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ठाढ़ीदुलमपुर, देवघर में परम सदगुरु डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज के सान्निध्य में नौ दिवसीय गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन। गंगा व भागवत आरती, 101 विद्वान पंडितों की उपस्थिति और प्रेम मंदिर निर्माण का संकल्प।
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परम सदगुरु डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज के सान्निध्य में ठाढ़ीदुलमपुर में भक्तिमय धार्मिक अनुष्ठान का महासमापन
गंगा व भागवत आरती के साथ नौ दिवसीय गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा पूर्ण
Author संवाददाता | Location देवघर | Date 26 फरवरी 2026
देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित मां जगदंबा कॉलोनी प्रेम मंदिर में आयोजित गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को गंगा माता और भागवत भगवान की महाआरती के साथ भव्य समापन हुआ। इस नौ दिवसीय आध्यात्मिक महापर्व के केंद्र में रहे परम सदगुरु डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज, जिनके सान्निध्य, मार्गदर्शन और दिव्य वाणी ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।
गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम (प्रेम मंदिर) की ओर से इस यज्ञ में प्रतिदिन हजारों श्रद्ओं की उपस्थिति रही। वेद-मंत्रों की गूंज, हरिनाम संकीर्तन और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्ति में सराबोर हो गया।

परम सदगुरु की दिव्य वाणी से प्रवाहित हुई भक्ति-ज्ञान की गंगा
नौ दिनों तक परम सदगुरु डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा का अमृतपान कर श्रद्धालु भावविभोर होते रहे। कथा के दौरान उन्होंने धर्म, सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल अग्नि में आहुति नहीं, बल्कि अपने अहंकार, क्रोध और विकारों की आहुति है। भागवत कथा जीवन को सकारात्मक दिशा देने वाली आध्यात्मिक साधना है।
उनके ओजस्वी प्रवचनों ने युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों सभी को गहराई से प्रभावित किया। कई श्रद्धालुओं ने इसे जीवन परिवर्तनकारी अनुभव बताया।
कलश यात्रा से पूर्णाहुति तक भक्ति का महोत्सव
18 फरवरी को भव्य कलश यात्रा के साथ आरंभ हुए इस आयोजन का 26 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। राधा-कृष्ण, मां जगदंबा और नर्मदेश्वर महादेव की प्राण प्रतिष्ठा के संकल्प ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया।
समापन दिवस पर गंगा माता एवं भागवत भगवान की विशेष आरती हुई। परम सदगुरु के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने व्यासगद्दी को नमन कर समाज में धर्म और संस्कार की ज्योति जलाए रखने का संकल्प लिया।

101 विद्वान पंडितों की उपस्थिति में संपन्न वैदिक अनुष्ठान
उत्तरकाशी-ऋषिकेश से पधारे यज्ञाचार्य रमेश ऋषिकेश के नेतृत्व में 101 विद्वान पंडितों ने पूरे अनुष्ठान को विधिवत संपन्न कराया।
प्रमुख आचार्यों में रमेश चंद्र यादव, राधेश्याम मिश्रा, तारकेश्वर विकलांग, धनंजय झा, सर्वेश मिश्रा, रामानंद मिश्रा, राजकुमार उरांव, दीपक दत्त (झारखंड), विनोद झा, बंसी ठाकुर, संजय सेठवाल, नवलाल, गुरु प्रसाद चौधरी, महेश सेठवाल शामिल रहे।
संचालन टीम में मनोज आनंद, पंकज राघव, जितेंद्र मिर्जा, रंजीत कुमार झा सक्रिय रहे। सहयोगी सदस्यों में रामसेवक झा, शिवकुमार, नरेश मिश्रा, प्रकाश डांगीवाल सहित अन्य सदस्य व्यवस्था में जुटे रहे।
दुर्गा पाठ में चप्पु पाठेय सारस्वत, कृष्णानन्द मिश्र, रविन्द्र झा, महेश झा, कमलाकान्त, पारस मिश्र, चंचल मिश्र, दुर्गा झा, अमृत झा, विश्वनाथ झा, विनय झा ने अनुष्ठान को दिव्यता प्रदान की।
मुख्य यजमान और आयोजन समिति का समर्पण
गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम द्वारा आयोजित इस महायज्ञ के मुख्य यजमान के रूप में कृष्ण कन्हैया राय, योगेंद्र प्रसाद सिन्हा (धनबाद), अमरेश कुमार सिंह, टिंकू कुमार सिंह धर्मपत्नी सहित उपस्थित रहे।
आयोजन समिति के अध्यक्ष महेश प्रसाद राय के नेतृत्व में उपाध्यक्ष अजीत कुमार राय, सचिव अमरेश कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष रंजीत झा, उपकोषाध्यक्ष मनीष कुमार सहित अनेक सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाया।
सुधांशु कुमार राय, गौरव कुमार, अजीत सिंह, संजीव कुमार, कुणाल राय, विनय कुमार राय, अजित कुमार सिंह, आदित्य राय, राजीव नयन, जितेंद्र दुबे, स्वप्निल, ब्रजेश कुमार चौधरी, अजीत कुमार पांडेय सहित सभी कार्यकर्ता सेवा-भाव से जुटे रहे।
समापन अवसर पर परम सदगुरु डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज के करकमलों से सभी विद्वानों, यजमानों, समिति सदस्यों, सोशल मीडिया कर्मियों और मीडिया प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
महाप्रसाद वितरण में उमड़ा जनसैलाब
संध्या आरती के बाद महाप्रसाद वितरण प्रारंभ हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने अनुशासित पंक्तियों में प्रसाद ग्रहण किया। सेवा-भाव से ओतप्रोत समिति के सदस्यों ने व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा।
आस्था, सेवा और संस्कार का संदेश
परम सदगुरु डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज के मार्गदर्शन में संपन्न यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में संस्कार और समरसता का संदेश देने वाला आध्यात्मिक आंदोलन बन गया।
प्रेम मंदिर निर्माण का संकल्प और जनकल्याण की भावना ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
ठाढ़ीदुलमपुर आज आस्था का जीवंत केंद्र बन चुका है, जहां गुरु की कृपा और भक्तों की श्रद्धा मिलकर आध्यात्मिक चेतना का नया अध्याय लिख रही है।
प्रश्न 1: आयोजन का मुख्य आकर्षण क्या रहा?
उत्तर: परम सदगुरु डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज की दिव्य भागवत कथा और गंगा आरती।
प्रश्न 2: महायज्ञ कितने दिनों तक चला?
उत्तर: 18 फरवरी से 26 फरवरी 2026 तक नौ दिनों तक।
प्रश्न 3: कितने विद्वान पंडित शामिल हुए?
उत्तर: उत्तराखंड से आए 101 विद्वान पंडितों ने अनुष्ठान संपन्न कराया।
निष्कर्ष
परम सदगुरु डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज के सान्निध्य में संपन्न यह गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा ठाढ़ीदुलमपुर के इतिहास में आध्यात्मिक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित हो गया है।
धर्म, सेवा और संस्कार की यह ज्योति आने वाले समय में भी समाज को आलोकित करती रहे—इसी मंगलकामना के साथ यह भव्य आयोजन पूर्ण हुआ।
Disclaimer: यह समाचार आयोजन समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित








