25 साल की आस्था और सेवा, 105 किमी की पदयात्रा के बाद बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक

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देवघर | श्रावणी मेला | धर्म-संस्कृति

मद्रास कांवड़ संघ की रजत जयंती यात्रा संपन्न, 85 शिवभक्तों ने किया बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक

मद्रास कांवड़ संघ की रजत जयंती कांवड़ यात्रा संपन्न हुई। 85 शिवभक्तों ने सुल्तानगंज से देवघर तक 105 किमी पदयात्रा कर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक किया।

मद्रास कांवड़ संघ की कांवड़ यात्रा

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मद्रास कांवड़ संघ की रजत जयंती कांवड़ यात्रा में शामिल शिवभक्त

रजत जयंती कांवड़ यात्रा के दौरान मद्रास कांवड़ संघ के शिवभक्त।

संवाददाता : देवघर : 11 अगस्त 2026

4 मिनट

25 साल की आस्था और सेवा, 105 किमी की पदयात्रा के बाद बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक

मद्रास कांवड़ संघ की रजत जयंती कांवड़ यात्रा संपन्न, 85 शिवभक्तों ने सुल्तानगंज से देवघर तक की पदयात्रा; मार्ग में हजारों कांवड़ियों की निःशुल्क सेवा

देवघर। बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच मद्रास कांवड़ संघ, चेन्नई की रजत जयंती कांवड़ यात्रा 2026 श्रद्धा, सेवा और शिवभक्ति के साथ संपन्न हुई। संघ के 85 शिवभक्तों ने सुल्तानगंज के गंगाधाम से पवित्र गंगाजल लेकर करीब 105 किलोमीटर की पदयात्रा की और 8 अगस्त को बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने बाबा वासुकीनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया।

इस वर्ष की यात्रा संघ के लिए विशेष रही, क्योंकि कांवड़ यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने पर रजत जयंती वर्ष मनाया गया। इस अवसर पर धार्मिक यात्रा के साथ सेवा कार्यों को भी विशेष प्राथमिकता दी गई। सुल्तानगंज से देवघर तक विभिन्न पड़ावों पर देशभर से आने वाले कांवड़ियों के लिए संघ की ओर से निःशुल्क सेवा शिविर लगाए गए।

105 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक

सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर निकले 85 शिवभक्तों ने कठिन पदयात्रा पूरी कर देवघर पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जल अर्पित किया। कई दिनों तक चली इस यात्रा में श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखते ही बना।

8 अगस्त को बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उन्होंने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद बाबा वासुकीनाथ धाम पहुंचकर दर्शन-पूजन किया और रजत जयंती वर्ष की यात्रा पूर्ण की।

खास बात: मद्रास कांवड़ संघ पिछले 25 वर्षों से कांवड़ यात्रा के साथ सेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

हजारों कांवड़ियों को मिली निःशुल्क सेवा

रजत जयंती वर्ष में संघ ने अपनी यात्रा को सेवा से भी जोड़ा। असरगंज, मनिया मोड़, जिलेबिया मोड़, अबरखा, गोड़ियारी और देवघर द्वार सहित विभिन्न पड़ावों पर कांवड़ियों के लिए सेवा शिविर संचालित किए गए।

इन शिविरों में भोजन प्रसादी, फल, नींबू शिकंजी, लाल शरबत, शीतल पेयजल, बाम और प्राथमिक चिकित्सा समेत कई सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं। संघ के स्वयंसेवक सुबह से देर रात तक सेवा कार्यों में जुटे रहे।

डाक बम कांवड़ियों के लिए विशेष व्यवस्था

यात्रा के अंतिम चरण में डाक बम कांवड़ियों के लिए विशेष सेवा की व्यवस्था की गई। फल, नींबू शिकंजी, लाल शरबत और बाम उपलब्ध कराए गए। तेज गति से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को इससे रास्ते में तत्काल राहत और आवश्यक सहयोग मिला।

भजन संध्या में देर रात तक झूमते रहे कांवड़िए
रजत जयंती यात्रा का प्रमुख आकर्षण प्रतिदिन आयोजित होने वाली भजन संध्या रही। राजस्थान के लक्ष्मणगढ़ के भजन गायक पवन शर्मा ‘निर्मल’ अपनी संगीत मंडली के साथ पूरी यात्रा में शामिल रहे।

असरगंज से अंतिम पड़ाव तक प्रत्येक शाम शिव भजनों की प्रस्तुति हुई। बड़ी संख्या में कांवड़िए भजन संध्या में शामिल हुए और देर रात तक भक्ति रस में झूमते रहे। हर पड़ाव पर बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण शिवमय बना रहा।

