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देवघर के वैद्यनाथ मंदिर प्रांगण में पंडा धर्मरक्षिणी सभा एवं परम्परागत समिति के संयुक्त तत्वावधान में धोती धारण एवं भस्मालंकरण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। प्रतियोगिता के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
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वैद्यनाथ मंदिर प्रांगण में सनातन संस्कृति का भव्य उत्सव, धोती धारण एवं भस्मालंकरण प्रतियोगिता ने श्रद्धालुओं को किया मंत्रमुग्ध
पंडा धर्मरक्षिणी सभा और परम्परागत समिति के संयुक्त आयोजन में युवाओं ने दिखाई भारतीय परंपरा के प्रति आस्था, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
Sunil Jha | Deoghar | 26 जून 2026

वैद्यनाथ मंदिर प्रांगण में आयोजित धोती धारण एवं भस्मालंकरण प्रतियोगिता में भाग लेते प्रतिभागी।
वैद्यनाथ मंदिर प्रांगण में आयोजित धोती धारण एवं भस्मालंकरण प्रतियोगिता में भाग लेते प्रतिभागी एवं विजेताओं को सम्मानित करते अतिथि
वैद्यनाथ धाम में संस्कृति और परंपरा का अनूठा संगम
विश्व प्रसिद्ध बाबा वैद्यनाथ मंदिर प्रांगण एक बार फिर सनातन संस्कृति, भारतीय परंपरा और धार्मिक आस्था का साक्षी बना। पंडा धर्मरक्षिणी सभा एवं परम्परागत समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित धोती धारण एवं भस्मालंकरण प्रतियोगिता ने श्रद्धालुओं, युवाओं और स्थानीय लोगों का विशेष आकर्षण प्राप्त किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता आयोजित करना नहीं था, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय वेश-भूषा, वैदिक परंपराओं और सनातन संस्कृति से जोड़ना भी था। बड़ी संख्या में युवाओं और श्रद्धालुओं ने प्रतियोगिता में उत्साहपूर्वक भाग लेकर भारतीय संस्कृति के प्रति अपने सम्मान और जुड़ाव का परिचय दिया।
सनातन संस्कृति के संरक्षण का दिया गया संदेश
आयोजकों ने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भारतीय संस्कृति, पारंपरिक पहनावे और धार्मिक संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। धोती धारण और भस्मालंकरण जैसी प्रतियोगिताएं केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने का माध्यम भी हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की पहचान उसकी विविध परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों में निहित है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व का अनुभव कराते हैं।
कई गणमान्य लोगों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में पंडा धर्मरक्षिणी सभा के महामंत्री निर्मल झा एवं उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खवाड़े की विशेष उपस्थिति रही। वहीं परम्परागत समिति की ओर से शेखर प्रीत झा, प्रो. दिलीप कुमार झा, कालीनाथ खवाड़े सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
आयोजन को सफल बनाने में परम्परागत समिति के अध्यक्ष डॉ. कौशिक मिश्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा तैयार करने से लेकर प्रतिभागियों के उत्साहवर्धन तक सक्रिय योगदान दिया।
निष्पक्ष मूल्यांकन के बाद घोषित हुए विजेता
कार्यक्रम का संचालन डॉ. नरेंद्र नाथ ठाकुर ने किया। प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में मार्कण्डेय जेजवाड़े, राजेश झा एवं हिमांशु झा ने प्रतिभागियों का निष्पक्ष मूल्यांकन किया।
कनीय वर्ग में श्रेयस सुमन ने प्रथम, आकाश कश्यप ने द्वितीय तथा अथर्व कश्यप ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं वरीय वर्ग में श्रील वत्स ने प्रथम, अभिनव पराशर ने द्वितीय तथा निपुण नन्दन झा ने तृतीय स्थान हासिल किया।
विजेताओं की घोषणा के साथ ही मंदिर प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और उपस्थित लोगों ने सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया।
कथक और एकल अभिनय ने मोहा दर्शकों का मन
प्रतियोगिता के साथ आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहे। आस्था कश्यप, स्नेहा कश्यप, अंशु आकांक्षा एवं आयुषी आनंद ने अपनी मनमोहक कथक प्रस्तुतियों से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
वहीं पार्थिवी मिश्रा ने अपने प्रभावशाली एकल अभिनय से दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा और तालियों की गूंज से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
युवाओं को भारतीय वेश-भूषा से जोड़ने की पहल
आयोजकों का मानना है कि भारतीय वेश-भूषा केवल पहनावा नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान है। धोती धारण प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को पारंपरिक वस्त्र पहनने की सही विधि और उसके सांस्कृतिक महत्व से भी अवगत कराया गया।
भस्मालंकरण प्रतियोगिता के माध्यम से भगवान शिव की उपासना परंपरा और उससे जुड़े आध्यात्मिक संदेश को भी सरल रूप में प्रस्तुत किया गया।
सभी प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के समापन पर विजेताओं के साथ-साथ सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि प्रतियोगिता में भाग लेने वाला प्रत्येक प्रतिभागी भारतीय संस्कृति के संरक्षण का वाहक है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन और अधिक व्यापक स्तर पर किए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और वैदिक मूल्यों से निरंतर जुड़ी रहे।
धार्मिक आयोजनों के साथ संस्कृति संरक्षण का अनूठा प्रयास
धार्मिक आयोजनों के माध्यम से संस्कृति संरक्षण की यह पहल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय रही। उपस्थित श्रद्धालुओं ने कहा कि इस तरह के आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को इसी प्रकार प्रोत्साहित किया जाए तो भारतीय परंपराओं का संरक्षण और अधिक प्रभावी ढंग से संभव हो सकेगा।
निष्कर्ष
वैद्यनाथ मंदिर प्रांगण में आयोजित धोती धारण एवं भस्मालंकरण प्रतियोगिता केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, भारतीय वेश-भूषा और धार्मिक मूल्यों के संरक्षण का सशक्त अभियान बनकर सामने आई। प्रतियोगिता, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रतिभागियों के उत्साह ने यह संदेश दिया कि आधुनिक दौर में भी भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों का जुड़ाव मजबूत है। आयोजकों की यह पहल निश्चित रूप से आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
Q1. प्रतियोगिता का आयोजन किसने किया?
उत्तर: पंडा धर्मरक्षिणी सभा एवं परम्परागत समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजन किया गया।
Q2. प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: सनातन संस्कृति, वैदिक परंपराओं और भारतीय वेश-भूषा के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति युवाओं को प्रेरित करना।
Q3. कनीय और वरीय वर्ग में प्रथम स्थान किसने प्राप्त किया?
उत्तर: कनीय वर्ग में श्रेयस सुमन तथा वरीय वर्ग में श्रील वत्स प्रथम स्थान पर रहे।
Q4. सांस्कृतिक कार्यक्रम में किन प्रस्तुतियों ने आकर्षित किया?
उत्तर: कथक नृत्य की प्रस्तुतियों के साथ पार्थिवी मिश्रा के एकल अभिनय ने दर्शकों का विशेष रूप से मन मोह लिया।










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