
दो अर्थियों से गमगीन हुआ नकटी गांव: सास–बहू का डेढ़ घंटे के अंतराल में निधन | पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख पहुंचे जियाखाड़ा घाट
Author: Sunil Jha, Deoghar
📝 दो अर्थियों से गमगीन हुआ नकटी गांव: सास–बहू का डेढ़ घंटे में निधन
📝 देवघर के नकटी गांव में सास–बहू का सिर्फ डेढ़ घंटे के अंतराल में निधन। पूरे गांव में शोक की लहर। पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख ने जताया शोक।
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दो अर्थियों से गमगीन हुआ गांव: सास–बहू का डेढ़ घंटे के अंतराल में निधन, पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख पहुंचे शोक जताने
देवघर जिले के सोनारायठाढ़ी प्रखंड स्थित ब्रह्मोतरा पंचायत के नकटी गांव में बुधवार की रात ऐसी दर्दनाक घटना घटी, जिसने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया। एक ही परिवार में महज डेढ़ घंटे के अंतराल में सास और बहू दोनों का निधन हो गया। देर रात तक गांव में सिर्फ चीख-पुकार, मातम और अविश्वास का माहौल बना रहा। दशकों बाद गांव में पहली बार ऐसा दृश्य देखने को मिला जब एक ही घर से दो अर्थियां एक साथ निकलीं।

पहले 85 वर्षीय मुंद्रिका देवी का निधन, फिर सदमे से बहू उषा देवी ने तोड़ा दम
प्राप्त जानकारी के अनुसार नकटी गांव की 85 वर्षीय मुंद्रिका देवी बुधवार रात लगभग 7 बजे जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच गईं। वे उम्रजनित बीमारियों से जूझ रही थीं। निधन की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम फैल गया।
सास के निधन की खबर सुनते ही बहू उषा देवी (54 वर्ष) भावनात्मक रूप से टूट गईं। परिजन बताते हैं कि उषा देवी अपनी सास से अत्यधिक जुड़ी थीं और उनके बिना खुद को असहाय महसूस करने लगीं। शोक और तनाव के बीच अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई और बताया जाता है कि उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ। रात 8:30 बजे उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया।
महज 90 मिनट में दो मौतों ने पूरे गांव को हिला दिया।

गांव में पहली बार एक साथ उठीं दो अर्थियां
गुरुवार सुबह नकटी गांव में ऐसा दृश्य था, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। रोते-बिलखते परिजन दो अर्थियों को एक साथ उठाकर घर से बाहर लाए। ग्रामीण बताते हैं कि अंतिम यात्रा के दौरान पूरा गांव शोक में खड़ा था।
अजय नदी के जियाखाड़ा श्मशान घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार एक ही समय, लेकिन अलग-अलग चिताओं पर किया गया। चिताओं से उठती लपटों और धुएं को देखते हुए कई लोग अपने आंसू रोक नहीं पाए। एक ही परिवार से दो अर्थियों का एक साथ उठना गांववासियों के लिए बेहद भावुक और दर्दनाक क्षण था।
पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख पहुंचे शोक संवेदना व्यक्त करने
घटना की जानकारी मिलते ही राज्य के पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख रात में ही जियाखाड़ा घाट पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और कहा—
> “यह घटना अत्यंत हृदय विदारक है। एक ही परिवार में दो मौतें किसी को भी भीतर तक तोड़ सकती हैं। मैं परिवार के साथ खड़ा हूं। भगवान दोनों आत्माओं को शांति दें।”
पूर्व मंत्री के पहुंचने से परिवार को मानसिक सहारा जरूर मिला, लेकिन दो मौतों की पीड़ा हर किसी की आंखों में साफ दिख रही थी।
पीछे छूट गया भरा-पूरा परिवार
मुंद्रिका देवी अपने पुत्र अनुराग कुमार सिंह और जयचंद सिंह सहित विस्तृत परिवार को छोड़ गईं।
वहीं उषा देवी अपने पीछे
पुत्र — देवासिश सिंह, वैभव कुमार सिंह
पुत्रियां — रिंकी कुमारी, सोनल कुमारी
नाती-पोते
और बड़ा संयुक्त परिवार छोड़ गईं।
परिजनों का कहना है कि उषा देवी मिलनसार, सौम्य और परिवार को एकजुट रखने वाली महिला थीं। उनका सास से संबंध बेहद गहरा था, और सास के निधन का सदमा वे सह नहीं सकीं।

