श्रावण संक्रांति पर बाबा बैद्यनाथ धाम में सजी अनोखी बेलपत्र प्रदर्शनी, जानिए क्यों है यह परंपरा पूरे देश में सबसे अलग

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श्रावण संक्रांति पर बाबा बैद्यनाथ धाम में सजी अनोखी बेलपत्र प्रदर्शनी, जानिए क्यों है यह परंपरा पूरे देश में सबसे अलग

एसपी प्रवीण पुष्कर ने किया प्रदर्शनी का अवलोकन, पंडा धर्मरक्षिणी सभा ने बताया बेलपतरियों की तपस्या, सेवा और सदियों पुरानी आध्यात्मिक विरासत का महत्व

श्रावण संक्रांति पर बाबा बैद्यनाथ धाम में बेलपत्र प्रदर्शनी शुरू, जानिए अनोखी परंपरा और बेलपतरियों की तपस्या

देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रावण संक्रांति पर बेलपत्र प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। एसपी प्रवीण पुष्कर ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। पढ़ें बेलपतरियों की कठिन तपस्या, बम-बम बाबा से जुड़ी परंपरा और इसका धार्मिक महत्व।

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श्रावण संक्रांति पर बाबा बैद्यनाथ धाम में सजी अनोखी बेलपत्र प्रदर्शनी, जानिए क्यों है यह परंपरा पूरे देश में सबसे अलग

देवघर | सुनील झा : 18.07.2026

विश्वप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में बंगला श्रावण मास की संक्रांति के साथ सोमवार को पारंपरिक बेलपत्र प्रदर्शनी का शुभारंभ हुआ। सावन मास के प्रत्येक सोमवार को आयोजित होने वाली यह प्रदर्शनी देवघर की सबसे अनूठी धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। श्रद्धालुओं ने न केवल कलात्मक ढंग से सजाए गए बेलपत्रों का दर्शन किया, बल्कि इस अद्भुत परंपरा के पीछे छिपी तपस्या, सेवा और समर्पण की भावना को भी नजदीक से जाना।

देवघर के पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर ने भी बाबा मंदिर परिसर पहुंचकर बेलपत्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान पंडा धर्मरक्षिणी सभा के महामंत्री निर्मल कुमार झा (मंटू) ने उन्हें प्रदर्शनी के इतिहास, धार्मिक महत्व और बेलपतरियों की वर्षों पुरानी साधना की विस्तृत जानकारी दी। मौके पर सभा के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खवाड़े, बाबा मंदिर प्रबंधक रमेश परिहस्त सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

देवघर की पहचान बन चुकी है बेलपत्र प्रदर्शनी

बाबा बैद्यनाथ धाम की यह प्रदर्शनी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि देवघर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मान्यता है कि देश के अन्य प्रमुख शिवधामों में इस स्वरूप की बेलपत्र प्रदर्शनी देखने को नहीं मिलती। यही कारण है कि हर वर्ष सावन में हजारों श्रद्धालु विशेष रूप से इस परंपरा को देखने बाबा धाम पहुंचते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस परंपरा की शुरुआत महान संत बम-बम बाबा ने की थी। उनके द्वारा प्रारंभ की गई यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और अनुशासन के साथ जीवित है। समय के साथ यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति संरक्षण और निःस्वार्थ सेवा का प्रतीक बन गई है।

बेलपत्र लाना नहीं, एक कठिन तपस्या है

बेलपत्र प्रदर्शनी में सजने वाले प्रत्येक बेलपत्र के पीछे कठिन परिश्रम और समर्पण की कहानी छिपी होती है। बेलपत्र लाने वाले श्रद्धालुओं को स्थानीय भाषा में बेलपतरिया कहा जाता है। उनके लिए यह कार्य किसी सामान्य संग्रह अभियान की तरह नहीं, बल्कि भगवान शिव की आराधना का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान होता है।

बेलपतरिया दूरस्थ जंगलों और पहाड़ियों में नंगे पैर जाकर बेल के वृक्षों की खोज करते हैं। जिन स्थानों पर बेल के वृक्ष मिलते हैं, उन्हें वे अपना “अड्डा” कहते हैं। वर्षों के अनुभव से ही इन स्थानों की जानकारी मिलती है और इन्हें अत्यंत गोपनीय रखा जाता है।

वृक्ष से अनुमति लेकर तोड़े जाते हैं बेलपत्र

बेल के वृक्ष तक पहुंचने के बाद श्रद्धालु सबसे पहले उसकी विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। वृक्ष को भोग और नैवेद्य अर्पित किया जाता है। इसके बाद करबद्ध होकर बेलपत्र तोड़ने की अनुमति मांगी जाती है। बेलपत्र तोड़ते समय वृक्ष को होने वाली पीड़ा के लिए श्रद्धापूर्वक क्षमा-याचना भी की जाती है।

यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का भी संदेश देती है।

कांटों से भरे रास्ते पर भी नहीं डगमगाती श्रद्धा

बेल के वृक्षों के नीचे फैले नुकीले कांटे बेलपतरियों की सबसे बड़ी परीक्षा होते हैं। कई बार कांटे पैरों में गहराई तक धंस जाते हैं और असहनीय पीड़ा होती है। इसके बावजूद श्रद्धालु बिना किसी शिकायत के अपनी साधना जारी रखते हैं।

जंगलों में विषैले जीव-जंतु, कीट-पतंगे और दुर्गम पहाड़ी रास्ते भी इस यात्रा को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। लेकिन बाबा बैद्यनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा हर कठिनाई को छोटा बना देती है।

कलात्मक सजावट के बाद बनती है आकर्षण का केंद्र

जंगलों से लाए गए बेलपत्रों को अत्यंत सावधानी से सुरक्षित रखा जाता है, ताकि उनकी ताजगी बनी रहे। इसके बाद सबसे सुंदर और आकर्षक बेलपत्रों का चयन कर उन्हें थालों में कलात्मक ढंग से सजाया जाता है।

यही सजे हुए बेलपत्र श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ प्रदर्शनी में रखे जाते हैं। प्रदर्शनी समाप्त होने के बाद इन्हें विधिवत भगवान बाबा बैद्यनाथ को अर्पित किया जाता है।

सावन संक्रांति से भाद्रपद संक्रांति तक चलता है आयोजन

बेलपत्र प्रदर्शनी का आयोजन बंगला श्रावण संक्रांति से प्रारंभ होकर भाद्रपद संक्रांति तक प्रत्येक सोमवार किया जाता है। हालांकि बेलपत्र संग्रह का कार्य पूरे वर्ष चलता रहता है, लेकिन सार्वजनिक प्रदर्शनी केवल सावन मास में ही लगाई जाती है।

इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रदर्शनी का अवलोकन करते हैं और बेलपत्रों की विविधता, आकार तथा कलात्मक सजावट को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवित है यह अमूल्य विरासत

देवघर में बेलपतरियों के कई संगठित दल वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। उनके सदस्य पूरे वर्ष जंगलों से बेलपत्र लाकर बाबा बैद्यनाथ को अर्पित करते हैं। नई पीढ़ी भी अपने पूर्वजों की इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है।

आज के समय में जब अधिकांश कार्य व्यक्तिगत लाभ से जुड़े होते हैं, ऐसे दौर में बेलपतरियों का निःस्वार्थ समर्पण समाज के लिए प्रेरणा का विषय है। वे बिना किसी अपेक्षा के बाबा की सेवा को अपना सबसे बड़ा सौभाग्य मानते हैं और इसी भावना से इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।

श्रद्धा, सेवा और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम

बेलपत्र प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि धार्मिक आस्था केवल पूजा तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसमें प्रकृति के प्रति सम्मान, अनुशासन, सेवा और त्याग का भी समावेश होता है। यही कारण है कि बाबा बैद्यनाथ धाम की यह परंपरा हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है और देवघर की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई प्रदान करती है।

श्रावण संक्रांति पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर में आयोजित बेलपत्र प्रदर्शनी का अवलोकन करते देवघर एसपी प्रवीण पुष्कर एवं पंडा धर्मरक्षिणी सभा के पदाधिकारी।

निष्कर्ष

बाबा बैद्यनाथ धाम की बेलपत्र प्रदर्शनी केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि देवघर की जीवंत सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति सम्मान और निःस्वार्थ सेवा की परंपरा का अद्भुत उदाहरण है। बम-बम बाबा से प्रारंभ हुई यह परंपरा आज भी बेलपतरियों की तपस्या और समर्पण के कारण उसी गरिमा के साथ जीवित है और सावन में बाबा धाम आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।

1. बाबा बैद्यनाथ धाम की बेलपत्र प्रदर्शनी कब आयोजित होती है?

बंगला श्रावण संक्रांति से भाद्रपद संक्रांति तक सावन के प्रत्येक सोमवार को।

2. बेलपतरिया किसे कहा जाता है?

वे श्रद्धालु जो जंगलों और पहाड़ियों से बेलपत्र लाकर भगवान बाबा बैद्यनाथ को अर्पित करते हैं।

3. इस परंपरा की शुरुआत किसने की थी?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस परंपरा की शुरुआत महान संत बम-बम बाबा ने की थी।

4. बेलपत्र प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, बेलपतरियों की तपस्या का सम्मान और देवघर की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना।

5. यह परंपरा क्यों विशेष मानी जाती है?

क्योंकि यह केवल पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, सेवा, त्याग और आस्था का अद्भुत संगम है तथा ऐसी प्रदर्शनी अन्य प्रमुख शिवधामों में विरल मानी जाती है।

 

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Author: Baba Wani

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