रवाई के दौरान समाहरणालय परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अचानक हुई एसीबी की इस कार्रवाई से कार्यालय के अन्य कर्मचारियों और परिसर में मौजूद लोगों के बीच हलचल बढ़ गई।

दरअसल जिस समय यह कार्रवाई हुई, उसी समय समाहरणालय परिसर में नवनिर्वाचित मेयर और वार्ड पार्षदों का शपथ ग्रहण समारोह भी आयोजित किया जा रहा था। इसके साथ ही डिप्टी मेयर के चुनाव को लेकर भी राजनीतिक सरगर्मी चरम पर थी।

ऐसे माहौल में अचानक हुई एसीबी की कार्रवाई की खबर तेजी से पूरे परिसर में फैल गई और यह चर्चा का प्रमुख विषय बन गई। कई लोग मौके पर पहुंचकर पूरी स्थिति को जानने का प्रयास करते नजर आए।

पूछताछ के लिए दुमका ले गई टीम

गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम दोनों आरोपियों को अपने साथ लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए दुमका रवाना हो गई है। बताया जा रहा है कि वहां दोनों से विस्तृत पूछताछ की जाएगी।

पूछताछ के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा। मामले में आगे की जांच भी जारी रहेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस प्रकरण में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

एसीबी की इस कार्रवाई को सरकारी कार्यालयों में व्याप्त रिश्वतखोरी के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी भी सरकारी विभाग में भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी की शिकायत मिलती है तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

एसीबी अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि यदि उनसे किसी भी सरकारी कार्य के बदले रिश्वत मांगी जाती है तो वे बिना डर के इसकी शिकायत करें। शिकायत मिलने पर टीम पूरी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी।

 

देवघर में भ्रष्टाचार के खिलाफ बढ़ी सख्ती

हाल के समय में देवघर और आसपास के क्षेत्रों में भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर निगरानी एजेंसियां अधिक सक्रिय दिखाई दे रही हैं। सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद करती है, बल्कि आम लोगों के बीच यह भरोसा भी पैदा करती है कि उनकी शिकायतों पर कार्रवाई हो सकती है।

देवघर भू-अर्जन कार्यालय में हुई यह कार्रवाई भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

प्रश्न 1: देवघर में एसीबी ने किस मामले में कार्रवाई की?

उत्तर: एसीबी ने देवघर समाहरणालय परिसर स्थित भू-अर्जन कार्यालय में रिश्वतखोरी के मामले में कार्रवाई की।

प्रश्न 2: इस मामले में किन लोगों को गिरफ्तार किया गया?

उत्तर: प्रधान लिपिक निरंजन कुमार और अनुसेवक नूनदेव यादव को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया।

प्रश्न 3: शिकायत किसने की थी?

उत्तर: कुंडा थाना क्षेत्र के गौरीपुर गांव निवासी ब्रह्मदेव यादव ने एसीबी से शिकायत की थी।

प्रश्न 4: गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को कहां ले जाया गया?

उत्तर: एसीबी की टीम दोनों आरोपियों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए दुमका लेकर गई है।

निष्कर्ष

देवघर भू-अर्जन कार्यालय में एसीबी की यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। शिकायत के आधार पर योजनाबद्ध तरीके से की गई इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सरकारी कार्यों में रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

Disclaimer:

यह खबर उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और प्रत्यक्ष स्रोतों के आधार पर तैयार की गई है। मामले की जांच जारी है, इसलिए आगे की जांच में तथ्यों में परिवर्तन संभव है।

 

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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