देवघर नगर निगम चुनाव: 172 बूथों पर भाजपा का फोकस, रितुराज सिन्हा की मौजूदगी में रीता चौरसिया के समर्थन में रणनीतिक बैठक

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देवघर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने राष्ट्रीय मंत्री रितुराज सिन्हा की मौजूदगी में 172 बूथों पर फोकस करते हुए रीता चौरसिया के समर्थन में रणनीतिक बैठक की। पांच सूत्री टास्क, संगठनात्मक एकजुटता और दलीय आधार के मुद्दे पर सियासी वार से चुनावी तापमान बढ़ा।

 

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देवघर नगर निगम चुनाव: 172 बूथों पर भाजपा का फोकस, रितुराज सिन्हा की मौजूदगी में रीता चौरसिया के समर्थन में रणनीतिक बैठक

पांच सूत्री टास्क से बूथ मैनेजमेंट को धार, दलीय आधार के मुद्दे पर सियासी वार; वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी से बढ़ा चुनावी तापमान

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मुख्य संवाददाता | देवघर | 11 फरवरी 2026

 

देवघर में भाजपा की रणनीतिक बैठक में राष्ट्रीय मंत्री रितुराज सिन्हा और रीता चौरसिया

देवघर नगर निगम चुनाव को लेकर आयोजित भाजपा की बैठक में 172 बूथों पर फोकस की रणनीति

 

देवघर नगर निगम चुनाव को लेकर भाजपा ने अपनी रणनीतिक तैयारियों को निर्णायक चरण में पहुंचा दिया है। बुधवार को ठाढ़ीदुलमपुर स्थित जिला कार्यालय में आयोजित अहम बैठक में राष्ट्रीय मंत्री रितुराज सिन्हा की मौजूदगी ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि पार्टी इस चुनाव को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। बैठक का केंद्र बिंदु भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी रीता चौरसिया के समर्थन में संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय और एकजुट करना रहा।

देवघर नगर निगम क्षेत्र के 172 बूथों को लक्ष्य बनाते हुए भाजपा ने माइक्रो-मैनेजमेंट की रणनीति अपनाने का संकेत दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर निकाय चुनाव में जहां स्थानीय मुद्दे और प्रत्याशी की छवि अहम होती है, वहीं मजबूत बूथ प्रबंधन परिणाम की दिशा तय कर सकता है।

 

172 बूथों पर फोकस: जीत की ‘माइक्रो’ रणनीति

बैठक को संबोधित करते हुए रितुराज सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि “देवघर नगर निगम क्षेत्र के 172 बूथ ही चुनाव की असली कुंजी हैं।” उन्होंने बूथ अध्यक्षों और वार्ड प्रभारियों से सीधे संवाद कर प्रत्येक बूथ को मजबूत करने का आह्वान किया।

उन्होंने मतदाता सूची की समीक्षा, समर्थक मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क, छूटे हुए मतदाताओं को जोड़ने और मतदान प्रतिशत बढ़ाने की ठोस योजना बनाने पर जोर दिया। यह रणनीति बताती है कि भाजपा केवल बड़े जनसमर्थन के दावों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि प्रत्येक बूथ पर संगठित तरीके से पकड़ मजबूत करना चाहती है।

राजनीतिक दृष्टि से यह संकेत भी महत्वपूर्ण है कि पार्टी स्थानीय चुनाव में भी विधानसभा या लोकसभा जैसी संरचित चुनावी रणनीति अपना रही है।

 

पांच सूत्री टास्क: चुनावी खाका और संगठनात्मक अनुशासन

रितुराज सिन्हा ने कार्यकर्ताओं को पांच सूत्री टास्क सौंपा, जिसे उन्होंने जीत का मंत्र बताया। इसमें शामिल हैं:

घर-घर संपर्क अभियान

प्रचार तंत्र को बूथ स्तर तक मजबूत करना

केंद्र व राज्य की योजनाओं का प्रभावी प्रचार

मतदान के दिन समर्थकों को बूथ तक लाने की समन्वित व्यवस्था

सोशल मीडिया के जरिए सकारात्मक माहौल बनाना और संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखना

उन्होंने 23 तारीख तक पूरी ऊर्जा के साथ चुनावी मैदान में डटे रहने का आह्वान किया। यह पांच सूत्री एजेंडा केवल प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनावी प्रबंधन और संगठनात्मक अनुशासन पर भी समान बल देता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि नगर निकाय चुनाव में मतदाता संख्या सीमित होती है, ऐसे में यदि बूथ स्तर पर 200-300 वोटों का अंतर भी बना, तो वह निर्णायक साबित हो सकता है। भाजपा की रणनीति इसी अंतर को अपने पक्ष में मोड़ने की है।

दलीय आधार पर चुनाव का मुद्दा: राजनीतिक विमर्श को मोड़ने की कोशिश?

