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देवघर के तिलजोरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांत पाण्डेय का निधन, दोआब क्षेत्र में शोक की लहर। तिलजोरी घाट पर पुल निर्माण आंदोलन का सुझाव देने और दोआब क्षेत्रीय संघर्ष समिति की गतिविधियों में निभाई थी अहम भूमिका।
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दोआब क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांत पाण्डेय का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर
तिलजोरी घाट पर पुल निर्माण आंदोलन का दिया था सुझाव, दोआब क्षेत्रीय संघर्ष समिति की गतिविधियों में निभाई थी अहम भूमिका
Author | Location | Date
सुनील झा | देवघर | 11 मार्च 2026

सामाजिक कार्यकर्त्ता चंद्रकांत पांडेय का पार्थिव शरीर
देवघर के सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांत पाण्डेय जिनका निधन होने से दोआब क्षेत्र में शोक
देवघर जिले के ग्राम तिलजोरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रकांत पाण्डेय का बुधवार को निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही दोआब क्षेत्र सहित आसपास के गांवों में शोक की लहर दौड़ गई। क्षेत्र के सामाजिक, राजनीतिक और बुद्धिजीवी वर्ग के लोगों ने उनके निधन को समाज के लिए बड़ी क्षति बताया है।
चंद्रकांत पाण्डेय लंबे समय से दोआब क्षेत्र के सामाजिक सरोकारों और जनहित के मुद्दों से जुड़े रहे। वे क्षेत्र में विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए चलाए गए विभिन्न जन आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए जाने जाते थे। स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान एक सजग, सक्रिय और मुखर सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में रही, जो हमेशा क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर आगे बढ़कर आवाज उठाते थे।
स्वतंत्रता सेनानी परिवार से रहा गहरा जुड़ाव
चंद्रकांत पाण्डेय का जुड़ाव क्षेत्र के प्रतिष्ठित सामाजिक और राजनीतिक परिवारों से भी रहा। वे देवघर विधानसभा के प्रथम विधायक और स्वतंत्रता सेनानी भुवनेश्वर पाण्डेय तथा ग्राम पंचायत पथरा के आजीवन मुखिया रहे फूलकु पाण्डेय के परम सहयोगियों में गिने जाते थे।
इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर उन्होंने लंबे समय तक दोआब क्षेत्र के सामाजिक और विकासात्मक कार्यों में योगदान दिया। क्षेत्र के बुजुर्ग बताते हैं कि चंद्रकांत पाण्डेय हमेशा समाज के लोगों को एकजुट करने और जनहित के मुद्दों पर संगठित आंदोलन खड़ा करने में सक्रिय रहते थे।
दोआब क्षेत्रीय संघर्ष समिति के आंदोलनों में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
दोआब क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं की मांग को लेकर वर्षों पहले जब दोआब क्षेत्रीय संघर्ष समिति सक्रिय थी, उस दौर में भी चंद्रकांत पाण्डेय की भूमिका बेहद अहम रही।
उस समय स्वर्गीय फूलकु पाण्डेय, भूदेव प्रसाद राय और रामदेव मोदी के नेतृत्व में क्षेत्र के विकास के लिए कई आंदोलन चलाए जा रहे थे। चंद्रकांत पाण्डेय इन आंदोलनों में सक्रिय सहयोगी के रूप में शामिल थे और उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए, जिन्हें बाद में आंदोलन की दिशा बनाने में उपयोग किया गया।
तिलजोरी घाट पर पुल निर्माण आंदोलन का दिया था सुझाव
बताया जाता है कि उस समय क्षेत्र में आवागमन की बड़ी समस्या थी। अजय और पतरो नदी के कई घाटों पर पुल नहीं होने के कारण लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
इसी दौरान चंद्रकांत पाण्डेय ने तिलजोरी घाट पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण के लिए आंदोलन शुरू करने का सुझाव दिया था। उनके इस सुझाव को दोआब क्षेत्रीय संघर्ष समिति ने गंभीरता से लिया और बाद में इस मुद्दे को लेकर चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया गया।
इस आंदोलन के तहत अजय और पतरो नदी के कई घाटों—साप्तर, दौरही, मोहनपुर, खिरौंधा, खासपैका, बेंगी, बिसनपुर और बसवरिया—पर पुल निर्माण की मांग उठाई गई। इस अभियान ने क्षेत्र में विकास के मुद्दों को लेकर व्यापक जनचेतना पैदा की और लोगों को संगठित करने में बड़ी भूमिका निभाई।
शिक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं के लिए भी चलाए गए आंदोलन
