देवघर नगर निगम विवाद: प्रीति नरौने ने खोला मोर्चा, जोनल व स्थायी समिति गठन पर उठे गंभीर सवाल
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देवघर नगर निगम में जोनल व स्थायी समिति गठन को लेकर विवाद गहराया। वार्ड 31 की पार्षद प्रीति नरौने ने तीसरे पार्षद के रूप में मोर्चा खोलते हुए प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
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जोनल व स्थायी समिति विवाद में प्रीति नरौने मुखर, तीसरे पार्षद के रूप में खोला मोर्चा
नगर निगम की प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल, कई अन्य पार्षद भी विरोध की तैयारी में
संवाददाता | देवघर | 29 अप्रैल 2026

देवघर नगर निगम में जोनल (क्षेत्रीय) एवं स्थायी समिति के गठन को लेकर जारी विवाद अब तेज होता जा रहा है। वार्ड संख्या 31 की पार्षद प्रीति नरौने इस मामले में सबसे मुखर चेहरा बनकर उभरी हैं। तीसरे पार्षद के रूप में उन्होंने खुलकर मोर्चा खोलते हुए नगर आयुक्त को कड़ा पत्र लिखा है और पूरी चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उनके इस कदम के बाद नगर निगम की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में कई अन्य पार्षद भी इस मुद्दे पर खुलकर विरोध दर्ज करा सकते हैं, जिससे यह विवाद और गहराने की संभावना है।
चयन प्रक्रिया पर लगाए नियम उल्लंघन के आरोप
प्रीति नरौने द्वारा 29 अप्रैल 2026 को नगर आयुक्त को भेजे गए पत्र में विस्तार से आरोप लगाया गया है कि 24 अप्रैल को नगर निगम सभागार में आयोजित बैठक के दौरान जोनल एवं स्थायी समिति के गठन में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।
उन्होंने स्पष्ट कहा है कि पूरी प्रक्रिया झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार, नियमों की अनदेखी करते हुए जल्दबाजी में निर्णय लिए गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
अधिनियम की धाराओं का दिया हवाला
अपने पत्र में प्रीति नरौने ने अधिनियम की धारा 49(1) और 49(2) का हवाला देते हुए कहा कि जोनल समितियों के गठन में संबंधित वार्डों के सभी निर्वाचित पार्षदों को शामिल करना अनिवार्य है।
इसके बावजूद, बैठक में लिए गए निर्णय इस नियम के विपरीत बताए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया मनमाने ढंग से की गई और इसमें पारदर्शिता का अभाव स्पष्ट रूप से देखा गया।
वीडियो रिकॉर्डिंग का किया उल्लेख
पार्षद ने अपने पत्र में यह भी कहा कि बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग इस बात का प्रमाण है कि प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। उनके अनुसार, रिकॉर्डिंग से यह स्पष्ट होता है कि निर्णय जल्दबाजी में और निर्धारित प्रक्रिया को दरकिनार कर लिए गए।
उन्होंने इसे जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि इस तरह की कार्यशैली लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी चिंताजनक है।

निर्णय रद्द कर पुनः प्रक्रिया की मांग
प्रीति नरौने ने नगर आयुक्त से 18 अप्रैल को जारी पत्र और 24 अप्रैल की बैठक में लिए गए सभी निर्णयों को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।
उन्होंने आग्रह किया है कि पूरी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप दोबारा संपन्न कराया जाए, ताकि सभी पार्षदों को समान अवसर मिल सके और पारदर्शिता सुनिश्चित हो।
साथ ही उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होंगी।
तीसरे पार्षद के रूप में बढ़ी अहमियत
इस पूरे घटनाक्रम में प्रीति नरौने का कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह इस मुद्दे पर खुलकर विरोध दर्ज कराने वाली तीसरी पार्षद बन गई हैं।
इससे पहले भी दो पार्षदों ने इसी तरह के आरोप लगाए थे, लेकिन नरौने के सक्रिय रुख के बाद इस विरोध को नई मजबूती मिलती दिख रही है।
सामूहिक विरोध की आहट
नगर निगम के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, कई अन्य पार्षद भी इस मुद्दे पर प्रीति नरौने के समर्थन में सामने आने की तैयारी कर रहे हैं।
यदि ऐसा होता है, तो यह विवाद व्यक्तिगत विरोध से आगे बढ़कर सामूहिक आंदोलन का रूप ले सकता है। इससे नगर निगम प्रशासन पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
अब तक इस पूरे मामले पर नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो यह विवाद और गंभीर हो सकता है और प्रशासन की कार्यशैली पर व्यापक सवाल खड़े हो सकते हैं।
निष्कर्ष
देवघर नगर निगम में जोनल और स्थायी समिति गठन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप लेता दिख रहा है। प्रीति नरौने के मुखर रुख ने न केवल इस मामले को नई दिशा दी है, बल्कि अन्य पार्षदों को भी आवाज उठाने का मंच प्रदान किया है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है और क्या यह मामला सामूहिक विरोध में बदलता है या समाधान की दिशा में आगे बढ़ता है।
Q1. विवाद किस मुद्दे को लेकर है?
A. जोनल और स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद है।
Q2. प्रीति नरौने ने क्या मांग की है?
A. उन्होंने पूरी प्रक्रिया को निरस्त कर नियमों के अनुसार पुनः गठन की मांग की है।
Q3. क्या अन्य पार्षद भी विरोध में शामिल होंगे?
A. सूत्रों के अनुसार, कई अन्य पार्षद भी समर्थन में सामने आ सकते हैं।
Q4. क्या मामला कोर्ट तक जा सकता है?
A. हाँ, प्रीति नरौने ने चेतावनी दी है कि सुधार नहीं होने पर वे न्यायालय जा सकती हैं।










