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सारवां में मानवता की मिसाल: बीडीओ-सीओ ने गंभीर बीमार मासूम साजन के इलाज के लिए जुटाए ₹55 हजार, सरकारी दफ्तर बना उम्मीद का घर
देवघर के सारवां प्रखंड कार्यालय में मानवता की अनूठी मिसाल देखने को मिली। गंभीर बीमारी से जूझ रहे आठ वर्षीय साजन कुमार के इलाज के लिए बीडीओ, सीओ, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर 55 हजार रुपये से अधिक की सहायता जुटाई।
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जब सरकारी कुर्सी से पहले जागी इंसानियत: सारवां प्रखंड कार्यालय में बीडीओ-सीओ ने मासूम साजन के लिए जुटाए ₹55 हजार
पेट में ट्यूमर से जिंदगी की जंग लड़ रहे आठ वर्षीय बच्चे को देखकर भर आई अधिकारियों की आंखें, दस्तावेज बनवाने आए परिवार को मिला उम्मीद का नया सहारा
सुनील झा : देवघर : 24 जुलाई 2026
सरकारी कार्यालयों की पहचान अक्सर फाइलों, नियमों और लंबी प्रक्रियाओं से होती है। आम लोगों के मन में यह धारणा बनी रहती है कि सरकारी दफ्तरों में काम कराने के लिए धैर्य और इंतजार दोनों की जरूरत पड़ती है। लेकिन देवघर जिले के सारवां प्रखंड कार्यालय में शुक्रवार को जो दृश्य देखने को मिला, उसने इन धारणाओं को मानो बदलकर रख दिया। यहां एक बीमार बच्चे की पीड़ा ने न केवल अधिकारियों और कर्मचारियों की आंखें नम कर दीं, बल्कि पूरे कार्यालय को मानवता की मिसाल में बदल दिया।
गंभीर बीमारी से जूझ रहे आठ वर्षीय साजन कुमार के इलाज के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), अंचलाधिकारी (सीओ), कार्यालय कर्मियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने कुछ ही समय में 55 हजार रुपये से अधिक की सहायता राशि एकत्र कर उसके परिवार को सौंप दी। इतना ही नहीं, इलाज में किसी तरह की प्रशासनिक बाधा न आए, इसके लिए उसी दिन राशन कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई।

सारवां प्रखंड कार्यालय में गंभीर रूप से बीमार साजन कुमार के परिवार को आर्थिक सहयोग सौंपते बीडीओ, सीओ एवं अन्य अधिकारी।
मड़वाठाढ़ी गांव का मासूम, जो दर्द से लड़ते हुए पहुंचा प्रखंड कार्यालय
सारवां प्रखंड की बैजुकुरा पंचायत के मड़वाठाढ़ी गांव निवासी सुरेंद्र दास का आठ वर्षीय पुत्र साजन कुमार गंभीर बीमारी से जूझ रहा है। परिजनों के अनुसार उसके पेट में ट्यूमर है, जो अब कैंसर का रूप ले चुका है। उसके पेट में इलाज के लिए दो ट्यूब लगी हुई हैं और वह लगातार असहनीय पीड़ा सहते हुए जिंदगी की लड़ाई लड़ रहा है।
सुरेंद्र दास पेशे से राजमिस्त्री हैं। दिहाड़ी मजदूरी कर वह किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। परिवार में चार बच्चे हैं और साजन सबसे छोटा है। मां गृहिणी हैं। सीमित आय और बढ़ते इलाज के खर्च ने पूरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया है।
परिजनों ने देवघर के कई निजी अस्पतालों और एम्स में इलाज कराया, लेकिन चिकित्सकों ने बेहतर उपचार के लिए रांची या जमशेदपुर के उच्च चिकित्सा संस्थान ले जाने की सलाह दी। ऐसे में इलाज से पहले जरूरी सरकारी दस्तावेज बनवाना भी परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे थे, मिला इंसानियत का सहारा
शुक्रवार को सुरेंद्र दास अपनी पत्नी और बीमार बेटे साजन को लेकर सारवां प्रखंड कार्यालय पहुंचे थे। उनका उद्देश्य आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराना था, ताकि इलाज में कुछ आर्थिक राहत मिल सके।
दर्द से कराहते हुए साजन किसी तरह अपने पेट में लगी दोनों ट्यूबों को संभालते हुए कार्यालय परिसर तक पहुंचा। उसे देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं। उसकी मासूम आंखों में दर्द भी था और उम्मीद भी।
एक दुकानदार की संवेदनशीलता ने बदल दी पूरी कहानी
कार्यालय परिसर स्थित फोटोस्टेट दुकान के संचालक विक्रम राय ने जब साजन की स्थिति देखी तो वे खुद को रोक नहीं सके। उन्होंने तुरंत पूरे मामले की जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी रजनीश कुमार को दी।
मामले की गंभीरता समझते हुए बीडीओ ने तत्काल अंचलाधिकारी राजेश कुमार शाह से चर्चा की। दोनों अधिकारियों ने बिना समय गंवाए कार्यालय के कर्मचारियों, पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों से सहयोग की अपील की।
कुछ ही देर में कार्यालय का माहौल बदल चुका था। जहां कुछ देर पहले फाइलों पर काम हो रहा था, वहीं अब हर कोई मासूम साजन की जिंदगी बचाने के लिए आगे बढ़ रहा था।
कुछ ही घंटों में जुट गए 55 हजार रुपये से अधिक
सहयोग की अपील का असर ऐसा हुआ कि देखते ही देखते 55 हजार रुपये से अधिक की राशि एकत्र हो गई। यह राशि साजन के पिता सुरेंद्र दास को इलाज के लिए सौंप दी गई।
