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देवघर: पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने वरिष्ठ नर्स कुलसुम बीबी को दी अंतिम विदाई, जनाजे में उमड़ा जनसैलाब
देवघर के सारवां प्रखंड के डहुआ गांव में वरिष्ठ नर्स रहीं कुलसुम बीबी के निधन पर पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने जनाजे में कंधा देकर श्रद्धांजलि अर्पित की। वर्षों तक सारवां सीएचसी में स्वास्थ्य सेवा देने वाली कुलसुम बीबी को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई।
कुलसुम बीबी निधन
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पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने जनाजे में दिया कंधा, वरिष्ठ नर्स कुलसुम बीबी को नम आंखों से अंतिम विदाई
सारवां सीएचसी में वर्षों तक निभाई स्वास्थ्य सेवा की जिम्मेदारी, डहुआ गांव में उमड़ा जनसैलाब; पूर्व मंत्री बोले— सेवाभाव और समर्पण की मिसाल थीं कुलसुम बीबी
देवघर। सारवां प्रखंड के डहुआ गांव में मंगलवार को उस समय भावुक माहौल बन गया, जब सारवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की पूर्व वरिष्ठ नर्स एवं स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में लंबे समय तक अपनी निस्वार्थ सेवाएं देने वाली कल्याणी दास उर्फ कुलसुम बीबी (75) को अंतिम विदाई दी गई। उनके जनाजे में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए। झारखंड सरकार के पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख भी स्वयं डहुआ गांव पहुंचे और दिवंगत के जनाजे को कंधा देकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके इस मानवीय कदम की पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है।
डहुआ गांव में वरिष्ठ नर्स कुलसुम बीबी के जनाजे में शामिल होकर पार्थिव शरीर को कंधा देते पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख।
सोमवार देर रात पैतृक आवास पर हुआ निधन
जानकारी के अनुसार डहुआ गांव निवासी स्वर्गीय इस्लाम चौधरी की धर्मपत्नी एवं सारवां सीएचसी की सेवानिवृत्त वरिष्ठ नर्स कल्याणी दास उर्फ कुलसुम बीबी का सोमवार देर रात उनके पैतृक आवास पर निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके निधन की सूचना मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा।
स्वास्थ्य सेवा में समर्पण के लिए थीं प्रसिद्ध
कुलसुम बीबी ने अपने लंबे सेवाकाल में सारवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हजारों मरीजों की सेवा की। मरीजों और उनके परिजनों के बीच वे अपनी सरलता, मृदुभाषी स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठा के कारण विशेष पहचान रखती थीं। ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने कभी भी सेवा को केवल नौकरी नहीं माना, बल्कि मानवता की सेवा को अपना धर्म समझा।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई लोगों ने बताया कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया। यही कारण है कि उनके निधन की खबर से न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरे क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है।
पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि कुलसुम बीबी का संपूर्ण जीवन समाज और मानव सेवा को समर्पित रहा। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि ऐसे सेवाभावी व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा होते हैं। उनके कार्य आने वाली पीढ़ियों को भी समाज सेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे। पूर्व मंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना की।
जनाजे में उमड़ा जनसैलाब, नम हुईं हजारों आंखें
मंगलवार को निकले जनाजे में गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने नम आंखों से कुलसुम बीबी को विदाई दी। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने पूरे जीवन लोगों की सेवा की और यही कारण है कि उनकी अंतिम यात्रा में समाज के हर वर्ग की भागीदारी देखने को मिली।
जनाजे के बाद धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें स्थानीय कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
‘जनाजे को कंधा देना इंसानियत का सबसे बड़ा संदेश’
सोनारायठाढ़ी बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के अध्यक्ष नजाबुल अंसारी ने कहा कि किसी भी शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा होना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अंतिम यात्रा में शामिल होकर जनाजे को कंधा देना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इंसानियत, सामाजिक एकता और मानवीय संवेदनाओं का प्रतीक है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि समाज में ऐसे अवसरों पर जाति, धर्म और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शोकग्रस्त परिवारों का साथ देना चाहिए।
इन लोगों ने भी दी अंतिम विदाई
अंतिम यात्रा में पंचायत अध्यक्ष शाहबाज हुसैन सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, जनप्रतिनिधि एवं परिजन उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत के पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
परिजनों ने बताया कि कुलसुम बीबी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। वे हाजी इंतियाज चौधरी एवं मोहम्मद इस्तेहार चौधरी (डिस्को) की माता तथा अफताब अंसारी (गुड्डू) की दादी थीं। परिवार के प्रति उनका स्नेह और समाज के प्रति उनकी सेवा भावना हमेशा लोगों को याद रहेगी।
क्षेत्र ने खोया एक सेवाभावी व्यक्तित्व
ग्रामीणों का कहना है कि कुलसुम बीबी केवल एक स्वास्थ्यकर्मी नहीं थीं, बल्कि लोगों के सुख-दुःख में साथ खड़ी रहने वाली संवेदनशील महिला थीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में अनेक जरूरतमंद मरीजों की निस्वार्थ सहायता की। यही कारण है कि उनके निधन को लोग व्यक्तिगत क्षति के रूप में महसूस कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवा में उनके योगदान और समाज के प्रति समर्पण को आने वाले वर्षों तक सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
निष्कर्ष
सारवां सीएचसी की पूर्व वरिष्ठ नर्स कुलसुम बीबी का निधन केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय नुकसान माना जा रहा है। अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ और पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख सहित विभिन्न वर्गों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अपने जीवन में सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों की ऐसी मिसाल कायम की, जिसने उन्हें समाज में विशेष सम्मान दिलाया। उनका जीवन स्वास्थ्य सेवा और मानवता के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण बना रहेगा।
प्रश्न 1. कुलसुम बीबी कौन थीं?
उत्तर: कुलसुम बीबी सारवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में लंबे समय तक वरिष्ठ नर्स के रूप में कार्यरत रहीं और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में अपनी निस्वार्थ सेवाओं के लिए जानी जाती थीं।
प्रश्न 2. कुलसुम बीबी का निधन कब हुआ?
उत्तर: उनका निधन सोमवार देर रात उनके पैतृक आवास, डहुआ गांव में हुआ।
प्रश्न 3. अंतिम यात्रा में कौन-कौन शामिल हुए?
उत्तर: पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख, नजाबुल अंसारी, पंचायत अध्यक्ष शाहबाज हुसैन, सामाजिक कार्यकर्ता, ग्रामीण और बड़ी संख्या में परिजन अंतिम यात्रा में शामिल हुए।
प्रश्न 4. बादल पत्रलेख ने क्या कहा?
उत्तर: उन्होंने कहा कि कुलसुम बीबी का पूरा जीवन मानव सेवा और समर्पण का उदाहरण रहा तथा स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।
प्रश्न 5. कुलसुम बीबी को कहाँ सुपुर्द-ए-खाक किया गया?
उत्तर: जनाजे के बाद उन्हें डहुआ गांव के स्थानीय कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
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