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ठाढ़ीदुलमपुर स्थित गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा के दौरान बाबा बैद्यनाथ धाम में विशेष जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विश्वशांति की कामना।
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हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा ठाढ़ीदुलमपुर: गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ के बीच बाबा बैद्यनाथ धाम में दिव्य पूजन
ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक-रुद्राभिषेक, विश्वशांति और जनकल्याण की मंगलकामना से भावविभोर हुआ वातावरण
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संवाददाता | देवघर | 25 फरवरी 2026

बाबा बैद्यनाथ धाम में सामूहिक विशेष पूजन
देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में आयोजित गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा के क्रम में आज प्रातः राष्ट्रीय महान संत डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज ने महायज्ञ में विधिवत पूजन एवं वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए।
इसके उपरांत उत्तराखंड से पधारे यज्ञाचार्य रमेश ऋषिकेश, विद्वान पंडितों और आयोजन समिति के सदस्यों ने अध्यक्ष महेश प्रसाद राय के नेतृत्व में बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक एवं विशेष पूजन किया।
मंदिर प्रांगण में वैदिक मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के गगनभेदी उद्घोष से पूरा धाम शिवमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने यज्ञ की पूर्ण सफलता, विश्वशांति और जनकल्याण की मंगलकामना की।
ठाढ़ीदुलमपुर बना आध्यात्मिक चेतना का केंद्र
ठाढ़ीदुलमपुर की मां जगदंबा कॉलोनी इन दिनों धर्म, भक्ति और वेद की पावन स्वर-लहरियों से गूंज रही है। गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम प्रेम मंदिर में चल रहे नौ दिवसीय गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक चेतना के प्रकाश से आलोकित कर दिया है।
18 फरवरी को भव्य कलश यात्रा के साथ आरंभ हुआ यह महायज्ञ 26 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगा। आठवें दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
धाम परिसर में नव-निर्मित श्री श्री राधा-कृष्ण मंदिर, मां जगदंबा मंदिर और नर्मदेश्वर शिव मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। विशेष रूप से महिलाओं और कन्याओं की सहभागिता उल्लेखनीय रही।

भागवत अमृत से भावविभोर हुए श्रद्धालु
परम सद्गुरु डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज के मुखारविंद से श्रीमद्भागवत कथा का रसास्वादन कर श्रद्धालु भक्ति-रस में डूब गए। कथा के दौरान भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की त्रिवेणी प्रवाहित होती रही।
संध्या बेला में भव्य आरती, गुरू पूजन और वृंदावन से पधारे कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रासलीला ने श्रद्धालुओं को द्वापर युग की अनुभूति करा दी। श्रीकृष्ण लीला के जीवंत मंचन ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया।
वेद-मंत्रों से गूंजा यज्ञ मंडप
दोपहर में उत्तराखंड से पधारे विद्वान आचार्यों ने हवन कुंड में अग्नि प्रज्ज्वलित कर चारों वेद और अठारह पुराणों के मंत्रों का उच्चारण किया। यज्ञ मंडप में वैदिक स्वर-लहरियों की गूंज से अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
कर्ता के रूप में सुशील बाबू आचार्य, ललानन्द झा, सूर्यकान्त झा, माधव झा, सोमनाथ झा, ललित झा, कपेश्वरी, मोहित झा, दिव्य झा, गणेश वरणी महेश रघु ने अनुष्ठान संपन्न कराया।
भोजनाचार्य के रूप में रमेशचन्द्र झा, विमल झा, नीरज, आनन्द और जयंत की सेवा उल्लेखनीय रही। दुर्गा पाठ में चप्पु पाठेय सारस्वत, कृष्णानन्द मिश्र, रविन्द्र झा, महेश झा, कमलाकान्त, पारस मिश्र, चंचल मिश्र, दुर्गा झा, अमृत झा, विश्वनाथ झा, विनय झा ने अपनी विद्वत्ता से अनुष्ठान को दिव्यता प्रदान की।
रामेश्वर धाम से नारायण देवता और सोमेश्वर देवता सहित अन्य विद्वान पंडितों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा दी।

