https://jssc-cgl-exam-cancelled-hemant-soren-government-students-cbi-inquiry-jharkhand
झारखंड / शिक्षा / रोजगार
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द, हेमंत सरकार का बड़ा फैसला; सीबीआई जांच पर अड़े छात्र
झारखंड सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द होंगी। छात्र अब भी सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हैं।
जेएसएससी-सीजीएल, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द, हेमंत सोरेन, झारखंड छात्र आंदोलन, सीबीआई जांच, टीडीपीएल परीक्षा, भर्ती परीक्षा विवाद, झारखंड सरकारी नौकरी

जेएसएससी, जेएसएससी-सीजीएल, हेमंत सोरेन, झारखंड, छात्र आंदोलन, सीबीआई जांच, सरकारी नौकरी, भर्ती परीक्षा, टीडीपीएल

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के फैसले से जुड़ा बादल पत्रलेख का सोशल मीडिया पोस्ट
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले पर बादल पत्रलेख का सोशल मीडिया पोस्ट
बादल पत्रलेख के सोशल मीडिया पोस्ट का स्क्रीनशॉट
संवाददाता : रांची/देवघर : 17 अगस्त 2026
लगभग 5 मिनट
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द! हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, सीबीआई जांच पर अब भी अड़े छात्र
24 दिन के आंदोलन के बाद सरकार का बड़ा निर्णय, टीडीपीएल से जुड़ी परीक्षाएं भी रद्द; बादल पत्रलेख ने बताया छात्रों के हित में ऐतिहासिक कदम
रांची/देवघर। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले 24 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच सोमवार को हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया। सरकार ने जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही टीडीपीएल एजेंसी के माध्यम से आयोजित कराई गई परीक्षाओं और उनसे संबंधित परिणामों को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया है। सरकार की ओर से वर्ष 2014 से हुई भर्ती परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों की व्यापक जांच कराने तथा परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए समिति गठित करने की बात भी कही गई है।
सरकार के इस फैसले के बाद रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच खुशी का माहौल बन गया। लंबे समय से जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से जांच कराने की मांग कर रहे अभ्यर्थियों ने फैसले को अपनी बड़ी जीत बताया। हालांकि, खुशी के बीच छात्रों ने यह भी साफ कर दिया कि उनकी लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है।
बादल पत्रलेख ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दी प्रतिक्रिया
पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने अपने सोशल मीडिया खाते पर सरकार के फैसले से संबंधित पोस्ट साझा करते हुए इसे छात्रों के हित में बड़ा फैसला बताया। उनके द्वारा साझा पोस्ट में लिखा गया है कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार ने संवेदनशीलता और जवाबदेही की मिसाल पेश करते हुए छात्र-युवाओं के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
बादल पत्रलेख के साझा किए गए पोस्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष मंत्रिमंडलीय बैठक में छात्र-युवाओं के हित में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। पोस्ट में दावा किया गया है कि टीडीपीएल एजेंसी द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने के साथ जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया है।
पोस्ट में यह भी कहा गया है कि युवाओं के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा झारखंड सरकार पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
24 दिनों से आंदोलन कर रहे थे छात्र
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 24वें दिन तक पहुंच चुका था।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराना शामिल था। छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना और भूख हड़ताल के जरिए सरकार पर लगातार दबाव बना रहे थे।
इस दौरान सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन सीबीआई जांच और परीक्षा रद्द करने जैसे प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी। सोमवार को सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारियों को उनकी एक प्रमुख मांग पूरी होने की उम्मीद जगी।
परीक्षा रद्द होने के बाद भी क्यों नहीं खत्म हुआ आंदोलन?
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द होने के बावजूद छात्रों ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है। आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है। वे परीक्षा में कथित अनियमितताओं की पूरी सच्चाई सामने लाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
छात्रों की सबसे प्रमुख लंबित मांग सीबीआई जांच है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भर्ती प्रक्रिया में कहां और किस स्तर पर गड़बड़ी हुई। आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सीबीआई जांच की मांग पर सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन समाप्त करने पर विचार नहीं किया जाएगा।

वर्ष 2014 से हुई भर्ती परीक्षाओं की जांच
सरकार की ओर से केवल मौजूदा परीक्षा विवाद तक मामला सीमित नहीं रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2014 से हुई भर्ती परीक्षाओं में सामने आई कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच कराने का निर्णय लिया गया है। साथ ही परीक्षा व्यवस्था में सुधार और भविष्य में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए समिति गठित करने की बात कही गई है।
सरकार के इस कदम का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया की समीक्षा करना और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होने देना बताया जा रहा है। परीक्षा व्यवस्था में मानक संचालन प्रक्रिया का कड़ाई से पालन, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सरकार की ओर से सुधार की दिशा में कदम उठाने की बात सामने आई है।
14वीं जेपीएससी और बैकलॉग परीक्षाओं पर भी बड़ा फैसला
छात्र आंदोलन के बीच 14वीं जेपीएससी परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को लेकर भी सरकार की ओर से बड़ा निर्णय सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार इन परीक्षाओं को भी रद्द करने की प्रक्रिया पर निर्णय लिया गया है। इससे आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की कई प्रमुख मांगों पर सरकार के रुख में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है।
ऐसे में अब छात्रों की नजर जांच की आगे की प्रक्रिया और नई भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था पर है। अभ्यर्थियों का कहना है कि नई परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भरोसेमंद होनी चाहिए, ताकि मेहनत करने वाले युवाओं के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो।
सरकार के फैसले के बाद आगे क्या?
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नई परीक्षा कब और किस व्यवस्था के तहत आयोजित होगी। हजारों अभ्यर्थियों ने लंबे समय तक इस परीक्षा की तैयारी की थी। ऐसे में सरकार के सामने नई परीक्षा की प्रक्रिया को जल्द शुरू करने के साथ अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखने की चुनौती भी होगी।
दूसरी ओर, छात्रों की सीबीआई जांच की मांग ने पूरे मामले को अभी पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है। सरकार ने जांच और परीक्षा सुधार की दिशा में कदम उठाने की बात कही है, लेकिन आंदोलनकारी छात्र केंद्रीय जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।
छात्रों की जीत या आंदोलन का नया चरण?
सरकार के फैसले को आंदोलनकारी छात्र अपनी बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं, लेकिन सीबीआई जांच की मांग के कारण आंदोलन का अगला चरण अभी तय होना बाकी है। एक तरफ परीक्षा रद्द होने से छात्रों को राहत मिली है, तो दूसरी तरफ कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर उनका दबाव जारी है।
बादल पत्रलेख के सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार के फैसले को छात्रों के हित में संवेदनशील और जवाबदेह कदम बताया गया है। अब देखने वाली बात होगी कि सरकार जांच की प्रक्रिया को कितनी तेजी से आगे बढ़ाती है और भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को लेकर क्या ठोस सुधार लागू किए जाते हैं।
फिलहाल जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द होने का फैसला झारखंड के छात्र आंदोलन के लिए बड़ा मोड़ माना जा रहा है। परीक्षा रद्द करने की मांग पूरी होने के बाद आंदोलनकारियों के सामने अब अगली बड़ी लड़ाई कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच और भर्ती व्यवस्था में स्थायी सुधार की है।









