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मद्रास कांवड़ संघ रजत जयंती कांवड़ यात्रा
रजत जयंती वर्ष में मद्रास कांवड़ संघ की भव्य शुरुआत, 85 शिवभक्तों ने सुल्तानगंज से उठाई पवित्र कांवड़
मद्रास कांवड़ संघ, चेन्नई ने अपने रजत जयंती वर्ष की शुरुआत 85 शिवभक्तों के साथ सुल्तानगंज से कांवड़ यात्रा प्रारंभ कर की। शिव वाटिका में हजारों कांवड़ियों के लिए निःशुल्क शिकंजी, शरबत, पेयजल एवं सेवा शिविर आकर्षण का केंद्र बना।
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रजत जयंती वर्ष में मद्रास कांवड़ संघ की अनूठी शुरुआत, सेवा और शिवभक्ति का अद्भुत संगम
85 शिवभक्तों के साथ शुरू हुई रजत जयंती कांवड़ यात्रा। हजारों कांवड़ियों के लिए निःशुल्क शिकंजी, शरबत, जल सेवा और असरगंज में भव्य भजन संध्या बनी आकर्षण का केंद्र।
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सुनील झा : देवघर : 2 अगस्त 2026
2 अगस्त 2026
लगभग 6 मिनट

रजत जयंती वर्ष में मद्रास कांवड़ संघ के शिवभक्त सुल्तानगंज से पवित्र कांवड़ लेकर देवघर रवाना
मद्रास कांवड़ संघ के 85 शिवभक्तों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर देवघर के लिए कांवड़ यात्रा शुरू की।
मद्रास कांवड़ संघ
रजत जयंती वर्ष में मद्रास कांवड़ संघ की भव्य शुरुआत, 85 शिवभक्तों ने सुल्तानगंज से उठाई पवित्र कांवड़
हजारों कांवड़ियों के लिए निःशुल्क शिकंजी, शरबत व जल सेवा, असरगंज में भजन सम्राट पवन शर्मा ने बांधा समां
- मद्रास कांवड़ संघ ने रजत जयंती वर्ष की शुरुआत श्रद्धा और सेवा के साथ की।
- 85 शिवभक्तों ने सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर देवघर के लिए यात्रा प्रारंभ की।
- शिव वाटिका में हजारों कांवड़ियों के लिए निःशुल्क शिकंजी, शरबत और पेयजल की व्यवस्था।
- असरगंज में प्रसिद्ध भजन गायक पवन शर्मा ‘निर्मल’ ने भक्ति संध्या में प्रस्तुतियां दीं।
- यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर भोजन, चिकित्सा, विश्राम और सेवा शिविर संचालित होंगे।
सेवा, श्रद्धा और शिवभक्ति का अनूठा संगम बना रजत जयंती वर्ष
देवघर। श्रावणी मेला 2026 के पावन अवसर पर मद्रास कांवड़ संघ, चेन्नई ने अपने रजत जयंती वर्ष की शुरुआत सेवा, समर्पण और शिवभक्ति के अनूठे संगम के साथ की। रविवार को संघ के 85 शिवभक्तों ने उत्तरवाहिनी गंगा के पावन तट गंगाधाम, सुल्तानगंज में वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद पवित्र गंगाजल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए अपनी कांवड़ यात्रा प्रारंभ की।
‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के गगनभेदी जयघोष के बीच श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। लगभग 13 किलोमीटर की प्रथम चरण की पदयात्रा पूरी कर सभी शिवभक्त असरगंज पहुंचे, जहां उनका पारंपरिक स्वागत किया गया। पूरे मार्ग में शिवभक्ति का वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
शिव वाटिका में हजारों कांवड़ियों की निःस्वार्थ सेवा
रजत जयंती वर्ष को केवल यात्रा तक सीमित न रखते हुए मद्रास कांवड़ संघ ने इसे सेवा महायज्ञ का स्वरूप दिया है। सुल्तानगंज स्थित शिव वाटिका में देशभर से आने वाले हजारों कांवड़ियों के लिए निःशुल्क नींबू शिकंजी, शरबत और शीतल पेयजल की व्यवस्था की गई।
