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झारखंड में 14 दिसंबर तक भाजपा मंडल अध्यक्षों की घोषणा
झारखंड में सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं के बीच भाजपा 14 दिसंबर तक सभी मंडल अध्यक्षों की घोषणा करेगी। देवघर में बंद कमरे की बैठक में sealed list सौंपी गई।
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Jharkhand BJP Mandal President List
✦ लेखक – सुनील झा
स्थान – देवघर
राज्य में सत्ता परिवर्तन के अटकलों के बीच भाजपा 14 दिसंबर तक करेगी मंडल अध्यक्षों की घोषणा, प्रभारियों को सौंपा गया सीलबंद लिफाफा
झारखंड की राजनीतिक फिज़ाओं में इन दिनों सत्ता परिवर्तन को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी तथा गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के दिल्ली दौरे और वापसी के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं ने नया मोड़ ले लिया है। ठीक इसी माहौल के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने संगठन को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा आगामी 14 दिसंबर तक सभी मंडल अध्यक्षों की घोषणा करने जा रही है। इसके लिए संबंधित जिला प्रभारियों को प्रदेश अध्यक्ष की उपस्थिति में सीलबंद लिफाफे सौंपे गए हैं, जिनमें मंडल अध्यक्षों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
जेपी नड्डा के देवघर दौरे के बाद संगठनात्मक गतिविधियों में आई तेजी
6 दिसंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा देवघर पहुंचे, जहाँ उन्होंने भाजपा के नवनिर्मित जिला कार्यालय का उद्घाटन किया और बूथ सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को संगठन को मजबूत करने की विशेष सलाह दी।
नड्डा के इस दौरे को न सिर्फ संथाल बल्कि पूरे झारखंड में भाजपा की संगठनात्मक रणनीति को धार देने वाला माना जा रहा है।
उनकी मौजूदगी में संगठनात्मक सक्रियता तेज हुई है और उसी क्रम में अब मंडल अध्यक्षों की सूची को अंतिम रूप दिया गया है।
देवघर भाजपा कार्यालय के बंद सभा कक्ष में हुई अहम बैठक
जेपी नड्डा के कार्यक्रम के समाप्त होने के बाद देवघर के ठाढ़ीदुलमपुर स्थित भाजपा जिला कार्यालय के बंद सभा कक्ष में प्रदेश स्तरीय महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, कार्यकारी अध्यक्ष आदित्य साहू, संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह, पूर्व विधायक अनंत ओझा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक में जिला प्रभारी, सह प्रभारी और संगठन से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति में मंडल अध्यक्षों की सूची से भरा सीलबंद लिफाफा सौंपा गया।
यह लिफाफा केवल संबंधित जिला बैठक में खोला जाएगा और On-the-Spot मंडल अध्यक्षों के नामों की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
14 दिसंबर तक घोषणा पूरी करने का निर्देश
सूत्रों की मानें तो भाजपा नेतृत्व ने सभी जिला प्रभारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि:
निर्धारित तिथि पर जिले में बैठक आयोजित की जाए
संबंधित लिफाफे को वहां खोला जाए
उसी समय मंडल अध्यक्षों के नाम घोषित किए जाएं
14 दिसंबर तक राज्य के सभी मंडल अध्यक्षों की लिस्ट सार्वजनिक कर दी जाए
इस प्रक्रिया को गोपनीयता के दायरे में अत्यंत अनुशासित तरीके से पूरा किया जा रहा है ताकि किसी तरह की लॉबीइंग, दबाव या अनुचित प्रभाव को रोका जा सके।
अध्यक्ष बनने की दौड़ में इच्छुक अभ्यर्थियों की सक्रियता तेज
मंडल अध्यक्ष पद पाने की चाहत रखने वाले कार्यकर्ता अपनी सक्रियता कई गुना बढ़ा चुके हैं।
कई इच्छुक अभ्यर्थी पार्टी नेताओं से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
वे नेताओं से मिलकर:
आवभगत
पार्टी कार्यक्रमों में भागीदारी
बूथ स्तर की गतिविधियों
तथा संगठन के अन्य कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
भाजपा सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवारों की सक्रियता में भारी वृद्धि देखी जा रही है, लेकिन स्पष्ट कर दिया गया है कि निर्णय पूरी तरह संगठन के तय मानकों व कार्यकर्ताओं की सक्रियता के आधार पर होगा, न कि सिफारिशों पर।
