जसीडीह में मलेरिया सुपरवाइजर राजीव रंजन की हार्ट अटैक से मौत, विभागीय प्रताड़ना और कार्य दबाव पर उठे सवाल

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जसीडीह में मलेरिया सुपरवाइजर राजीव रंजन की मौत: विभागीय प्रताड़ना और कार्य दबाव को बताया जिम्मेदार

 

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जसीडीह मलेरिया सुपरवाइजर राजीव रंजन की मौत, प्रताड़ना का आरोप

 

 

जसीडीह में मलेरिया सुपरवाइजर राजीव रंजन की हार्ट अटैक से मौत। कर्मचारी संघ ने विभागीय प्रताड़ना, कार्य दबाव और अनदेखी को बताया जिम्मेदार।

 

 

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जसीडीह में मलेरिया सुपरवाइजर राजीव रंजन की हार्ट अटैक से मौत, विभागीय प्रताड़ना और कार्य दबाव पर उठे सवाल

 

देवघर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जसीडीह में मलेरिया सुपरवाइजर के पद पर अनुबंध पर कार्यरत राजीव रंजन की अचानक हृदय गति रुकने से मौत हो गई। घटना के बाद जिले के स्वास्थ्य महकमे में शोक के साथ ही अनियमितताओं और विभागीय दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष मनोज कुमार मिश्रा ने खुलकर आरोप लगाया है कि विभागीय प्रताड़ना और दोहरी कार्य-ड्यूटी के दबाव ने राजीव रंजन की जान ले ली।

 

 

 

 

प्रशिक्षण के लिए रांची जाते समय बिगड़ी तबीयत

 

मनोज मिश्रा ने बताया कि 10 दिसंबर को एमटीएस हैसियत से आयोजित प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए राजीव रंजन रांची जा रहे थे।

यात्रा के दौरान अचानक तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उन्हें रास्ते से ही वापस लाकर देवघर सदर अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां चिकित्सकों ने हृदय गति रुक जाने (Cardiac Arrest) से मौत की पुष्टि की।

 

सदर अस्पताल के पदाधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने उनके पार्थिव शरीर पर श्रद्धांजलि अर्पित की और दो मिनट का मौन रखकर शोक संवेदना व्यक्त की। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया और बाद में जसीडीह के सिंहजोरी गांव में अंतिम संस्कार किया गया।

 

 

 

 

पहले से थे हृदय रोगी, हाल ही में कराए थे इलाज

 

सूत्रों के मुताबिक राजीव रंजन काफी दिनों से हृदय रोग से पीड़ित थे। कुछ समय पहले उनका ऑपरेशन भी हुआ था। मात्र पंद्रह दिन पहले ही वह भैलोर से इलाज करवाकर लौटे थे।

 

इन परिस्थितियों को देखते हुए उनके लिए लंबी यात्रा और लगातार दोहरी कार्य-ड्यूटी खतरनाक साबित हो सकती थी। बावजूद इसके उन्हें प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए बाध्य किया गया।

 

 

 

 

दो जगहों पर कार्य का दबाव, बीमारी के बावजूद नहीं दी गई राहत

 

जिला अध्यक्ष मनोज मिश्रा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा—

 

> “राजीव रंजन पर जसीडीह और देवीपुर दोनों जगह कार्य करने का दबाव था। बीमारी के आधार पर उन्होंने एक ही जगह जसीडीह में काम करने का अनुरोध किया था, लेकिन उनकी बात अनसुनी कर उन्हें देवीपुर भेजकर अनुपस्थित दिखाया गया, स्पष्टीकरण मांगा गया और मानदेय भी रोकने का प्रयास हुआ।”

 

 

 

उन्होंने बताया कि बीमारी के कागजात और भैलोर से प्राप्त मेडिकल रिपोर्ट देने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने उन पर कार्य दबाव बढ़ाते हुए मेडिकल फिटनेस जांच के नाम पर उनकी सेवा समाप्त करने की ‘साजिश’ रची।

 

 

 

 

सिविल सर्जन को दिया था आवेदन, जारी हुआ था आदेश

 

राजीव रंजन ने 17 नवंबर 2025 को सिविल सर्जन देवघर को एक पत्र लिखकर अपनी समस्याओं और स्वास्थ्य स्थिति से अवगत कराया था।

इसके आधार पर सिविल सर्जन ने पत्रांक 924, दिनांक 28.11.25 के जरिए आवश्यक कार्रवाई और निर्देश दिए थे।

 

इसके बावजूद उन्हें प्रशिक्षण के लिए भेजा गया, जबकि वे लगातार गंभीर बीमारी की बात कह रहे थे। मनोज मिश्र ने कहा—

 

> “जब विभाग के पास सभी दस्तावेज मौजूद थे, तो एक बीमार कर्मचारी को रांची के प्रशिक्षण में क्यों भेजा गया? यह सीधे-सीधे लापरवाही और प्रताड़ना का मामला है।”

 

 

 

 

 

 

कर्मचारी संघ ने मौत को ‘हत्या’ बताया

 

जिलाध्यक्ष मनोज मिश्र ने कड़े शब्दों में कहा—

 

> “यह मौत नहीं, विभागीय प्रताड़ना से हुई हत्या है। राजीव रंजन ईमानदार कर्मचारी थे। बीमारी के बावजूद परिवार के भविष्य और नौकरी जाने के डर से वे विरोध नहीं कर पाए और आदेशों का पालन करते हुए अपनी जान गंवा बैठे।”

 

 

 

 

 

 

कर्मचारी संघ की मांग – दोषियों पर कार्रवाई, पत्नी को नौकरी व मुआवजा

 

कर्मचारी संघ ने जिला प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—

 

1. प्रताड़ना के दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।

 

 

2. राजीव रंजन की मृत्यु से रिक्त हुए एमटीएस पद पर उनकी पत्नी को नियुक्ति दी जाए।

 

 

3. परिवार को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

 

 

 

संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

 

 

 

 

सदर अस्पताल में श्रद्धांजलि, स्वास्थ्यकर्मियों में शोक

 

राजीव रंजन के निधन के बाद सदर अस्पताल के चिकित्सकों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों ने गहरी संवेदना व्यक्त की। सभी ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि विभागीय दबाव से स्वास्थ्यकर्मियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बढ़ रहा है, जिसे प्रशासन को प्राथमिकता से देखना चाहिए।

 

 

 

 

निष्कर्ष

 

राजीव रंजन की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यसंस्कृति और अनुबंध कर्मियों के साथ होने वाले व्यवहार पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बीमारी के बावजूद दोहरी ड्यूटी, लगातार प्रताड़ना और प्रशासनिक लापरवाही जैसे आरोपों की जांच आवश्यक है, ताकि आगे ऐसी घटनाएं न हों।

 

 

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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