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देवघर नगर निगम में जोनल, स्थायी समिति और जिला योजना समिति गठन को लेकर विवाद गहराया। वार्ड 30 के बाद वार्ड 23 के पार्षद ने भी अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की।
देवघर नगर निगम विवाद, जोनल समिति गठन, शैलेश चरण मिश्रा पत्र, गोपी कुमार गुप्ता, जिला योजना समिति, झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011
देवघर नगर निगम में समिति गठन पर बड़ा विवाद, दूसरे पार्षद ने भी खोला मोर्चा
वार्ड 30 के बाद वार्ड 23 के पार्षद ने नगर आयुक्त को लिखा पत्र, जोनल और जिला योजना समिति गठन में अनियमितता के आरोप
संवाददाता | देवघर | 29 अप्रैल 2026

देवघर नगर निगम के वार्ड नंबर 23 के पार्षद शैलेश चरण मिश्रा
देवघर नगर निगम में समिति गठन को लेकर बढ़ता विवाद
देवघर नगर निगम में जोनल (क्षेत्रीय) समिति, स्थायी समिति और जिला योजना समिति के गठन को लेकर विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पहले वार्ड संख्या 30 के पार्षद गोपी कुमार गुप्ता द्वारा इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे, और अब वार्ड संख्या 23 के पार्षद शैलेश चरण मिश्रा ने भी नगर आयुक्त को पत्र लिखकर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। लगातार दो पार्षदों द्वारा उठाए गए सवालों ने निगम प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
जोनल समिति गठन में नियमों की अनदेखी का आरोप
शैलेश चरण मिश्रा ने अपने पत्र में बताया है कि निगम प्रशासन द्वारा जारी पत्रांक-602, दिनांक 18 अप्रैल 2026 के आधार पर जोनल समितियों का गठन किया गया। लेकिन इस प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए वार्डों का गलत तरीके से विभाजन किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड संख्या 6 को जोन संख्या 2 में शामिल किया गया, जबकि भौगोलिक दृष्टि से यह वार्ड उस जोन के अन्य वार्डों से जुड़ा नहीं है। इसी तरह वार्ड संख्या 26, 27, 28, 29 और 30 को एक ही जोन में शामिल कर दिया गया, जबकि इन वार्डों की सीमाएं आपस में सटी हुई नहीं हैं।
पार्षद का कहना है कि नियमावली के अनुसार किसी भी जोन में शामिल सभी वार्डों की भौगोलिक सीमाएं एक-दूसरे से जुड़ी होनी चाहिए, ताकि प्रशासनिक कार्यों में सुविधा हो सके। लेकिन यहां इस मूल नियम की अनदेखी की गई है।
भौगोलिक स्थिति को नजरअंदाज करने का दावा
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई वार्डों के बीच प्राकृतिक बाधाएं मौजूद हैं, जिन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। उदाहरण के तौर पर वार्ड संख्या 7, 8, 9 और 10 के बीच डढ़वा नदी स्थित है, जिससे इन वार्डों के बीच सीधा संपर्क नहीं है।
इसके बावजूद इन वार्डों को एक ही जोन में शामिल करना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि इससे प्रशासनिक कार्यों में भी कठिनाई उत्पन्न हो सकती है। पार्षद ने इसे गंभीर लापरवाही बताया है।
बैठक प्रक्रिया और अध्यक्ष चयन पर भी सवाल
24 अप्रैल 2026 को आयोजित बैठक को लेकर भी कई सवाल उठाए गए हैं। पार्षद के अनुसार इस बैठक में कई वार्ड पार्षद अनुपस्थित थे, लेकिन इसके बावजूद समिति गठन और अध्यक्ष चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।
उन्होंने इसे झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 के प्रावधानों का उल्लंघन बताया है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि बैठक के दौरान सभी पार्षदों के हस्ताक्षर नहीं लिए गए, जिससे निर्णय की वैधता संदिग्ध हो जाती है।
जिला योजना समिति गठन भी विवादों में
जिला योजना समिति के गठन को लेकर भी पार्षद ने गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार पहले जोनल समितियों का विधिवत गठन होना चाहिए, उसके बाद ही जिला योजना समिति के सदस्यों का चयन किया जाना चाहिए।
लेकिन यहां एक ही बैठक में दोनों प्रक्रियाओं को पूरा कर दिया गया, जो नियमों के विपरीत है। इससे पूरे गठन की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं।

वीडियो रिकॉर्डिंग से जांच की मांग
पार्षद शैलेश चरण मिश्रा ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, जिसमें पूरी प्रक्रिया देखी जा सकती है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस रिकॉर्डिंग की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।
न्यायालय जाने की चेतावनी
मामले को गंभीर बताते हुए पार्षद ने स्पष्ट कहा है कि यदि विभागीय नियमों का पालन नहीं किया गया तो वे न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस पूरे मामले की प्रतिलिपि उपायुक्त, प्रमंडलीय आयुक्त, नगर विकास विभाग, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी गई है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
लगातार दो पार्षदों द्वारा उठाए गए इस मुद्दे ने देवघर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला केवल समिति गठन तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों के पालन से भी जुड़ा हुआ है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निगम प्रशासन इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाती है या नहीं।
निष्कर्ष
देवघर नगर निगम में समिति गठन को लेकर उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो इससे न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, बल्कि भविष्य में इस तरह की प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और नियमबद्ध बनाने में भी मदद मिलेगी।
Q1. विवाद किस बात को लेकर है?
A. जोनल, स्थायी और जिला योजना समिति के गठन में अनियमितताओं के आरोप को लेकर विवाद है।
Q2. किस पार्षद ने पत्र लिखा है?
A. वार्ड 23 के पार्षद शैलेश चरण मिश्रा ने नगर आयुक्त को पत्र लिखा है। इससे पहले वार्ड 30 के पार्षद गोपी कुमार गुप्ता ने भी सवाल उठाए थे।
Q3. मुख्य आरोप क्या हैं?
A. वार्डों के गलत जोन में शामिल करने, बैठक प्रक्रिया में अनियमितता और नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं।
Q4. आगे क्या हो सकता है?
A. यदि जांच नहीं होती है तो मामला न्यायालय तक जा सकता है।









