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सारवां के गादी गांव निवासी इंदू देवी के निधन पर पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने गहरा शोक व्यक्त किया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। पढ़ें पूरी खबर।
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इंदू देवी के निधन से सारवां में शोक की लहर, पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, सुल्तानगंज में हुआ अंतिम संस्कार; परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंचे कई गणमान्य लोग
संवाददाता। देवघर/सारवां | 30 मई 2026
इंदू देवी के निधन पर शोक व्यक्त करते पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख एवं अंतिम यात्रा में शामिल लोग।
देवघर जिले के सारवां प्रखंड अंतर्गत गादी गांव में उस समय शोक का माहौल छा गया जब क्षेत्र की सम्मानित महिला इंदू देवी का निधन 62 वर्ष की आयु में हृदय गति रुक जाने के कारण हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही परिजनों, रिश्तेदारों, शुभचिंतकों और स्थानीय लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। इंदू देवी, सारवां बस पड़ाव निवासी हुरन रवानी की धर्मपत्नी थीं और अपने सरल स्वभाव, पारिवारिक मूल्यों तथा सामाजिक व्यवहार के कारण क्षेत्र में सम्मानित पहचान रखती थीं।
उनके निधन के बाद आयोजित अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान झारखंड सरकार के पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख की उपस्थिति विशेष चर्चा का विषय रही। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख ने परिजनों को दिया सांत्वना का संदेश
पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि किसी परिवार के लिए अपने प्रिय सदस्य को खोना अत्यंत दुखद क्षण होता है। उन्होंने कहा कि इंदू देवी ने अपने जीवन में परिवार और समाज के प्रति जो समर्पण दिखाया, वह हमेशा लोगों के लिए प्रेरणा का विषय रहेगा।
उन्होंने शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि इस कठिन समय में पूरा समाज उनके साथ खड़ा है। बादल पत्रलेख ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति दें।
उनकी संवेदनशील उपस्थिति ने परिवार के सदस्यों को भावनात्मक संबल प्रदान किया। अंतिम यात्रा के दौरान उन्होंने परिजनों और उपस्थित लोगों से मुलाकात कर अपना दुख साझा किया।

अंतिम यात्रा में शामिल हुए कई गणमान्य लोग
इंदू देवी की अंतिम यात्रा में सारवां पंचायत के पूर्व मुखिया रामकिशोर सिंह सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी ने दिवंगत के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके जीवन को याद किया।
ग्रामीणों ने बताया कि इंदू देवी हमेशा सामाजिक आयोजनों में सक्रिय रूप से भाग लेती थीं और लोगों के सुख-दुख में शामिल रहती थीं। यही कारण रहा कि उनके निधन की खबर सुनते ही आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
अंतिम यात्रा के दौरान वातावरण गमगीन रहा। परिजनों के साथ-साथ ग्रामीणों की आंखें भी नम थीं। लोगों ने उन्हें एक स्नेहमयी, मिलनसार और परिवार को जोड़कर रखने वाली महिला के रूप में याद किया।
सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा तट पर हुआ अंतिम संस्कार
परिवार की परंपरा और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार इंदू देवी का अंतिम संस्कार उत्तरवाहिनी गंगा तट, सुल्तानगंज में संपन्न कराया गया। उनके बड़े पुत्र जितेंद्र रवानी (टुनटुन रवानी) ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की।
अंतिम संस्कार के दौरान परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और शुभचिंतक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। धार्मिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के बीच दिवंगत को अंतिम विदाई दी गई।
सुल्तानगंज के पवित्र गंगा तट पर संपन्न हुए इस संस्कार में शामिल लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
भरा-पूरा परिवार छोड़ गईं इंदू देवी
इंदू देवी अपने पीछे एक बड़ा और स्नेहपूर्ण परिवार छोड़ गई हैं। परिवार में उनके तीन पुत्र—जितेंद्र रवानी, मुकेश रवानी और रूपेश रवानी हैं। इसके अलावा उनकी पांच पुत्रियां—देवी, गुड़िया देवी, रूबी देवी, यशोदा देवी और कुंती देवी हैं।
नाती-पोतों से भरे पूरे परिवार के बीच इंदू देवी का विशेष स्थान था। परिवार के सदस्य बताते हैं कि उन्होंने जीवनभर परिवार को एकजुट रखने का प्रयास किया और सभी के सुख-दुख में साथ खड़ी रहीं।
उनके निधन से परिवार को अपूरणीय क्षति हुई है। परिजनों का कहना है कि उनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी, लेकिन उनके संस्कार और जीवन मूल्य हमेशा परिवार का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
क्षेत्र में शोक, लोगों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
गांधी गांव, सारवां बस पड़ाव और आसपास के क्षेत्रों में इंदू देवी के निधन को लेकर गहरा शोक देखा गया। स्थानीय लोगों ने कहा कि वे एक ऐसी महिला थीं जिन्होंने अपने व्यवहार और सादगी से सभी का दिल जीता था।
कई लोगों ने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से शोक संदेश भेजकर परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। ग्रामीणों ने कहा कि इंदू देवी का जीवन परिवार, समाज और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक था।
निष्कर्ष
इंदू देवी का निधन केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक भावनात्मक क्षति है। उनके जीवन की सादगी, परिवार के प्रति समर्पण और समाज के साथ आत्मीय जुड़ाव उन्हें हमेशा लोगों की स्मृतियों में जीवित रखेगा। अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ और लोगों की श्रद्धांजलि इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अपने जीवन में अनेक लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया था।
प्रश्न 1: इंदू देवी का निधन कब और किस कारण हुआ?
उत्तर: इंदू देवी का निधन 62 वर्ष की आयु में हृदय गति रुक जाने के कारण हुआ।
प्रश्न 2: इंदू देवी किस क्षेत्र की निवासी थीं?
उत्तर: वह सारवां बस पड़ाव स्थित गांधी गांव की निवासी थीं।
प्रश्न 3: उनके निधन पर कौन-कौन श्रद्धांजलि देने पहुंचे?
उत्तर: पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख, पूर्व मुखिया रामकिशोर सिंह सहित कई गणमान्य लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
प्रश्न 4: अंतिम संस्कार कहां किया गया?
उत्तर: उनका अंतिम संस्कार उत्तरवाहिनी गंगा तट, सुल्तानगंज में किया गया।
प्रश्न 5: परिवार में कौन-कौन हैं?
उत्तर: उनके तीन पुत्र, पांच पुत्रियां तथा नाती-पोतों से भरा पूरा परिवार है।









