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हूल दिवस 2026: देवघर में वीर शहीदों को श्रद्धांजलि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा का संकल्प
हूल दिवस पर देवघर में सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने हूल आंदोलन को स्वाभिमान, जल-जंगल-जमीन और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बताते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया।
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हूल दिवस पर वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा का दोहराया संकल्प
सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो के बलिदान को नेताओं ने किया नमन, कहा— हूल आंदोलन आज भी अन्याय के खिलाफ संघर्ष की सबसे बड़ी प्रेरणा
सुनील झा | देवघर | 30 जून 2026

देवघर में हूल दिवस के अवसर पर संथाल हूल के अमर सेनानियों सिदो मुर्मु, कान्हू मुर्मु, चांद मुर्मु, भैरव मुर्मु तथा वीरांगनाओं फूलो मुर्मु और झानो मुर्मु को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनके बलिदान को नमन करते हुए कहा कि वर्ष 1855 का हूल आंदोलन केवल अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह नहीं था, बल्कि जल, जंगल, जमीन, संस्कृति, अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए लड़ी गई ऐतिहासिक जनक्रांति थी।
वक्ताओं ने कहा कि हूल दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को न्याय, समानता, लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक एकता के प्रति जागरूक करने का भी महत्वपूर्ण दिन है। सभी ने अमर शहीदों के बताए मार्ग पर चलने और समाज में समरसता, समानता तथा राष्ट्र निर्माण के लिए कार्य करने का संकल्प दोहराया।
हूल आंदोलन ने बदल दी थी इतिहास की दिशा
वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1855 में संथाल परगना की धरती से शुरू हुआ हूल आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली बड़ी जनक्रांतियों में गिना जाता है। सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय देते हुए यह साबित किया कि अन्याय और शोषण के विरुद्ध संगठित संघर्ष इतिहास बदल सकता है।
उन्होंने कहा कि आज भी हूल आंदोलन सामाजिक न्याय, आत्मसम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।
ध्रुव प्रसाद साह बोले— झारखंड की पहचान है हूल आंदोलन
आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव एवं वैश्य स्वाभिमान संघ, झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष ध्रुव प्रसाद साह ने कहा कि हूल आंदोलन झारखंड की अस्मिता और गौरव का प्रतीक है। सिदो-कान्हू और फूलो-झानो ने अपने बलिदान से यह संदेश दिया कि अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए किसी भी अन्याय के सामने झुकना नहीं चाहिए। उन्होंने समाज से एकजुट होकर विकास और सामाजिक न्याय के लिए कार्य करने की अपील की।

नेताओं ने बताया राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का प्रतीक
भाजपा नेता महेश प्रसाद राय ने कहा कि हूल आंदोलन ने पूरे देश में स्वतंत्रता की चेतना जगाई और आने वाली पीढ़ियों को साहस तथा राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।

झामुमो नेता परिमल सिंह ने कहा कि सिदो-कान्हू का संघर्ष किसी एक समाज तक सीमित नहीं था, बल्कि सभी शोषित और वंचित लोगों की आवाज था।

डिप्टी मेयर टिप चटर्जी ने कहा कि हूल दिवस लोकतांत्रिक अधिकारों और सामाजिक न्याय की रक्षा का संदेश देने वाला ऐतिहासिक अवसर है।

भाजपा नेत्री रीता चौरसिया ने वीरांगनाओं फूलो-झानो को महिलाओं के साहस और नेतृत्व की मिसाल बताते हुए कहा कि उनका जीवन आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

