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देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित प्रेम मंदिर में आयोजित गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। डॉ दुर्गेश आचार्य ने गौमाता को गंगा का स्वरूप बताया।
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गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ के सातवें दिन उमड़ा आस्था का सागर, गौमाता को बताया गंगा का साक्षात रूप
रासलीला, यज्ञ और कथा से गुंजायमान हुआ प्रेम मंदिर परिसर
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संवाददाता | देवघर | 24 फरवरी 2026

देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित मां जगदंबा कॉलोनी में आयोजित नौ दिवसीय गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। गंगा विश्वशांति सद्भावना धाम के तत्वावधान में प्रेम मंदिर परिसर में चल रहे इस आध्यात्मिक आयोजन में सुबह से देर शाम तक वेद मंत्रों की गूंज, हरि-नाम संकीर्तन और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी उपस्थिति ने आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया। अनुशासित व्यवस्था और सेवा-भाव आयोजन की विशेष पहचान रही।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ यज्ञ अनुष्ठान
सातवें दिन की शुरुआत प्रातःकाल वैदिक विधि-विधान से यज्ञ के साथ हुई। विद्वान आचार्यों के सस्वर मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं ने हवनकुंड में घी, समिधा और नैवेद्य की आहुति अर्पित की।
स्वाहा की गूंज और धूप-हवन की सुगंध से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, समाज की उन्नति और विश्वशांति की कामना की।
नव-निर्मित मंदिरों में दर्शन के लिए लगी लंबी कतार
प्रेम मंदिर परिसर स्थित नव-निर्मित श्री श्री राधा-कृष्ण मंदिर, मां जगदंबा मंदिर और भगवान शिव मंदिर में दर्शन के लिए सुबह से लंबी कतारें लगी रहीं। उत्तराखंड से पधारे यज्ञाचार्य रमेश ऋषिकेश के सान्निध्य में विधि-विधान से पूजन-अर्चन संपन्न हुआ।
श्रद्धालु पुष्प, फल और प्रसाद अर्पित कर अपने आराध्य के समक्ष नतमस्तक हुए। कई परिवार बच्चों को सनातन परंपराओं की जानकारी देते नजर आए।
वृंदावन से आई रासलीला ने बांधा समां
कार्यक्रम के अंतर्गत वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा राधा-कृष्ण की रासलीला का सजीव मंचन प्रस्तुत किया गया। मधुर भजनों, भावपूर्ण संवाद और आकर्षक वेशभूषा ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।

गौमाता ही गंगा का स्वरूप: डॉ दुर्गेश आचार्य
अपराह्न तीन बजे से प्रारंभ श्रीमद्भागवत कथा में राष्ट्रीय संत डॉ दुर्गेश आचार्य जी महाराज ने गंगा अष्टादश महापुराण के रहस्यों का विस्तृत वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि गौमाता गंगा का साक्षात रूप है और गौसेवा से गंगा-सेवा का पुण्य प्राप्त होता है। गंगा और यमुना की आराधना करने वाला व्यक्ति दैवी कृपा का पात्र बनता है।
उन्होंने देवघर की पौराणिक महिमा का उल्लेख करते हुए भगवान शिव, नारायण, बैजू ग्वाला और शिवगंगा की कथा का विस्तार से वर्णन किया तथा नदियों की स्वच्छता और संरक्षण का आह्वान किया।
इन आचार्यों और सहयोगियों की रही सक्रिय सहभागिता
आयोजन में प्रमुख रूप से डॉ दुर्गेश आचार्य, यज्ञाचार्य रमेश ऋषिकेश (उत्तराखंड), रविंद्र सेवावाल, धनानंद मिश्रा, रघुवीर जेमानी, गोपाल मिश्रा, गणेश गोयल, त्रिलोचन, अशोक शुक्ल, आलोक झा, रजनीश झा, संजीव कुमार, विवेक, रेशु जेमानी, अमर कुमार, विजय सेवावाल, हरीश झा, जयप्रकाश, महेश चंद्र झा, लोकेश मिश्रा, पवन मिश्रा गोस्वामी, प्रकाश मिश्रा, प्रदीप मिश्रा, रमन खंडूरी, दुर्गेश जेमानी, हेमंत मिश्रा, विवेक झा और शुभम रेड्डी (पवन) सहित अन्य सहयोगियों का योगदान उल्लेखनीय रहा।
समिति की अनुशासित व्यवस्था बनी आकर्षण का केंद्र
समिति के अध्यक्ष महेश प्रसाद राय के नेतृत्व में उपाध्यक्ष अजीत कुमार राय, मुख्य संयोजक बिहार-झारखंड सह मुख्य यजमान कृष्ण कन्हैया राय, सचिव सह मुख्य यजमान अमरेश कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष रंजीत झा, उपकोषाध्यक्ष मनीष कुमार सहित सभी सदस्यों ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
स्वयंसेवकों ने जलपान, प्रसाद वितरण और बैठने की व्यवस्था में अनुशासित सहयोग दिया।
प्रसाद वितरण और सामूहिक भंडारा
यज्ञ एवं कथा के उपरांत श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। सामूहिक भंडारे में बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।

क्षेत्र में बढ़ी आध्यात्मिक चेतना
सातवें दिन का आयोजन भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। आगामी पूर्णाहुति को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से समाज में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना को बल मिलता है।
प्रश्न 1: गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ कहां आयोजित हो रहा है?
उत्तर: देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित प्रेम मंदिर परिसर में।
प्रश्न 2: सातवें दिन का मुख्य आकर्षण क्या रहा?
उत्तर: वैदिक यज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा और वृंदावन की रासलीला।
प्रश्न 3: कथा किसने सुनाई?
उत्तर: राष्ट्रीय संत डॉ दुर्गेश आचार्य ने।
निष्कर्ष
गंगा अष्टादश महापुराण यज्ञ सह श्रीमद्भागवत कथा का सातवां दिन आध्यात्मिक उत्कर्ष, सांस्कृतिक एकता और सनातन परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति का प्रतीक बना। भक्तों की आस्था और समिति की समर्पित व्यवस्था ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।
Disclaimer: यह समाचार आयोजन समिति और उपस्थित श्रद्धालुओं से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।