चेयरमैन बोले– केवल यात्रा पूरी करना उद्देश्य नहीं
मद्रास कांवड़ संघ के चेयरमैन ओम प्रकाश डागा ने कहा कि रजत जयंती वर्ष की यात्रा संघ के लिए गौरव और भावनात्मक अवसर रही। पिछले 25 वर्षों से बाबा बैद्यनाथ की कृपा से संघ कांवड़ यात्रा और सेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी उद्देश्य केवल यात्रा पूरी करना नहीं, बल्कि सुल्तानगंज से देवघर तक आने वाले अधिक से अधिक शिवभक्तों की सेवा करना था।

हर पड़ाव पर भोजन और विश्राम की व्यवस्था
संघ के अध्यक्ष संजय मूंदड़ा ने बताया कि यात्रा को सेवा-प्रधान और सुव्यवस्थित बनाने के लिए पहले से व्यापक तैयारियां की गई थीं। प्रत्येक पड़ाव पर भोजन, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी।

उन्होंने कहा कि संघ का संकल्प था कि यात्रा के दौरान कोई भी शिवभक्त सेवा से वंचित न रहे।

सदस्यों ने संभाली अलग-अलग जिम्मेदारियां

कोषाध्यक्ष राजेश भौतिका ने बताया कि पूरी यात्रा के दौरान संघ के सदस्यों ने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते हुए सेवा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा। भोजन, पेयजल, फल वितरण, शिकंजी और शरबत सहित सभी व्यवस्थाएं पूरी निष्ठा से संचालित की गईं।

संयोजिका मीना डागा ने कहा कि यात्रा में महिलाओं, वरिष्ठ श्रद्धालुओं और सभी कांवड़ियों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया। भजन संध्या और सेवा कार्यक्रमों ने यात्रा को आध्यात्मिक वातावरण प्रदान किया।

जलाभिषेक के साथ पूरी हुई रजत जयंती यात्रा

सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर की पदयात्रा पूरी करने के बाद 8 अगस्त को 85 शिवभक्तों ने बाबा बैद्यनाथ धाम में पवित्र गंगाजल से ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया। इसके बाद बाबा वासुकीनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया गया।

मद्रास कांवड़ संघ की यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ सेवा, समर्पण और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी दे गई। हजारों कांवड़ियों को निःशुल्क भोजन, फल, पेयजल, शिकंजी, शरबत और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराकर संघ ने अपनी 25 वर्षों की सेवा परंपरा को और मजबूत किया।

यात्रा के सफल समापन पर संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने भविष्य में भी सेवा और शिवभक्ति की इस परंपरा को जारी रखने का संकल्प लिया।

एक नजर में

25 वर्ष पूरे होने पर रजत जयंती वर्ष की यात्रा
85 शिवभक्तों ने की पदयात्रा

सुल्तानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर की यात्रा

8 अगस्त को बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक
बाबा वासुकीनाथ धाम में दर्शन-पूजन

विभिन्न पड़ावों पर हजारों कांवड़ियों की निःशुल्क सेवा
भोजन, फल, शिकंजी, शरबत, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था

प्रतिदिन भजन संध्या का आयोजन

सेवा परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प

 

प्रश्न: मद्रास कांवड़ संघ की कांवड़ यात्रा के कितने वर्ष पूरे हुए?
उत्तर: वर्ष 2026 में मद्रास कांवड़ संघ की कांवड़ यात्रा के 25 वर्ष पूरे हुए हैं।

प्रश्न: यात्रा में कितने शिवभक्त शामिल हुए?
उत्तर: रजत जयंती यात्रा में संघ के 85 शिवभक्त शामिल हुए।

प्रश्न: सुल्तानगंज से देवघर की दूरी कितनी तय की गई?
उत्तर: शिवभक्तों ने करीब 105 किलोमीटर की पदयात्रा की।

प्रश्न: बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कब किया गया?
उत्तर: 8 अगस्त को बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर पवित्र गंगाजल से ज्योतिर्लिंग का जलाभिषेक किया गया।

प्रश्न: कांवड़ियों के लिए कौन-कौन सी सेवाएं उपलब्ध कराई गईं?
उत्तर: भोजन प्रसादी, फल, नींबू शिकंजी, लाल शरबत, शीतल पेयजल, बाम और प्राथमिक चिकित्सा समेत कई सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई गईं।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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