भीषण गर्मी के बावजूद सेवा शिविर में पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। संघ के स्वयंसेवक प्रत्येक कांवड़िये का ‘बोल बम’ के जयघोष के साथ स्वागत करते हुए उन्हें ठंडा पेयजल, शिकंजी और शरबत उपलब्ध कराते रहे। सेवा शिविर में अनुशासन, स्वच्छता और व्यवस्थित व्यवस्था की भी श्रद्धालुओं ने सराहना की।
राष्ट्रीय मीडिया का भी आकर्षण बना सेवा शिविर
मद्रास कांवड़ संघ की सेवा भावना ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का भी ध्यान आकर्षित किया। विभिन्न समाचार चैनलों एवं मीडिया संस्थानों ने सेवा शिविर तथा कांवड़ियों की निःस्वार्थ सेवा को प्रमुखता से अपने कैमरों में कैद किया। पूरे दिन शिव वाटिका श्रद्धा, सेवा और सामाजिक समर्पण का केंद्र बनी रही।
भजन संध्या में शिवमय हुआ असरगंज, पवन शर्मा ‘निर्मल’ ने बांधा समां
कांवड़ यात्रा के प्रथम दिवस की पदयात्रा पूर्ण होने के बाद असरगंज में आयोजित भव्य भजन संध्या श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। राजस्थान के लक्ष्मणगढ़ के सुप्रसिद्ध भजन गायक पवन शर्मा ‘निर्मल’ ने अपनी संगीत मंडली के साथ भगवान शिव की महिमा पर आधारित एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी। देर रात तक श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर झूमते रहे। पूरा पंडाल “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयघोष से गुंजायमान रहा।
भजन संध्या में शिवभक्तों की भारी उपस्थिति रही। श्रद्धालुओं ने भक्ति संगीत के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। आयोजन समिति ने बताया कि यात्रा के आगामी प्रत्येक पड़ाव पर भी इसी प्रकार के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि यात्रा केवल पैदल यात्रा न होकर आध्यात्मिक अनुभव का भी माध्यम बने।
ओम प्रकाश डागा बोले— सेवा ही सबसे बड़ी साधना
मद्रास कांवड़ संघ के चेयरमैन ओम प्रकाश डागा ने कहा कि संघ का रजत जयंती वर्ष सभी सदस्यों के लिए गर्व और प्रेरणा का अवसर है। उन्होंने बताया कि पिछले 25 वर्षों से संघ का उद्देश्य केवल कांवड़ यात्रा करना नहीं, बल्कि बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले अधिक से अधिक शिवभक्तों की निःस्वार्थ सेवा करना रहा है।
उन्होंने कहा कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा से इस वर्ष भी हजारों श्रद्धालुओं की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ है। संघ का प्रयास है कि प्रत्येक कांवड़िया सुरक्षित, सुविधाजनक और आध्यात्मिक वातावरण में अपनी यात्रा पूरी कर सके।
“सेवा ही सबसे बड़ी साधना है। शिवभक्तों की सेवा ही बाबा बैद्यनाथ की सच्ची आराधना है।”
— ओम प्रकाश डागा, चेयरमैन, मद्रास कांवड़ संघ
प्रत्येक पड़ाव पर भोजन, चिकित्सा और विश्राम की व्यवस्था
संघ के अध्यक्ष संजय मूंदड़ा ने बताया कि यात्रा के सभी पड़ावों पर श्रद्धालुओं के लिए निःशुल्क भोजन प्रसादी, फल सेवा, नींबू शिकंजी, शरबत, शीतल पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, बाम सेवा, विश्राम स्थल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा कि सेवा शिविरों में प्रशिक्षित स्वयंसेवक 24 घंटे श्रद्धालुओं की सहायता के लिए तैनात रहेंगे। इसके साथ ही प्रतिदिन शाम को भव्य भजन संध्या का आयोजन भी किया जाएगा।