बीस सूत्री जिला उपाध्यक्ष मुनम संजय ने कहा कि संगठित समाज किसी भी अन्याय का मजबूती से मुकाबला कर सकता है।
देवघर में हूल दिवस पर सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो को श्रद्धांजलि अर्पित करते जनप्रतिनिधि।
हूल दिवस पर देवघर में अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता एवं जनप्रतिनिधि।
पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कही बड़ी बात
पूर्व कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि हूल आंदोलन झारखंड की आत्मा से जुड़ा जनआंदोलन था। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए दिया गया यह बलिदान सदियों तक याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि शहीदों के सपनों का झारखंड बनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
लोकतंत्र और सामाजिक समानता का संदेश
कांग्रेस नेता दिनेश मंडल ने कहा कि हूल दिवस लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव सजग रहने की प्रेरणा देता है।
प्रो. उदय प्रकाश ने कहा कि हूल आंदोलन भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है। इसे विद्यालयों और महाविद्यालयों में अधिक व्यापक रूप से पढ़ाया जाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके।

झारखंड की पहचान का आधार है सिदो-कान्हू का संघर्ष
वार्ड पार्षद सह झामुमो महानगर अध्यक्ष प्रदीप चौधरी ने कहा कि सिदो-कान्हू का संघर्ष झारखंड की पहचान का आधार है।

भाजपा जिला अध्यक्ष सचिन रवानी ने कहा कि वीर शहीदों का बलिदान राष्ट्रभक्ति और आत्मगौरव का सर्वोच्च उदाहरण है।
भाजपा नगर अध्यक्ष सोनाधारी झा ने कहा कि हूल दिवस हमें अपनी संस्कृति और इतिहास पर गर्व करना सिखाता है।

पूर्व विधायकों ने किया शहीदों को नमन
पूर्व विधायक नारायण दास ने कहा कि हूल आंदोलन ने अंग्रेजी शासन की नींव हिला दी थी और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की मजबूत आधारशिला रखी।

पूर्व विधायक रणधीर सिंह ने कहा कि सिदो-कान्हू सहित सभी अमर शहीदों के आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के अक्षय स्रोत हैं।

जनप्रतिनिधियों ने दोहराया सामाजिक समरसता का संदेश
भाजपा नेता एवं दंत चिकित्सक डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि हूल आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की पहली बड़ी जनक्रांतियों में शामिल था।

देवघर नगर निगम के मेयर रवि कुमार राउत ने कहा कि हूल दिवस झारखंड की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है और शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को समाजहित में कार्य करने की प्रेरणा देता रहेगा।
भाजपा नेता राकेश नरौने ने कहा कि हूल आंदोलन अपने अधिकारों और अस्मिता की रक्षा का ऐतिहासिक अभियान था।
भाजपा नेत्री विजया सिंह ने कहा कि फूलो-झानो का साहस महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
भाजपा नेता पंकज सिंह भदौरिया ने कहा कि सिदो-कान्हू का संघर्ष आज भी समाज को अन्याय के विरुद्ध एकजुट होने की प्रेरणा देता है।
भाजपा जिला महामंत्री सुनीता सिंह ने कहा कि हूल आंदोलन झारखंड के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है और इसके गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
समाज को मिला एकजुट रहने का संदेश
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि हूल आंदोलन केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आज भी न्याय, समानता, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा का जीवंत संदेश है। सभी ने शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए सामाजिक समरसता को मजबूत करने, झारखंड की गौरवशाली विरासत को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी तक उसके इतिहास को पहुंचाने का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
हूल दिवस केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं, बल्कि उन मूल्यों को आत्मसात करने का दिन है जिनके लिए सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज भी उनका संघर्ष समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, अधिकारों की रक्षा करने और एकता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
Q1. हूल दिवस क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: वर्ष 1855 के संथाल हूल आंदोलन के अमर शहीदों सिदो-कान्हू, चांद-भैरव तथा फूलो-झानो के बलिदान को याद करने के लिए।
Q2. हूल आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
उत्तर: अंग्रेजी शासन, शोषण और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए जल, जंगल, जमीन और स्वाभिमान की रक्षा करना।
Q3. देवघर में हूल दिवस पर क्या हुआ?
उत्तर: विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
Q4. नेताओं ने हूल आंदोलन को किस रूप में बताया?
उत्तर: उन्होंने इसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण जनक्रांति तथा सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों की रक्षा की प्रेरणा बताया।