गांव में शोक और अविश्वास का माहौल
नकटी गांव के लोगों का कहना है कि दोनों महिलाएं गांव में सम्मानित थीं और हर सुख-दुख में लोगों के साथ खड़ी रहती थीं। महिलाओं ने बताया कि सास-बहू का आपसी स्नेह गांव में मिसाल माना जाता था।
एक बुजुर्ग ने कहा—
> “पहले मां जी के निधन की खबर आई, फिर थोड़ी देर बाद बहू की मौत की सूचना ने सबको तोड़ दिया। ऐसी घटना गांव में पहली बार देखी।”
देर रात तक ग्रामीण पीड़ित परिवार को सांत्वना देते रहे, लेकिन घर में पसरा मातम शब्दों से कहीं गहरा था।
पारिवारिक संबंधों का दुर्लभ उदाहरण
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि पारिवारिक प्रेम और भावनात्मक बंधन की गहराई का उदाहरण बनकर सामने आई।
उषा देवी ने जीवन भर अपनी सास का साथ निभाया और जब वे विदा हुईं, तो उस सदमे को झेल नहीं सकीं।
गांव की महिलाओं ने बताया कि अक्सर दोनों साथ बैठकर घंटों बातें करती थीं और घर-परिवार की हर जिम्मेदारी एक साथ निभाती थीं। दोनों की विदाई ने पूरे परिवार को जैसे भीतर से खाली कर दिया।

भावुक कर देने वाला अंतिम दृश्य
अंतिम संस्कार के दौरान सैकड़ों लोग उपस्थित थे। दोनों की चिताओं को एक साथ जलते देख लोगों ने कहा कि यह दृश्य जीवन में पहली बार देखा है। गांव के लोगों में इस घटना को लेकर भारी संवेदना और दर्द है।
परिजन बताते हैं कि वे अभी भी इस सदमे से बाहर नहीं आ पाए हैं। घर में मातम गहरा है और हर कोने में दोनों की यादें ही शेष हैं।
पारिवारिक रिश्तों की गहराई शब्दों से परे
नकटी गांव की यह घटना यह साबित करती है कि
भावनात्मक संबंध कभी-कभी इतने गहरे होते हैं कि बिछड़ने का सदमा इंसान सहन ही नहीं कर पाता।
आज पूरा इलाका इस घटना को चर्चा में रखे हुए है और इसे एक दर्दनाक, असाधारण और हृदयस्पर्शी घटना के रूप में याद कर रहा है।
Q1. नकटी गांव में सास–बहू की मौत कब हुई?
दोनों का निधन बुधवार की रात, लगभग डेढ़ घंटे के अंतराल में हुआ।
Q2. उषा देवी की मृत्यु कैसे हुई?
सास के निधन का सदमा सहन न कर पाने के कारण अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और ब्रेन हेमरेज की वजह से उनका निधन हो गया।
Q3. अंतिम संस्कार कहां किया गया?
अजय नदी स्थित जियाखाड़ा श्मशान घाट पर दोनों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया।
Q4. क्या कोई जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे?
जी हां, पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने पहुंचकर परिवार को सांत्वना दी।
Q5. परिवार में कौन-कौन सदस्य शेष रह गए हैं?
दोनों महिलाओं के बच्चे, बहुएं-बेटियां, नाती-पोते और पूरा संयुक्त परिवार शोक में है।











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