देवघर नगर निगम का बड़ा एक्शन: सात होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की होगी दोबारा जांच

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देवघर नगर निगम ने सात होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। होल्डिंग टैक्स और ट्रेड लाइसेंस अभिलेखों में विसंगतियां मिलने पर पुनर्मूल्यांकन का निर्णय लिया गया।

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देवघर नगर निगम का बड़ा एक्शन: सात होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की होगी दोबारा जांच

होल्डिंग टैक्स और ट्रेड लाइसेंस अभिलेखों में मिली विसंगतियां, नगर आयुक्त के निर्देश पर पुनर्मूल्यांकन का फैसला

संवाददाता | देवघर | 24 जून 2026

देवघर नगर निगम की टीम द्वारा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण

नगर निगम की जांच में सात प्रतिष्ठानों के अभिलेखों की होगी दोबारा समीक्षा।

देवघर नगर निगम ने शहर की राजस्व व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नगर आयुक्त सुलोचना मीणा के निर्देश पर नगर निगम क्षेत्र के सात प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान कई मामलों में निगम अभिलेखों और वास्तविक उपयोग की स्थिति में अंतर मिलने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों का पुनर्मूल्यांकन करने का निर्णय लिया गया है।

नगर निगम प्रशासन की इस कार्रवाई को राजस्व संग्रहण प्रणाली को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक उपयोग और अभिलेखों में दर्ज जानकारी के आधार पर कर निर्धारण सुनिश्चित करने से निगम की आय बढ़ेगी और कर व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।

विशेष टीम ने किया औचक निरीक्षण

नगर आयुक्त सुलोचना मीणा के निर्देश पर सहायक नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। इस टीम में नगर प्रबंधक और दो राजस्व निरीक्षकों को शामिल किया गया था। टीम ने नगर निगम क्षेत्र के सात प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान संबंधित प्रतिष्ठानों की होल्डिंग संख्या, भवन के वर्तमान उपयोग, निर्मित क्षेत्रफल, व्यापारिक गतिविधियों और ट्रेड लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच की गई। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर उपलब्ध दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन भी किया।

जांच में सामने आईं कई विसंगतियां

नगर निगम की जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। कुछ प्रतिष्ठानों में वर्तमान उपयोग और निगम अभिलेखों में दर्ज विवरणों के बीच अंतर पाया गया। वहीं कुछ मामलों में निर्मित क्षेत्रफल तथा कर निर्धारण से संबंधित सूचनाएं अद्यतन नहीं थीं।

अधिकारियों के अनुसार, जब किसी भवन का उपयोग बदल जाता है या उसका क्षेत्रफल बढ़ जाता है, तो उसके अनुरूप होल्डिंग टैक्स का निर्धारण भी बदलता है। लेकिन कई मामलों में ऐसी जानकारियां समय पर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाती हैं, जिससे राजस्व प्रभावित होता है।

इन्हीं विसंगतियों को ध्यान में रखते हुए जांच दल ने विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर नगर निगम कार्यालय को सौंप दिया है।

सातों प्रतिष्ठानों का होगा पुनर्मूल्यांकन

जांच रिपोर्ट के आधार पर नगर निगम प्रशासन ने संबंधित सातों प्रतिष्ठानों का पुनर्मूल्यांकन करने का निर्णय लिया है। पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया में भवन के वास्तविक उपयोग, निर्मित क्षेत्रफल, व्यापारिक गतिविधियों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर होल्डिंग टैक्स का नया निर्धारण किया जाएगा।

नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से कर निर्धारण अधिक सटीक होगा और राजस्व संग्रहण में सुधार आएगा।

जिन प्रतिष्ठानों का हुआ निरीक्षण

नगर निगम द्वारा जिन सात प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया, उनमें शामिल हैं—

– बीना श्री गेस्ट हाउस, वार्ड संख्या 21
– रुद्रा हेरिटेज, वार्ड संख्या 2
– होटल आशा इन, वार्ड संख्या 1
– नयन रेजिडेंसी, वार्ड संख्या 2
– होटल एकता इंटरनेशनल, वार्ड संख्या 12
– सुखदानी देवी प्रतिष्ठान, वार्ड संख्या 1
– होटल वैष्णवी, वार्ड संख्या 19

इन सभी प्रतिष्ठानों से संबंधित दस्तावेजों और कर अभिलेखों की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नगर आयुक्त ने दिए नियमित निरीक्षण के संकेत

नगर आयुक्त सुलोचना मीणा ने कहा कि नगर निगम की प्राथमिकता पारदर्शी और जवाबदेह कर व्यवस्था स्थापित करना है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे निरीक्षण अभियान चलाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान अपने होल्डिंग टैक्स, ट्रेड लाइसेंस और अन्य आवश्यक अभिलेखों को अद्यतन रखें। यदि किसी प्रकार का परिवर्तन भवन के उपयोग, क्षेत्रफल या व्यवसाय में हुआ है तो उसकी जानकारी नगर निगम को अवश्य दें।

नगर आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि निगम प्रशासन का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि कर व्यवस्था को व्यवस्थित और निष्पक्ष बनाना है।

राजस्व बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निकायों की आर्थिक मजबूती उनके राजस्व संग्रहण पर निर्भर करती है। यदि सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से वास्तविक उपयोग के आधार पर कर संग्रह किया जाए तो नगर निगम को विकास योजनाओं के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।

देवघर नगर निगम द्वारा चलाया गया यह अभियान इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। इससे न केवल राजस्व वृद्धि होगी बल्कि शहर में बुनियादी सुविधाओं के विकास, स्वच्छता, सड़क, जलापूर्ति और अन्य शहरी सेवाओं को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।

निष्कर्ष

देवघर नगर निगम की यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि अब निगम प्रशासन राजस्व संबंधी मामलों में अधिक सतर्क और सक्रिय भूमिका निभा रहा है। सात प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पुनर्मूल्यांकन का निर्णय कर व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में ऐसे और निरीक्षण अभियान चलाए जाने की संभावना है, जिससे निगम की राजस्व व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सकेगी।

 

प्रश्न 1: नगर निगम ने कितने प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया?

उत्तर: नगर निगम की टीम ने सात व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया।

प्रश्न 2: निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य क्या था?

उत्तर: होल्डिंग टैक्स और ट्रेड लाइसेंस अभिलेखों की सत्यता की जांच तथा राजस्व संग्रहण व्यवस्था को मजबूत बनाना।

प्रश्न 3: जांच में क्या पाया गया?

उत्तर: कई मामलों में निगम अभिलेखों और वास्तविक उपयोग की स्थिति में अंतर पाया गया।

प्रश्न 4: अब आगे क्या कार्रवाई होगी?

उत्तर: संबंधित सातों प्रतिष्ठानों का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा और वास्तविक उपयोग के आधार पर कर निर्धारण होगा।

प्रश्न 5: नगर आयुक्त ने क्या अपील की है?

उत्तर: सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से अपने होल्डिंग टैक्स और ट्रेड लाइसेंस अभिलेख अद्यतन रखने तथा निगम प्रशासन को सहयोग करने की अपील की गई है।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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