दिसंबर अंत या फरवरी मध्य तक राज्य व राष्ट्रीय संगठन में बड़े बदलाव की संभावना
सूत्र बताते हैं कि मंडल अध्यक्षों की घोषणा के बाद भाजपा:
जिला अध्यक्ष
प्रदेश अध्यक्ष
राष्ट्रीय कार्यकारिणी
में भी बदलाव या नए दायित्वों की घोषणा करने की तैयारी में है।
संभावना जताई जा रही है कि
दिसंबर के अंत तक या फरवरी के मध्य तक भाजपा अपने संगठनात्मक ढांचे में बड़े फेरबदल कर सकती है।
पार्टी शीर्ष नेतृत्व और RSS इस कवायद को बेहद गंभीरता से देख रहा है ताकि 2024–2025 की राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले चुनावों की तैयारी मजबूत की जा सके।
सत्ता परिवर्तन की अटकलों को मिला बल, जनवरी–फरवरी महत्वपूर्ण
राज्य के अंदर चल रहे संभावित सत्ता परिवर्तन की चर्चाओं को भाजपा सूत्रों ने और हवा दी है।
सूत्रों के अनुसार, जनवरी के मध्य या फरवरी के अंत तक राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
हालांकि झामुमो नेतृत्व ने इन अटकलों को “बेतुका” बताते हुए खारिज कर दिया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा बेहद जोर पकड़ रही है कि:
ईडी की जांच
कानूनी पेच
दिल्ली दौरे
गठबंधन में आंतरिक खींचतान
जैसे कई कारण किसी भी समय राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
राजनीति को ‘संभावनाओं का खेल’ कहते हुए एक भाजपा नेता ने कहा कि छलनी में भी पानी ठहर जाए, लेकिन राजनीति में स्थिरता ठहरना मुश्किल होता है।
यहां कोई भी कभी भी अर्श से फर्श और विपक्ष से सत्ता तक पहुंच सकता है।
भाजपा के नए कार्यालय में नेताओं की हाई-प्रोफाइल उपस्थिति
देवघर के नए भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक बेहद गोपनीय और महत्वपूर्ण रही।
इसमें निम्न प्रमुख नेता उपस्थित रहे:
बाबूलाल मरांडी – प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष
आदित्य साहू – कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष
कर्मवीर सिंह – प्रदेश संगठन महामंत्री
अनंत ओझा, अमर कुमार बाउरी सहित अन्य प्रमुख संगठन नेता
बैठक में संगठन के सुदृढ़ीकरण से लेकर आगामी रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।
मंडल अध्यक्ष का महत्व – भाजपा की रीढ़
भाजपा के संगठन में मंडल सबसे महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती है।
मंडल अध्यक्ष वह पदाधिकारी होता है जो:
बूथ से लेकर जिला स्तर तक कार्यकर्ताओं की टीम को खड़ा करता है
सदस्यता अभियान को मजबूत करता है
बूथ प्रबंधन
चुनाव संचालन
कार्यक्रमों की रूपरेखा
जनसंपर्क अभियान
जैसे कार्यों को संचालित करता है।
इसीलिए इस पद को पार्टी संगठन की रीढ़ कहा जाता है।
अब जबकि राज्य की राजनीति गरमाई हुई है, भाजपा इस पद को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती है।
राज्य में राजनीतिक संकट? – आने वाले हफ्ते होंगे निर्णायक
भाजपा सूत्र तो यहां तक कहते हैं कि राज्य में जनवरी–फरवरी का महीना राजनीतिक रूप से तूफानी हो सकता है।
कई नेतृत्वात्मक बदलाव
जांच एजेंसियों की कार्रवाई
गठबंधन के भीतर असंतोष
जैसे कारक झारखंड की राजनीति को पूरी तरह उलट-पुलट करने में सक्षम हैं।
भले ही सत्ताधारी पक्ष इन चर्चाओं से इनकार कर रहा हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि:
> “राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता।
जिस तरह की गतिविधियाँ पिछले दो महीनों में दिखी हैं, उससे झारखंड में कुछ बड़ा घटित होने का संकेत मिलता है।”
निष्कर्ष: 14 दिसंबर तक पूरी होगी भाजपा की पहली और महत्वपूर्ण चरण की कवायद
भाजपा की संगठनात्मक रणनीति अब पूरी तरह फील्ड में उतार दी गई है।
14 दिसंबर तक मंडल अध्यक्षों की घोषणा से भाजपा:
अपने ग्रासरूट स्तर को मजबूत करेगी
चुनावी तैयारी को अंतिम रूप देगी
पार्टी के ढांचे को नए जोश से भर देगी
और राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में मजबूत विकल्प बनकर उभरने की कोशिश करेगी।
राज्य के राजनीतिक भविष्य पर हर किसी की नजर है।
फिलहाल यह तय है कि भाजपा की यह पहल झारखंड की राजनीति में आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है।