बैठक में राज्य सरकार पर यह आरोप भी लगाया गया कि नगर निकाय चुनाव को दलीय आधार पर नहीं कराने के पीछे राजनीतिक आशंका है। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक पारदर्शिता का प्रश्न बताया।

हालांकि चुनाव दलीय आधार पर न होने के बावजूद भाजपा अपने समर्थित प्रत्याशी के समर्थन में पूरी संगठनात्मक ताकत झोंक रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार यह बयान चुनावी विमर्श को वैचारिक बनाम स्थानीय मुद्दों की दिशा में मोड़ने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।

इस बयान से यह स्पष्ट है कि भाजपा चुनावी मैदान में केवल विकास और स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि राजनीतिक धार भी बनाए रखना चाहती है।

 

संगठनात्मक एकजुटता पर सख्ती: अंदरूनी संदेश भी स्पष्ट

बैठक में गुटबाजी या लापरवाही को लेकर कड़ा संदेश दिया गया। रितुराज सिन्हा ने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिला अध्यक्ष सचिन रवानी ने भी कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता पार्टी की रीढ़ है और बूथ स्तर की सक्रियता से ही जीत सुनिश्चित होगी। यह बयान इस बात का संकेत देता है कि पार्टी नेतृत्व अंदरूनी समन्वय और अनुशासन को लेकर सतर्क है।

नगर निकाय चुनावों में स्थानीय समीकरण और व्यक्तिगत संबंध अक्सर निर्णायक होते हैं। ऐसे में संगठनात्मक एकता बनाए रखना किसी भी दल के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। भाजपा की यह बैठक उसी दिशा में संतुलन बनाने का प्रयास प्रतीत होती है।

 

वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी: शक्ति प्रदर्शन का संकेत

बैठक में चुनाव प्रभारी एवं पूर्व विधायक अनंत ओझा, पूर्व विधायक नारायण दास, मेयर प्रत्याशी रीता चौरसिया, मधुपुर नगर परिषद अध्यक्ष प्रत्याशी मिती कुमारी सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे।

इसके अलावा संतोष उपाध्याय, दिवाकर गुप्ता, नवल राय, पंकज सिंह भदोरिया, विशाखा सिंह, धनंजय तिवारी, रमेश राय, आशीष दुबे, सोनाधारी झा, जय मिश्रा, प्रज्ञा झा, विजया सिंह, चिंतामणि राउत, अलका सोनी, विनय चंद्रवंशी, अमृत मिश्रा, रंजीत कुमार, पवन पांडेय, गौरी शंकर शर्मा समेत सभी बूथ अध्यक्ष, वार्ड प्रभारी, मंडल अध्यक्ष और जिला पदाधिकारी मौजूद रहे। मंच संचालन संतोष उपाध्याय ने किया।

वरिष्ठ नेताओं की व्यापक उपस्थिति को राजनीतिक रूप से संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है। इससे कार्यकर्ताओं के बीच संदेश गया कि शीर्ष नेतृत्व सीधे तौर पर इस चुनाव पर नजर रखे हुए है।

 

रीता चौरसिया की उम्मीदवारी और स्थानीय समीकरण

मेयर प्रत्याशी रीता चौरसिया के लिए यह बैठक मनोबल बढ़ाने वाली मानी जा रही है। भाजपा ने उनके समर्थन में संगठन को जिस तरह से सक्रिय किया है, उससे यह स्पष्ट है कि पार्टी इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न मान रही है।

देवघर नगर निगम क्षेत्र में शहरी विकास, जल निकासी, सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण और बुनियादी सुविधाएं प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। ऐसे में चुनावी मुकाबला स्थानीय कार्यों और संगठनात्मक क्षमता के बीच संतुलन पर निर्भर करेगा।

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यदि भाजपा बूथ स्तर पर अपने समर्थकों को मतदान केंद्र तक लाने में सफल रही, तो इसका सीधा असर परिणाम पर पड़ सकता है।

 

आगे की चुनावी दिशा: बढ़ती सियासी सरगर्मी

देवघर नगर निगम चुनाव अब पूरी तरह से राजनीतिक केंद्र में आ चुका है। भाजपा की इस रणनीतिक बैठक ने यह संकेत दिया है कि पार्टी प्रचार के साथ-साथ माइक्रो-मैनेजमेंट और संगठनात्मक अनुशासन पर बराबर ध्यान दे रही है।

अब नजर इस बात पर होगी कि अन्य दल किस प्रकार की रणनीति अपनाते हैं और क्या वे भाजपा की बूथ-केंद्रित योजना का मुकाबला कर पाते हैं।

रितुराज सिन्हा की मौजूदगी में हुई यह बैठक केवल एक संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि चुनावी संदेश देने का मंच भी साबित हुई है। आने वाले दिनों में जनसंपर्क अभियान, वार्ड स्तरीय बैठकें और रोड शो चुनावी सरगर्मी को और तेज कर सकते हैं।

देवघर की सियासत में फिलहाल 172 बूथ ही चर्चा के केंद्र में हैं—और इन्हीं बूथों पर तय होगा कि नगर निगम की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।

 

प्रश्न 1: भाजपा की बैठक में मुख्य फोकस क्या रहा?

उत्तर: 172 बूथों पर मजबूत संगठनात्मक पकड़ बनाना और रीता चौरसिया के समर्थन में बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना।

प्रश्न 2: पांच सूत्री टास्क में क्या शामिल है?

उत्तर: घर-घर संपर्क, प्रचार तंत्र को मजबूत करना, योजनाओं का प्रचार, मतदान के दिन समर्थकों को बूथ तक लाना और सोशल मीडिया के जरिए सकारात्मक माहौल बनाना।

प्रश्न 3: बैठक में किन प्रमुख नेताओं की उपस्थिति रही?

उत्तर: रितुराज सिन्हा, अनंत ओझा, नारायण दास, सचिन रवानी, रीता चौरसिया सहित कई वरिष्ठ नेता और बूथ अध्यक्ष मौजूद रहे।

प्रश्न 4: क्या चुनाव दलीय आधार पर हो रहा है?

उत्तर: नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा, लेकिन भाजपा अपने समर्थित प्रत्याशी के समर्थन में संगठनात्मक रूप से सक्रिय है।

 

 

 

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Author: Baba Wani

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