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देवघर के चांदपुर में पूर्व वार्ड पार्षद आशीष पंडित पर सरकारी आवास योजना की राशि लेने, अधूरा निर्माण कराने, जातिसूचक गाली देने और धमकी देने के आरोप लगे हैं। कई लाभुकों ने मंत्री और विभाग से जांच की मांग की है।
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पूर्व वार्ड पार्षद आशीष पंडित पर आवास योजना की राशि हड़पने और अधूरे मकान बनाने का आरोप, लाभुकों ने मंत्री से लगाई न्याय की गुहार
चांदपुर के 15 से अधिक लाभुकों ने सौंपे शिकायत पत्र, राशि लेने, निर्माण में अनियमितता, जातिसूचक गाली और धमकी देने के लगाए गंभीर आरोप
News Desk | देवघर | 21 जून 2026

नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंपे गए शिकायत पत्र की प्रति।
पूर्व वार्ड पार्षद आशीष पंडित के खिलाफ सरकारी आवास योजना में अनियमितता को लेकर ग्रामीणों का शिकायत पत्र
देवघर जिले के जसीडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत चांदपुर गांव में सरकारी आवास योजना को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। गांव के कई लाभुकों ने देवघर नगर निगम के वार्ड नंबर 05 के पूर्व वार्ड पार्षद आशीष पंडित पर प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि लेने, निर्माण कार्य अधूरा छोड़ने, पैसा वापस नहीं करने तथा विरोध करने पर जातिसूचक गाली-गलौज और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में लाभुकों ने नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री, विभागीय सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों को हस्ताक्षरयुक्त आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों ने क्षेत्र में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए स्वीकृत आवास आज भी अधूरे पड़े हैं, जबकि निर्माण के नाम पर पूरी राशि ली जा चुकी है।
सामूहिक शिकायत में 13 लाभुकों ने लगाए आरोप
नगर विकास एवं आवास विभाग को सौंपे गए आवेदन में प्रमीला देवी, अदनी देवी, गुड़िया देवी, टिपू मांझी, रोहन मांझी, दिलीप मांझी, माला देवी, कांग्रेस मांझी, कामदेव मांझी, रूबी देवी, मुन्ना देवी, हेमिया देवी और बिलो देवी सहित कुल 13 लाभुकों ने संयुक्त रूप से शिकायत दर्ज कराई है।
आवेदन के अनुसार इन सभी लाभुकों के नाम पर सरकारी आवास स्वीकृत हुए थे। आरोप है कि आवास निर्माण कराने की जिम्मेदारी पूर्व वार्ड पार्षद आशीष पंडित ने स्वयं ली और इसके एवज में लाभुकों से योजना की राशि प्राप्त कर ली। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि राशि लेने के बावजूद निर्माण कार्य न तो मानकों के अनुरूप कराया गया और न ही कई मामलों में पूरा किया गया।

निर्माण कार्य में भारी अनियमितता का आरोप
शिकायत पत्र में लाभुकों ने निर्माण कार्य में कई गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया है। आवेदन के अनुसार कई मकानों में निर्धारित संख्या से कम पिलर लगाए गए, बीम का निर्माण नहीं किया गया, प्लास्टर का काम अधूरा छोड़ दिया गया और कुछ स्थानों पर केवल पांच इंच की दीवार खड़ी कर दी गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई घरों में आज तक खिड़की और दरवाजे नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में परिवारों को असुरक्षित परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लाभुकों का कहना है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी लगातार चिंता बनी हुई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार सरकारी योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को सुरक्षित और स्थायी आवास उपलब्ध कराना था, लेकिन अधूरे निर्माण के कारण योजना का लाभ अपेक्षित रूप से नहीं मिल सका।
फूलो मांझी ने 90 हजार रुपये लेने का लगाया आरोप
चांदपुर निवासी फूलो मांझी ने विभागीय मंत्री को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके खाते में सरकारी आवास निर्माण के लिए 90 हजार रुपये की राशि आई थी। उनका कहना है कि पूर्व वार्ड पार्षद ने घर बनवाने का आश्वासन देकर उक्त राशि अपने पास ले ली।
फूलो मांझी के अनुसार राशि देने के बाद भी उनका आवास पूरा नहीं बन सका। उन्होंने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि कई बार आग्रह करने के बावजूद न तो निर्माण कार्य पूरा कराया गया और न ही पैसा लौटाया गया।
सिकंदर कुमार मांझी ने भी दर्ज कराई शिकायत
इसी प्रकार चांदपुर निवासी सिकंदर कुमार मांझी ने भी मंत्री को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त के रूप में मिले 45 हजार रुपये निर्माण कार्य कराने के नाम पर ले लिए गए।
सिकंदर कुमार मांझी का कहना है कि काफी समय बीत जाने के बावजूद उनका घर नहीं बन पाया। उन्होंने शिकायत में आरोप लगाया है कि जब उन्होंने पैसा वापस मांगने की कोशिश की तो उन्हें अपमानित किया गया और धमकी देकर भगा दिया गया।