पुल निर्माण के अलावा दोआब क्षेत्र में शिक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं के लिए भी आंदोलन चलाए गए थे। उस समय क्षेत्र में उच्च विद्यालय, प्रखंड कार्यालय और महाविद्यालय की स्थापना की मांग को लेकर भी लोगों को संगठित किया गया।
इन आंदोलनों का उद्देश्य था कि दोआब क्षेत्र के ग्रामीणों को बुनियादी शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं के लिए दूर-दराज के इलाकों पर निर्भर न रहना पड़े।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इन आंदोलनों ने क्षेत्र में विकास की एक मजबूत नींव तैयार की और आने वाले समय में कई योजनाओं और सुविधाओं का रास्ता भी साफ किया।
सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बनाई अलग पहचान
चंद्रकांत पाण्डेय ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा समाज सेवा और जनहित के कार्यों में लगाया। वे हमेशा लोगों की समस्याओं को सुनने और समाधान के लिए प्रयास करने के लिए जाने जाते थे।
ग्रामीणों के बीच वे एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पहचाने जाते थे जो बिना किसी राजनीतिक स्वार्थ के समाज के लिए काम करते थे। यही कारण है कि उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र के लोगों में गहरा दुख और शोक देखा गया।
अंतिम संस्कार में नतनी ने दी मुखाग्नि
परिवार के अनुसार चंद्रकांत पाण्डेय का अंतिम संस्कार पूरे धार्मिक रीति-रिवाज के साथ किया गया। उनका कोई पुत्र नहीं होने के कारण अंतिम संस्कार के समय उनकी नतनी पूजा पाण्डेय ने मुखाग्नि दी।
यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक क्षण बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों और समाज के लोगों ने अंतिम संस्कार में शामिल होकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कई सामाजिक और राजनीतिक लोगों ने जताया शोक
चंद्रकांत पाण्डेय के निधन पर कई सामाजिक और राजनीतिक लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
दोआब क्षेत्रीय संघर्ष समिति के वर्तमान अध्यक्ष और भारतीय राष्ट्रीय फॉरवर्ड ब्लॉक के नेता जनार्दन पाण्डेय, भाजपा नेता पवन पाण्डेय, मेयर प्रत्याशी धीरेन्द्र पाण्डेय तथा रांची हाई कोर्ट के अधिवक्ता जयंत पाण्डेय सहित कई लोगों ने उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
सभी ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की।
दोआब क्षेत्र ने खोया एक समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता
स्थानीय लोगों का कहना है कि चंद्रकांत पाण्डेय हमेशा क्षेत्रीय विकास, सामाजिक एकता और जनहित के मुद्दों के पक्षधर रहे। उन्होंने अपने जीवन में समाज को संगठित करने और विकास के मुद्दों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनके निधन से दोआब क्षेत्र के साथ-साथ श्रोत्रिय ब्राह्मण समाज ने भी एक सक्रिय और समर्पित व्यक्ति को खो दिया है।
लोगों का मानना है कि चंद्रकांत पाण्डेय द्वारा शुरू की गई सामाजिक जागरूकता और जनहित की भावना आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी।
प्रश्न 1. चंद्रकांत पाण्डेय कौन थे?
उत्तर: चंद्रकांत पाण्डेय देवघर जिले के तिलजोरी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता थे, जो दोआब क्षेत्र के विकास और जन आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाते थे।
प्रश्न 2. तिलजोरी घाट पुल आंदोलन में उनकी क्या भूमिका थी?
उत्तर: उन्होंने तिलजोरी घाट पर उच्च स्तरीय पुल निर्माण के लिए आंदोलन शुरू करने का सुझाव दिया था, जिसके बाद दोआब क्षेत्रीय संघर्ष समिति ने इस मुद्दे को लेकर व्यापक आंदोलन चलाया।
प्रश्न 3. उनका निधन कब हुआ?
उत्तर: चंद्रकांत पाण्डेय का निधन बुधवार, 11 मार्च 2026 को हुआ।
प्रश्न 4. अंतिम संस्कार किसने किया?
उत्तर: उनका कोई पुत्र नहीं होने के कारण उनकी नतनी पूजा पाण्डेय ने उन्हें मुखाग्नि दी।
निष्कर्ष:
चंद्रकांत पाण्डेय का जीवन समाज सेवा और जनहित के संघर्षों के लिए समर्पित रहा। दोआब क्षेत्र के विकास से जुड़े आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका हमेशा याद की जाएगी। उनका निधन केवल एक परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ी क्षति है।
Disclaimer: यह समाचार उपलब्ध स्थानीय जानकारी और परिजनों तथा क्षेत्रीय लोगों से प्राप्त विवरण के आधार पर तैयार किया गया है।








