खान एवं खनिज संपदा विधेयक के विरोध में झामुमो का हल्लाबोल, सड़क पर उतरने की चेतावनी

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 देवघर | झारखंड | राजनीति

खान एवं खनिज संपदा विधेयक के विरोध में झामुमो, आंदोलन की चेतावनी

देवघर में झामुमो ने खान एवं खनिज संपदा विधेयक का विरोध किया। जिलाध्यक्ष संजय कुमार शर्मा ने झारखंड के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर आंदोलन और चक्का जाम की चेतावनी दी।

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खान एवं खनिज संपदा विधेयक के विरोध में देवघर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते झामुमो जिलाध्यक्ष संजय कुमार शर्मा

खान एवं खनिज संपदा विधेयक के विरोध में प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद झामुमो नेता।

संवाददाता : देवघर : 14 अगस्त 2026

लगभग 5 मिनट

खान एवं खनिज संपदा विधेयक के विरोध में झामुमो का हल्लाबोल, सड़क पर उतरने की चेतावनी

संजय शर्मा बोले- झारखंड के अधिकार और खनिज संपदा पर कब्जे की कोशिश बर्दाश्त नहीं, जरूरत पड़ी तो होगा चक्का जाम

देवघर। केंद्र सरकार के खान एवं खनिज संपदा विधेयक को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने विरोध का स्वर तेज कर दिया है। देवघर जिला झामुमो की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विधेयक को झारखंड के हितों के खिलाफ बताया गया। जिला अध्यक्ष संजय कुमार शर्मा ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा और उससे मिलने वाले राजस्व पर राज्य का अधिकार कमजोर करने की किसी भी कोशिश को पार्टी स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो झामुमो सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगा और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर चक्का जाम जैसे कार्यक्रम भी किए जा सकते हैं।

खनिज संपदा पर राज्य के अधिकार का मुद्दा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संजय कुमार शर्मा ने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज संपदा वाले राज्यों में शामिल है। राज्य की आर्थिक व्यवस्था और विकास में खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में खनिज संपदा और उससे जुड़े राजस्व के अधिकारों में किसी भी प्रकार का बदलाव राज्य के हितों और विकास योजनाओं को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिना पर्याप्त चर्चा के ऐसा विधेयक ला रही है, जिससे झारखंड सरकार के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। झामुमो जिलाध्यक्ष ने कहा कि राज्य की प्राकृतिक संपदा का उपयोग झारखंड की जनता के हित में होना चाहिए और इससे मिलने वाले राजस्व का लाभ भी राज्य के विकास तथा आम लोगों तक पहुंचना चाहिए।

जनकल्याणकारी योजनाओं पर असर की जताई आशंका

संजय शर्मा ने कहा कि खनिज राजस्व राज्य की आर्थिक गतिविधियों और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने मंईयां सम्मान योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना और अबुआ आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि राज्य के खनिज राजस्व से जुड़े अधिकारों को कमजोर किया जाता है तो इसका असर केवल सरकार और प्रशासन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है। इसलिए झामुमो इस मुद्दे को सीधे झारखंड की जनता के अधिकार और भविष्य से जुड़ा विषय मान रहा है।

केंद्र पर अधिकार कमजोर करने का आरोप

झामुमो जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार झारखंड सरकार के अधिकारों को सीमित करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड अलग राज्य के लिए यहां की जनता ने लंबा संघर्ष किया है। राज्य गठन के पीछे स्थानीय लोगों की आकांक्षाएं और संसाधनों पर अधिकार की भावना भी महत्वपूर्ण रही है।

संजय शर्मा ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इसलिए इस संपदा से जुड़े निर्णयों में राज्य के हितों और जनता की भागीदारी को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि झारखंड के अधिकारों को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

बकाया राशि का भुगतान नहीं होने का भी उठाया मुद्दा

प्रेस वार्ता के दौरान संजय शर्मा ने राज्य की बकाया राशि का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि एक ओर झारखंड की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है और दूसरी ओर खनिज संपदा से जुड़े अधिकारों में हस्तक्षेप की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे राज्य के हितों के साथ अन्याय बताया।

उन्होंने कहा कि झारखंड लंबे समय से अपनी खनिज संपदा के अनुरूप आर्थिक अधिकार और संसाधनों पर उचित हिस्सेदारी की मांग करता रहा है। ऐसे में राज्य के अधिकारों को और सीमित करने वाली किसी भी व्यवस्था का पार्टी राजनीतिक और जन आंदोलन के माध्यम से विरोध करेगी।

जरूरत पड़ी तो सड़क पर उतरेगा झामुमो

संजय शर्मा ने कहा कि झामुमो केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित रहकर विरोध नहीं करेगा। यदि विधेयक के कारण झारखंड के हित प्रभावित होते हैं तो पार्टी चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर पार्टी कार्यकर्ता सड़क पर उतरने के लिए तैयार हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर व्यापक आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और चक्का जाम जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं। हालांकि आंदोलन का स्वरूप और कार्यक्रम केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश के अनुसार तय किए जाने की बात उन्होंने कही।

राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की अपील

झामुमो जिलाध्यक्ष ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति झारखंड से परिचित हैं और राज्य की परिस्थितियों तथा यहां के लोगों की भावनाओं को समझती हैं। ऐसे में उन्हें झारखंड के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए पहल करनी चाहिए।

संजय शर्मा ने कहा कि झारखंड की जनता अपने प्राकृतिक संसाधनों और संवैधानिक अधिकारों को लेकर जागरूक है। राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए झामुमो हर स्तर पर संघर्ष करेगा। उन्होंने कहा कि यदि परिस्थितियां बनीं तो पार्टी बड़े आंदोलन से भी पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ने पर महासंग्राम किया जाएगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये नेता रहे मौजूद

प्रेस कॉन्फ्रेंस में झामुमो जिलाध्यक्ष संजय कुमार शर्मा के अलावा देवघर के महापौर रवि राउत, जिला सचिव दिनेश्वर किस्कू, केंद्रीय सदस्य परिमल सिंह उर्फ भूपेन सिंह, लड्डू नरौने, वरिष्ठ नेता सुरेश साह और नगर अध्यक्ष प्रदीप चौधरी सहित पार्टी के कई नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

झामुमो ने साफ किया कि खान एवं खनिज संपदा विधेयक को लेकर पार्टी झारखंड के अधिकारों से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। पार्टी ने इस मुद्दे को राज्य की खनिज संपदा, राजस्व और जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ते हुए आने वाले दिनों में आंदोलन तेज करने के संकेत दिए हैं। अब इस राजनीतिक विरोध का अगला कदम केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश और विधेयक को लेकर आगे होने वाली गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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