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देवघर के करौं प्रखंड में मनरेगा के कनिष्ठ अभियंता संतोष प्रसाद को एसीबी ने 5 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। टीसीबी कार्य के भुगतान से जुड़े मामले में हुई कार्रवाई से हड़कंप।
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करौं प्रखंड में एसीबी की बड़ी कार्रवाई: 5 हजार रुपये रिश्वत लेते मनरेगा के कनिष्ठ अभियंता गिरफ्तार
टीसीबी कार्य के भुगतान से जुड़े मामले में हुई कार्रवाई, शिकायत सत्यापन के बाद एसीबी ने बिछाया जाल
News Desk | देवघर | 10 जून 2026

टीसीबी कार्य के भुगतान से जुड़े मामले में एसीबी ने मनरेगा के कनिष्ठ अभियंता को रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
करौं प्रखंड में एसीबी द्वारा 5 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार मनरेगा कनिष्ठ अभियंता संतोष प्रसाद
देवघर जिले के करौं प्रखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने मनरेगा से जुड़े एक मामले में कनिष्ठ अभियंता (जेई) संतोष प्रसाद को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद प्रखंड कार्यालय और मनरेगा से जुड़े कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि मामला करौं प्रखंड की डिंडाकोली पंचायत में चल रहे टीसीबी (ट्रेंच कम बंड) कार्य से जुड़ा है। लाभुक द्वारा कार्य के भुगतान और संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत की गई थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरे मामले का सत्यापन कराया और आरोप सही पाए जाने के बाद विशेष टीम गठित कर कार्रवाई की।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार डिंडाकोली पंचायत में मनरेगा योजना के तहत टीसीबी कार्य कराया गया था। कार्य से जुड़े भुगतान और अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा कराने के लिए कथित रूप से लाभुक से रुपये की मांग की गई थी। लाभुक ने रिश्वत देने के बजाय मामले की शिकायत एसीबी से की।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी अधिकारियों ने पहले पूरे मामले का गुप्त सत्यापन कराया। सत्यापन में शिकायत को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद ट्रैप टीम का गठन किया गया। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए आरोपी कनिष्ठ अभियंता को रिश्वत की राशि लेते समय पकड़ लिया गया।
रंगे हाथ गिरफ्तारी से मचा हड़कंप
एसीबी की टीम ने जैसे ही आरोपी को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया, पूरे क्षेत्र में इस कार्रवाई की चर्चा शुरू हो गई। सरकारी कार्यालयों में भी इस घटना को लेकर दिनभर चर्चाओं का दौर चलता रहा।
जानकारों का मानना है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना में भ्रष्टाचार की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में एसीबी की कार्रवाई न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का काम करती है बल्कि आम लोगों में भी व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत करती है।
शिकायतकर्ता की सजगता बनी कार्रवाई का आधार
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शिकायतकर्ता की रही, जिसने रिश्वत की मांग को स्वीकार करने के बजाय संबंधित एजेंसी तक अपनी बात पहुंचाई। शिकायत के बाद एसीबी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे मामले की जांच की और कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी को गिरफ्तार किया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग भ्रष्टाचार की शिकायतों को सामने लाने का साहस दिखाएं तो ऐसी कार्रवाइयों के जरिए सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाई जा सकती है।
स्थानीय लोगों ने की कार्रवाई की सराहना
घटना के सामने आने के बाद क्षेत्र के कई लोगों ने एसीबी की कार्रवाई की सराहना की है। लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी इसके बदले अवैध राशि की मांग करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी स्पष्ट संदेश जाएगा कि भ्रष्टाचार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इन लोगों की रही अहम भूमिका
मामले को सामने लाने और कार्रवाई तक पहुंचाने में भीम राणा, जन्मांझाय राणा तथा भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष विश्वनाथ रावानी की भूमिका महत्वपूर्ण बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर शिकायत को मजबूती से उठाने और संबंधित पक्षों तक जानकारी पहुंचाने में इनकी सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है।
एसीबी ने शुरू की आगे की कानूनी प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम आरोपी कनिष्ठ अभियंता को अपने साथ लेकर गई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी। अधिकारियों द्वारा मामले से जुड़े दस्तावेजों तथा अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। संभावना जताई जा रही है कि जांच के दौरान मामले से संबंधित अन्य तथ्यों की भी पड़ताल की जाएगी।
भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां लगातार लोगों से अपील करती रही हैं कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी कार्य के बदले अवैध राशि की मांग करता है तो उसकी शिकायत तत्काल करें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाती है और तथ्यों के सत्यापन के बाद कानूनी कार्रवाई की जाती है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश
करों प्रखंड में हुई यह कार्रवाई केवल एक गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निगरानी तंत्र सक्रिय है। मनरेगा जैसी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास को बढ़ावा देना है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती है तो उस पर कार्रवाई होना आवश्यक माना जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि जागरूक नागरिक और सक्रिय जांच एजेंसियां मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़ सकती हैं।
Q1. किस अधिकारी को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया?
A. मनरेगा के कनिष्ठ अभियंता (जेई) संतोष प्रसाद को एसीबी ने गिरफ्तार किया।
Q2. रिश्वत की राशि कितनी थी?
A. एसीबी के अनुसार आरोपी को 5 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
Q3. मामला किस पंचायत से जुड़ा है?
A. यह मामला करों प्रखंड की डिंडाकुली पंचायत में संचालित टीसीबी कार्य से संबंधित बताया गया है।
Q4. कार्रवाई किस एजेंसी ने की?
A. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने शिकायत के सत्यापन के बाद ट्रैप कार्रवाई की।
Q5. आगे क्या होगा?
A. गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।










