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झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 में बैजनाथ राम, प्रणव झा और परिमल नाथवानी के नामांकन के बाद दूसरी सीट पर मुकाबला रोचक हो गया है। जानिए विधानसभा का पूरा गणित, परिमल नाथवानी की भूमिका और कांग्रेस की बढ़ती चिंता।
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झारखंड राज्यसभा चुनाव में दूसरी सीट पर सस्पेंस बरकरार, क्या कांग्रेस बचा पाएगी अपनी प्रतिष्ठा?
बैजनाथ राम, प्रणव झा और परिमल नाथवानी ने भरा नामांकन, परिमल नाथवानी की सक्रियता से बढ़ा राजनीतिक रोमांच
सुनील झा
रांची/देवघर
8 जून 2026

झारखंड में राज्यसभा चुनाव ने बढ़ाई सियासी हलचल
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। सोमवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रत्याशी एवं पूर्व मंत्री बैजनाथ राम, कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा तथा निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। नामांकन के साथ ही अब राज्य की राजनीति में जोड़-तोड़, रणनीतिक बैठकों और संभावित क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
बैजनाथ राम के नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राजद विधायक सुरेश पासवान सहित महागठबंधन के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। नामांकन के दौरान महागठबंधन ने एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया कि गठबंधन अपने दोनों उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कल्पना सोरेन ने दी शुभकामनाएं
झामुमो विधायक कल्पना सोरेन ने सोशल मीडिया पर बैजनाथ राम को बधाई देते हुए लिखा कि उनका राजनीतिक अनुभव, जनसेवा के प्रति समर्पण और सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता संसद में झारखंड की आवाज को और मजबूत बनाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि बैजनाथ राम राज्यसभा में झारखंड के हितों का प्रभावी प्रतिनिधित्व करेंगे।
प्रत्याशी चयन को लेकर लंबे समय तक बना रहा सस्पेंस
राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद से ही विभिन्न दलों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं। कई नाम चर्चा में थे और राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग समीकरणों पर चर्चा हो रही थी। हालांकि अंततः झामुमो ने बैजनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाकर सभी कयासों पर विराम लगा दिया।
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने अब तक आधिकारिक तौर पर किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। इसके बावजूद उद्योगपति परिमल नाथवानी की सक्रियता ने चुनावी समीकरणों को रोचक बना दिया है।
परिमल नाथवानी क्यों बने चर्चा का केंद्र?
राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र खरीदने वालों में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव वल्लभ, आंध्र प्रदेश के पूर्व सांसद विजय साई रेड्डी और उद्योगपति व दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रहे परिमल नाथवानी शामिल थे। बाद में गौरव वल्लभ और विजय साई रेड्डी चुनावी दौड़ से बाहर हो गए।
इसके बाद परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नाथवानी की मौजूदगी ही दूसरी सीट के मुकाबले को रोचक बना रही है। हालांकि उन्होंने स्वयं को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उन्हें भाजपा समर्थित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।

पहली सीट लगभग तय, असली लड़ाई दूसरी सीट पर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पहली सीट पर झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत लगभग तय है। महागठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।
लेकिन दूसरी सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। यहां कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच संघर्ष की स्थिति बन सकती है।
यही कारण है कि कांग्रेस की चिंता बढ़ी हुई दिखाई दे रही है। कांग्रेस के पास अपने दम पर जीत के लिए आवश्यक संख्या नहीं है और उसे सहयोगी दलों के साथ-साथ अन्य विधायकों के समर्थन की भी आवश्यकता होगी।
विधानसभा का पूरा गणित
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं।
दलगत स्थिति
दल
विधायक
झारखंड मुक्ति मोर्चा
34
कांग्रेस
16
भाजपा
21
राष्ट्रीय जनता दल
4
भाकपा (माले)
2
आजसू
1
जनता दल (यू)
1
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास)
1
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा
1
कुल
81
गठबंधनवार स्थिति
महागठबंधन – 56 विधायक
झामुमो – 34
कांग्रेस – 16
राजद – 4
भाकपा (माले) – 2
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन – 24 विधायक
भाजपा – 21
आजसू – 1
जदयू – 1
लोजपा (रामविलास) – 1
अन्य
जेएलकेएम – 1
क्या हो सकती है क्रॉस वोटिंग?
राज्यसभा चुनाव में विधायकों को वरीयता क्रम के आधार पर मतदान करना होता है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की संभावना हमेशा बनी रहती है।
यदि किसी भी दल के विधायक पार्टी लाइन से हटकर मतदान करते हैं तो परिणाम अप्रत्याशित हो सकते हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षक मानते हैं कि दूसरी सीट पर मुकाबला जितना नजदीकी होगा, क्रॉस वोटिंग की चर्चा उतनी ही तेज होगी।
जयराम महतो के एक वोट पर टिकी निगाहें
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के विधायक जयराम महतो का एक वोट इस चुनाव में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि एक वोट से किसी चुनाव का पूरा परिणाम नहीं बदलता, लेकिन करीबी मुकाबले की स्थिति में यह वोट राजनीतिक संदेश देने वाला साबित हो सकता है। यही कारण है कि सभी दल छोटे दलों और स्वतंत्र राजनीतिक ताकतों पर भी नजर बनाए हुए हैं।
कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव कांग्रेस के लिए केवल एक राज्यसभा सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि प्रतिष्ठा का सवाल भी बन गया है।
यदि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा जीतते हैं तो यह महागठबंधन की मजबूती का संदेश होगा। वहीं यदि परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं जाता है तो विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इसे गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी के रूप में भी देख सकते हैं।
परिणाम से मिलेगा बड़ा राजनीतिक संकेत
राज्यसभा चुनाव का परिणाम केवल दो सांसदों के चयन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे झारखंड की राजनीति की दिशा, महागठबंधन की एकजुटता, भाजपा की रणनीति और आगामी राजनीतिक समीकरणों के संकेत भी मिलेंगे।
फिलहाल नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब सभी की निगाहें मतदान और मतगणना पर टिकी हैं। दूसरी सीट पर बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने इस चुनाव को बेहद रोचक बना दिया है। आने वाले दिनों में यह मुकाबला झारखंड की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बना रह सकता है।
प्रश्न: झारखंड में राज्यसभा की कितनी सीटों के लिए चुनाव हो रहा है?
उत्तर: राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव हो रहा है।
प्रश्न: झामुमो का उम्मीदवार कौन है?
उत्तर: पूर्व मंत्री बैजनाथ राम झामुमो के उम्मीदवार हैं।
प्रश्न: कांग्रेस ने किसे उम्मीदवार बनाया है?
उत्तर: कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है।
प्रश्न: परिमल नाथवानी किस रूप में चुनाव लड़ रहे हैं?
उत्तर: परिमल नाथवानी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं।
प्रश्न: झारखंड विधानसभा में महागठबंधन के कितने विधायक हैं?
उत्तर: महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं।