जातिसूचक गाली और धमकी देने का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने अपने आवेदन में यह भी आरोप लगाया है कि जब भी वे अपने घरों का निर्माण पूरा कराने या खर्च की गई राशि का हिसाब मांगते हैं, तब उन्हें कथित रूप से जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया जाता है।
आवेदन में यह भी कहा गया है कि शिकायत करने वालों को धमकाया जाता है और विरोध करने पर उन्हें डराने का प्रयास किया जाता है। लाभुकों का कहना है कि इस कारण कई परिवार मानसिक दबाव में जीवन गुजार रहे हैं।
विभागीय जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने नगर विकास एवं आवास विभाग से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
लाभुकों ने यह भी मांग की है कि अधूरे पड़े आवासों का निर्माण जल्द पूरा कराया जाए और जिन लोगों की राशि फंसी हुई है, उन्हें न्याय दिलाया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचना चाहिए और किसी भी स्तर पर अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बना मामला
लगातार सामने आ रही शिकायतों के बाद यह मामला चांदपुर और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि गरीब परिवारों के लिए बनी योजनाओं में यदि अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अब लोगों की नजर विभागीय कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पूर्व वार्ड पार्षद का पक्ष नहीं मिल सका
शिकायतों में लगाए गए आरोपों के संबंध में पूर्व वार्ड पार्षद आशीष पंडित का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा ताकि पाठकों के सामने मामले का दूसरा पक्ष भी आ सके।
निष्कर्ष
चांदपुर में सरकारी आवास योजना को लेकर उठे इस विवाद ने स्थानीय प्रशासन और विभागीय व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर लाभुक न्याय और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अब पूरे मामले में विभागीय जांच का इंतजार किया जा रहा है। जांच के निष्कर्ष ही तय करेंगे कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्न 1: मामला किस क्षेत्र से जुड़ा है?
उत्तर: यह मामला देवघर जिले के जसीडीह थाना क्षेत्र स्थित चांदपुर गांव से जुड़ा है।
प्रश्न 2: शिकायत किसके खिलाफ की गई है?
उत्तर: ग्रामीणों ने पूर्व वार्ड पार्षद आशीष पंडित के खिलाफ शिकायत की है।
प्रश्न 3: शिकायत में क्या आरोप लगाए गए हैं?
उत्तर: राशि लेने, अधूरा निर्माण कराने, पैसा वापस नहीं करने, जातिसूचक गाली देने और धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं।
प्रश्न 4: शिकायत किसे सौंपी गई है?
उत्तर: नगर विकास एवं आवास विभाग के मंत्री और विभागीय अधिकारियों को शिकायत सौंपी गई है।
प्रश्न 5: क्या आरोप सिद्ध हो चुके हैं?
उत्तर: नहीं। आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं। उनकी पुष्टि विभागीय जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
Disclaimer: यह समाचार लाभुकों द्वारा विभाग को सौंपे गए आवेदन एवं उसमें लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच और सक्षम प्राधिकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।