सहयोग राशि मिलते ही पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह केवल आर्थिक सहायता नहीं थी, बल्कि उस परिवार के लिए यह विश्वास था कि समाज आज भी उनके साथ खड़ा है।
जब अधिकारियों की आंखें भी हो गईं नम
राशि सौंपने के दौरान मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो उठा। साजन की हालत देखकर बीडीओ रजनीश कुमार की आंखें भी नम हो गईं। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि प्रशासन की ओर से जो भी संभव सहायता होगी, वह उपलब्ध कराई जाएगी।
सीओ राजेश कुमार शाह ने कहा कि जैसे ही उन्हें मामले की जानकारी मिली, सभी ने मानवता के नाते मदद का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा,
“ईश्वर किसी भी परिवार को ऐसी पीड़ा न दे। प्रशासनिक स्तर पर जो भी संभव सहायता होगी, वह हम उपलब्ध कराएंगे।”
सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, उसी दिन पूरा कराया राशन कार्ड का काम
इस घटना का सबसे संवेदनशील पहलू यह रहा कि अधिकारियों ने केवल आर्थिक सहायता देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी।
बीडीओ रजनीश कुमार ने तत्काल प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और संबंधित जनवितरण प्रणाली के डीलर मृत्युंजय प्रसाद सिंह को कार्यालय बुलाया। उन्होंने अपने सामने ही पीड़ित परिवार के राशन कार्ड की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कराई, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ जल्द से जल्द मिल सके।
पूरी प्रक्रिया के दौरान बीडीओ अपनी कुर्सी छोड़कर स्वयं परिवार के साथ खड़े रहे और हर औपचारिकता पूरी कराई।
कार्यालय कर्मियों और जनप्रतिनिधियों ने भी निभाई अहम भूमिका
इस मानवीय पहल में प्रखंड कृषि पदाधिकारी विजय कुमार देव सहित कई कार्यालय कर्मियों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने आर्थिक सहयोग दिया।
सभी ने एक स्वर में साजन के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए कहा कि संकट की घड़ी में समाज का हर सक्षम व्यक्ति आगे आए, तभी जरूरतमंदों का जीवन बचाया जा सकता है।
सरकारी कार्यालय की बदली तस्वीर
सरकारी कार्यालयों को लेकर लोगों के मन में अक्सर नकारात्मक धारणाएं बनी रहती हैं, लेकिन सारवां प्रखंड कार्यालय की यह पहल बताती है कि संवेदनशील प्रशासन केवल नियमों से नहीं चलता, बल्कि करुणा, सेवा और मानवीय संवेदनाओं से भी संचालित होता है।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि सरकारी पद केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशीलता निभाने का भी माध्यम है।
- सारवां प्रखंड कार्यालय में मानवता की अनूठी मिसाल।
- पेट में ट्यूमर से पीड़ित आठ वर्षीय साजन कुमार के इलाज के लिए जुटे अधिकारी।
- बीडीओ, सीओ, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर ₹55 हजार से अधिक की सहायता दी।
- उसी दिन राशन कार्ड की ऑनलाइन प्रक्रिया भी पूरी कराई गई।
- पीड़ित परिवार को हरसंभव प्रशासनिक सहयोग का भरोसा।
निष्कर्ष
समाज में अक्सर यह कहा जाता है कि संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं, लेकिन सारवां प्रखंड कार्यालय की यह घटना इस धारणा को गलत साबित करती है। एक मासूम बच्चे की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझकर अधिकारियों और कर्मचारियों ने जिस तरह मदद का हाथ बढ़ाया, वह केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि मानवता का जीवंत उदाहरण है। उम्मीद की जानी चाहिए कि साजन जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटेगा और यह प्रेरक घटना समाज में सेवा, सहयोग और संवेदना की नई मिसाल बनेगी।
प्रश्न 1. साजन कुमार किस बीमारी से पीड़ित है?
उत्तर: परिजनों के अनुसार साजन कुमार के पेट में ट्यूमर है, जो कैंसर का रूप ले चुका है।
प्रश्न 2. साजन का परिवार किस गांव का रहने वाला है?
उत्तर: बैजुकुरा पंचायत के मड़वाठाढ़ी गांव, सारवां प्रखंड का।
प्रश्न 3. कितनी सहायता राशि जुटाई गई?
उत्तर: बीडीओ, सीओ, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के सहयोग से 55 हजार रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई।
प्रश्न 4. आर्थिक सहायता के अलावा प्रशासन ने क्या मदद की?
उत्तर: राशन कार्ड की ऑनलाइन प्रक्रिया तत्काल पूरी कराई गई और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की पहल की गई।
प्रश्न 5. इस अभियान में किन अधिकारियों की प्रमुख भूमिका रही?
उत्तर: बीडीओ रजनीश कुमार, सीओ राजेश कुमार शाह तथा प्रखंड के अन्य पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रमुख भूमिका निभाई।