महाप्रसाद वितरण में उमड़ा आस्था का सागर
संध्या होते-होते महाप्रसाद वितरण प्रारंभ हुआ। हजारों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। भीड़ के बावजूद अनुशासन और व्यवस्था अनुकरणीय रही।
समिति के सदस्य सेवा-भाव से ओतप्रोत होकर व्यवस्था में जुटे रहे। आयोजन सेवा, समर्पण और संगठन क्षमता का प्रेरणादायक उदाहरण बन गया।
आयोजन समिति निभा रही है भागीरथी भूमिका
इस महाआयोजन को सफल बनाने में गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम की समिति दिन-रात सक्रिय है।
अध्यक्ष महेश प्रसाद राय, उपाध्यक्ष अजीत कुमार राय, संयोजक (बिहार-झारखंड) कृष्ण कन्हैया राय, सचिव अमरेश कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष रंजीत झा, उपकोषाध्यक्ष मनीष कुमार, मुख्य यजमान योगेंद्र प्रसाद सिन्हा, पिंटू तिवारी, सुधांशु कुमार राय, गौरव कुमार, अजीत सिंह, आदित्य राय, राजीव नयन, कुणाल राय, स्वप्निल, जितेंद्र दुबे सहित अनेक श्रद्धालु अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।

विभिन्न राज्यों से पहुंच रहे श्रद्धालु
झारखंड, बिहार, बंगाल और उत्तराखंड से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यज्ञ स्थल पर पहुंच रहे हैं। बुधवार को उत्तराखंड निवासी भाजपा सहयोग के पूर्व राष्ट्रीय समन्वयक सह राष्ट्रीय हॉट्रीकल्चर बोर्ड के निदेशक विरेंद्रा जुयल ने कथा श्रवण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
देवघर जिला भाजपा अध्यक्ष सचिन रवानी सहित कई गणमान्य श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
आस्था, सेवा और संस्कार का दिव्य संगम
यह महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में सेवा, समरसता और संस्कार की ज्योति जलाने वाला आध्यात्मिक महोत्सव बन गया है।
भागवत कथा के माध्यम से आध्यात्मिक चेतना का प्रसार हो रहा है, वहीं आदर्श विवाह और विश्रामालय निर्माण जैसे सामाजिक कार्य समाज के प्रति दायित्व का संदेश दे रहे हैं।
ठाढ़ीदुलमपुर आज आस्था का जीवंत तीर्थ बन चुका है।
पूर्णाहुति की प्रतीक्षा, भक्ति की धारा अविरल
कल 26 फरवरी को पूर्णाहुति के साथ यह नौ दिवसीय महायज्ञ संपन्न होगा। परंतु यहां से प्राप्त भक्ति, सेवा और संस्कार की प्रेरणा लंबे समय तक श्रद्धालुओं के जीवन को आलोकित करती रहेगी।
वेद की वाणी, गुरु की कृपा और भक्तों की अटूट आस्था मिलकर एक दिव्य युग का सृजन कर रही है।

बाबा बैद्यनाथ धाम में गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ के दौरान विशेष रुद्राभिषेक
ठाढ़ीदुलमपुर महायज्ञ के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ धाम में सामूहिक जलाभिषेक करते श्रद्धालु
प्रश्न 1. गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ कहां हो रहा है?
उत्तर: ठाढ़ीदुलमपुर, देवघर स्थित गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम में।
प्रश्न 2. विशेष पूजन कहां किया गया?
उत्तर: बाबा बैद्यनाथ धाम में ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया गया।
प्रश्न 3. पूर्णाहुति कब होगी?
उत्तर: 26 फरवरी 2026 को।
प्रश्न 4. आयोजन का उद्देश्य क्या है?:
विश्वशांति, जनकल्याण और समाज में सेवा-संस्कार की भावना का प्रसार।
निष्कर्ष
ठाढ़ीदुलमपुर में आयोजित यह गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ श्रद्धा, सेवा और संस्कार की त्रिवेणी बन चुका है। भक्ति की यह अविरल धारा आने वाले समय में भी समाज को आध्यात्मिक ऊंचाइयों की ओर अग्रसर करती रहेगी।
Disclaimer: यह समाचार आयोजन समिति से प्राप्त जानकारी और स्थल पर उपलब्ध विवरण के आधार पर तैयार किया गया है।