सुरक्षा और स्वास्थ्य को दी गई सर्वोच्च प्राथमिकता
संघ के कोषाध्यक्ष राजेश भौतिका ने बताया कि सभी सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्राथमिक उपचार की व्यवस्था के साथ आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
संयोजिका मीना डागा ने कहा कि महिला श्रद्धालुओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग कांवड़ियों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। प्रत्येक पड़ाव पर स्वच्छता, सुरक्षित विश्राम तथा आध्यात्मिक वातावरण बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
रजत जयंती वर्ष को यादगार बनाने का संकल्प
मद्रास कांवड़ संघ का रजत जयंती वर्ष केवल एक आयोजन नहीं बल्कि 25 वर्षों की सेवा, अनुशासन और शिवभक्ति की परंपरा का उत्सव है। चेन्नई से जुड़े इस संघ ने वर्षों से श्रावणी मेला के दौरान हजारों कांवड़ियों की सेवा कर एक अलग पहचान बनाई है।
इस वर्ष संघ ने यात्रा को और अधिक व्यवस्थित, सेवा-प्रधान और सांस्कृतिक स्वरूप प्रदान किया है। आयोजन समिति का मानना है कि श्रद्धा के साथ सेवा का भाव ही इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता है।
आयोजन: मद्रास कांवड़ संघ रजत जयंती कांवड़ यात्रा 2026
- संघ: मद्रास कांवड़ संघ, चेन्नई
- यात्रा प्रारंभ: गंगाधाम, सुल्तानगंज
- शिवभक्त: 85
- पहला पड़ाव: असरगंज
- विशेष सेवा: निःशुल्क शिकंजी, शरबत, शीतल जल, भोजन, प्राथमिक चिकित्सा एवं विश्राम
- विशेष आकर्षण: पवन शर्मा ‘निर्मल’ की भव्य भजन संध्या
निष्कर्ष
रजत जयंती वर्ष में मद्रास कांवड़ संघ ने यह साबित किया है कि कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी सशक्त माध्यम है। 85 शिवभक्तों के साथ प्रारंभ हुई यह यात्रा हजारों श्रद्धालुओं की निःस्वार्थ सेवा, अनुशासित व्यवस्था और आध्यात्मिक वातावरण के कारण श्रावणी मेला 2026 के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो गई है। आगामी पड़ावों पर भी सेवा कार्य और धार्मिक आयोजन इसी उत्साह के साथ जारी रहेंगे।
प्रश्न 1: मद्रास कांवड़ संघ कहाँ का संगठन है?
उत्तर: मद्रास कांवड़ संघ चेन्नई का धार्मिक एवं सेवा-समर्पित संगठन है।
प्रश्न 2: इस वर्ष कितने शिवभक्तों ने कांवड़ यात्रा शुरू की?
उत्तर: रजत जयंती वर्ष में 85 शिवभक्तों ने सुल्तानगंज से कांवड़ यात्रा प्रारंभ की।
प्रश्न 3: संघ द्वारा कौन-कौन सी सेवाएं दी जा रही हैं?
उत्तर: निःशुल्क शिकंजी, शरबत, शीतल जल, भोजन प्रसादी, प्राथमिक चिकित्सा, विश्राम, बाम सेवा और भजन संध्या।
प्रश्न 4: प्रथम पड़ाव कहाँ हुआ?
उत्तर: प्रथम पड़ाव असरगंज में हुआ, जहां भव्य भजन संध्या आयोजित की गई।
- श्रावणी मेला 2026: देवघर में उमड़ रही शिवभक्तों की आस्था
- सुल्तानगंज से देवघर तक कांवड़ पथ पर सेवा शिविरों की विशेष व्यवस्था
- बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क
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