बेहतर व गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान पर देवघर पुलिस की कार्यशाला, एसपी सौरभ ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश

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बेहतर व गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान पर देवघर पुलिस की कार्यशाला, एसपी सौरभ ने दिए महत्वपूर्ण निर्देश

 

 

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देवघर पुलिस में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को लेकर कार्यशाला, एसपी सौरभ ने दिए अहम निर्देश

 

 

देवघर में एसपी सौरभ के नेतृत्व में अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर कार्यशाला आयोजित। पुलिस अधिकारियों को फोटोग्राफी, साक्ष्य संकलन और कांड दैनिकी पर प्रशिक्षण दिया गया।

 

 

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देवघर में बेहतर और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को लेकर पुलिस कार्यशाला का आयोजन

 

देवघर, मंगलवार। जिला पुलिस द्वारा अनुसंधान की गुणवत्ता को और अधिक मजबूत व पेशेवर बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को स्थानीय पुलिस केंद्र में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का नेतृत्व देवघर एसपी सौरभ ने किया। कार्यक्रम में जिले के सभी महत्वपूर्ण पुलिस पदाधिकारी, अभियोजन पदाधिकारी और कांड व अनुसंधान प्रक्रिया से जुड़े कर्मी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जिले में होने वाली हर आपराधिक घटना का अनुसंधान समयबद्ध, तार्किक, वैज्ञानिक और साक्ष्यों पर आधारित हो। एसपी सौरभ ने कहा कि आधुनिक समय में तकनीक और कानूनी प्रावधानों की समझ के बिना गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान संभव नहीं है, इसलिए सभी पुलिस पदाधिकारियों का प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है।

 

 

 

 

फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी, साक्ष्य संकलन और कांड दैनिकी पर विशेष प्रशिक्षण

 

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचने के बाद अपनाई जाने वाली मानक प्रक्रियाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। विशेषज्ञों ने निम्न चरणों पर विशेष रूप से चर्चा की—

 

1. घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी

 

अपराध की जांच में घटनास्थल की तस्वीरें और वीडियो सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों में गिने जाते हैं। कार्यशाला के दौरान बताया गया कि—

 

घटनास्थल के प्रवेश द्वार से लेकर अंतिम बिंदु तक पूरी रिकॉर्डिंग अनिवार्य है।

 

मृतक, हथियार, खून के धब्बे, फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट, संघर्ष के निशान जैसे तत्वों की क्लोज-अप और वाइड-एंगल फोटोग्राफी वैज्ञानिक अनुसंधान में बेहद महत्वपूर्ण होती है।

 

वीडियो रिकॉर्डिंग में घटनास्थल की वास्तविक स्थिति, वस्तुओं की स्थिति तथा समय-स्थान का विवरण स्पष्ट होना चाहिए।

 

 

2. साक्ष्य एकत्रित करने की वैज्ञानिक पद्धति

 

साक्ष्यों के संग्रह में किसी भी प्रकार की त्रुटि केस को कमजोर कर सकती है। इसलिए प्रशिक्षण में पुलिस अधिकारियों को बताया गया—

 

ग्लव्स, सील्ड बैग, स्वैब, सैंपल बॉटल जैसी सामग्री का अनिवार्य उपयोग करें।

 

जैविक, भौतिक और डिजिटल—तीनों प्रकार के साक्ष्यों को सुरक्षित, सील्ड और चेन ऑफ कस्टडी के साथ भेजें।

 

घटनास्थल पर अनावश्यक भीड़ और हस्तक्षेप रोकना पुलिस की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

 

 

3. कांड दैनिकी (Case Diary) का सही अभिलेखन

 

कानूनी प्रक्रिया में केस डायरी सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जाता है। विशेषज्ञों ने कहा कि—

 

हर दिन की कार्रवाई क्रमवार और स्पष्ट लिखी जानी चाहिए।

 

केस डायरी में तथ्यपूर्ण और बिना त्रुटि के रिकॉर्डिंग करने से न्यायालय में केस मजबूत होता है।

 

गलत, अपूर्ण या जल्दबाजी में लिखी गई दैनिकी से केस कमजोर पड़ता है और अभियुक्तों को लाभ मिल जाता है।

 

 

 

 

 

अपर लोक अभियोजक व एएलएपीपी द्वारा कानूनी प्रावधानों पर मार्गदर्शन

 

कार्यशाला में उपस्थित अपर लोक अभियोजक (APP) और सहायक लोक अभियोजक (ALAP) ने पुलिस अधिकारियों को अदालत की आवश्यकताओं, साक्ष्यों की स्वीकार्यता, FIR से लेकर चार्जशीट तक की कानूनी प्रक्रिया और अनुसंधान में की जाने वाली आम गलतियों पर विस्तृत जानकारी दी।

 

उन्होंने जोर देकर कहा कि—

 

सभी अनुसंधानकर्ता पुलिस अधिकारी धारा-वार समझ विकसित करें।

 

जांच रिपोर्ट, मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत प्रतिवेदन और चार्जशीट में तथ्यों का संकलन अत्यंत व्यवस्थित होना चाहिए।

 

अदालत में अनुसंधानकर्ता की गवाही केस को निर्णायक मोड़ दे सकती है, इसलिए उन्हें मजबूत तैयारी करनी चाहिए।

 

 

 

 

 

एसपी सौरभ ने अधिकारियों को दिए सख्त व स्पष्ट निर्देश

 

एसपी सौरभ ने कार्यशाला के दौरान अनुसंधान की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर बल दिया। उन्होंने कहा—

 

अनुसंधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

हर थाना क्षेत्र में बनने वाली अनुसंधान टीम को तकनीकी व कानूनी रूप से सक्षम होना चाहिए।

 

लंबित मामलों की समीक्षा नियमित हो तथा समयबद्ध तरीके से केस की प्रगति दर्ज हो।

 

केस में अनावश्यक देरी अपराधियों को लाभ और पीड़ित को नुकसान पहुंचाती है, इसलिए अनुसंधान को पारदर्शी व परिणाममुखी बनाया जाए।

 

 

एसपी ने यह भी निर्देश दिया कि सभी थाना प्रभारी अपने अधीनस्थ पुलिस बल को इस प्रशिक्षण के आधार पर लगातार मार्गदर्शन देते रहें ताकि संपूर्ण जिला पुलिस की कार्यशैली में सकारात्मक सुधार दिखाई दे।

 

 

 

 

कार्यशाला में बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी व जवान शामिल

 

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के सभी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक (DSP), पुलिस निरीक्षक, थाना प्रभारी, विभिन्न थानों से चयनित पुलिस पदाधिकारी व आरक्षी बड़ी संख्या में शामिल हुए। उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की कार्यशालाएं पुलिसिंग को आधुनिक बनाने में बेहद मददगार होती हैं।

 

 

 

 

परिणामस्वरूप अपराध नियंत्रण और न्यायिक प्रक्रिया में आएगा सुधार

 

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षणों से—

 

अपराध अनुसंधान अधिक सटीक होगा,

 

दोषियों को सजा दिलाने की संभावना बढ़ेगी,

 

और न्यायिक प्रक्रिया सुचारु एवं पारदर्शी बनेगी।

 

 

देवघर पुलिस द्वारा उठाया गया यह कदम जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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