नन्हे दंडी बमों की अनूठी आस्था: एक माह की कठिन यात्रा के बाद बाबाधाम पहुंचे आदित्य और दीपक

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नन्हे दंडी बमों की अनूठी आस्था: एक माह की कठिन यात्रा के बाद बाबाधाम पहुंचे आदित्य और दीपक

श्रावणी मेला 2026 में बिहार के नवगछिया के 7 और 8 वर्षीय दो नन्हे दंडी बम आदित्य और दीपक एक माह की कठिन दांडी यात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे। जलार्पण के बाद बासुकीनाथ और तारापीठ के लिए हुए रवाना।

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नन्हे दंडी बमों की अनूठी आस्था: एक माह की कठिन दांडी यात्रा के बाद बाबाधाम पहुंचे आदित्य और दीपक

सुल्तानगंज से दांडी देते हुए पहुंचे दोनों बाल श्रद्धालु, जलार्पण के बाद बासुकीनाथ और तारापीठ के लिए हुए रवाना

सुनील झा : देवघर : 29 जुलाई 2026

 

नन्हे दंडी बम आदित्य कुमार और दीपक कुमार बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण के बाद।

विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 के शुभारंभ के साथ बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर एक बार फिर शिवभक्ति और आस्था के महासंगम में डूब गई है। देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल लेकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने पहुंच रहे हैं। कोई पारंपरिक कांवर यात्रा कर रहा है तो कोई दांडी बम बनकर कठिन तप, त्याग और संकल्प के साथ अपनी धार्मिक यात्रा पूरी कर रहा है। इसी बीच बिहार के भागलपुर जिले के नवगछिया से आए दो नन्हे दंडी बम अपनी अद्भुत श्रद्धा, साहस और अटूट विश्वास के कारण पूरे श्रावणी मेले में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

महज सात और आठ वर्ष की उम्र में जिस कठिन दांडी यात्रा को बड़े-बड़े श्रद्धालु भी चुनौती मानते हैं, उसे इन दोनों बच्चों ने पूरे अनुशासन और संकल्प के साथ पूरा कर समाज के सामने आस्था की एक प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की है।

एक माह तक दांडी देते हुए तय की कठिन यात्रा

भागलपुर जिले के नवगछिया निवासी राजाराम मंडल के आठ वर्षीय पुत्र आदित्य कुमार तथा सुबोध कुमार मंडल के सात वर्षीय पुत्र दीपक कुमार ने 29 जून से उत्तरवाहिनी गंगा तट सुल्तानगंज से दांडी बम यात्रा प्रारंभ की थी। दोनों बाल श्रद्धालुओं ने लगभग एक माह तक लगातार कठिन तपस्या, संयम और धार्मिक नियमों का पालन करते हुए दांडी देते-देते सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय की।

रास्ते में तेज धूप, बारिश, कीचड़, थकान और शारीरिक कठिनाइयों जैसी अनेक चुनौतियां आईं, लेकिन दोनों बच्चों की आस्था और संकल्प कभी डगमगाया नहीं। हर दिन भगवान भोलेनाथ का स्मरण करते हुए उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी और आखिरकार बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर अपनी पहली बड़ी धार्मिक यात्रा को सफल बनाया।

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में किया विधि-विधान से जलार्पण

देवघर पहुंचने के बाद दोनों नन्हे श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया। जलार्पण के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं की नजरें इन मासूम दंडी बमों पर टिक गईं। उनकी कम उम्र और कठिन साधना को देखकर लोग भावुक भी हुए और उनकी हौसला-अफजाई भी करते नजर आए।

मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद दोनों बच्चों ने भगवान भोलेनाथ से परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और सभी की मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की।

परिवार की मनोकामना के लिए लिया था कठिन संकल्प

परिजनों ने बताया कि दोनों बच्चों ने परिवार की मनोकामना पूर्ण होने की कामना के साथ यह कठिन दांडी बम यात्रा शुरू की थी। परिवार के सदस्यों ने भी पूरे समय उनका मनोबल बढ़ाया और यात्रा के दौरान हर संभव सहयोग दिया।

परिजनों का कहना है कि बच्चों ने कभी यात्रा छोड़ने की बात नहीं कही। कठिन रास्तों और शारीरिक थकान के बावजूद दोनों पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ते रहे। उनकी यही दृढ़ इच्छाशक्ति इस यात्रा की सबसे बड़ी विशेषता रही।

दीपक की यात्रा बासुकीनाथ तक, आदित्य जाएंगे तारापीठ

बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण के बाद दोनों बच्चों की आगे की यात्रा भी अलग-अलग निर्धारित है। सात वर्षीय दीपक कुमार अब अपनी दांडी बम यात्रा का समापन करने के लिए बाबा बासुकीनाथ धाम के लिए रवाना हो गए हैं।

वहीं आठ वर्षीय आदित्य कुमार की धार्मिक यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है। बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना के बाद वह पश्चिम बंगाल स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ तक अपनी दांडी यात्रा जारी रखेंगे। इतनी कम उम्र में इतनी लंबी और कठिन धार्मिक यात्रा करना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

श्रद्धालुओं के लिए बने प्रेरणा का स्रोत

श्रावणी मेले में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, लेकिन आदित्य और दीपक की आस्था ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। मंदिर परिसर, कांवर पथ और विश्राम स्थलों पर लोग दोनों बच्चों के साथ तस्वीरें खिंचवाते और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते दिखाई दिए।

कई श्रद्धालुओं ने कहा कि आज के दौर में जहां छोटे बच्चे आधुनिक जीवनशैली में व्यस्त रहते हैं, वहीं इतनी कम उम्र में कठिन धार्मिक साधना करना इन बच्चों की गहरी आस्था और परिवार द्वारा दिए गए धार्मिक संस्कारों को दर्शाता है।

श्रावणी मेले में आस्था और समर्पण की जीवंत मिसाल

श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि विश्वास, अनुशासन, त्याग और समर्पण का भी पर्व माना जाता है। हर वर्ष लाखों कांवरिये कठिन यात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं, लेकिन नन्हे दंडी बमों की यह यात्रा इस बार श्रद्धालुओं के बीच विशेष चर्चा का विषय बनी हुई है।

आदित्य और दीपक ने यह साबित कर दिया कि यदि मन में अटूट श्रद्धा, दृढ़ विश्वास और मजबूत संकल्प हो तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। उनकी यह कठिन तपस्या आने वाले वर्षों तक श्रावणी मेले की प्रेरणादायक यादों में शामिल रहेगी।

निष्कर्ष

बिहार के नवगछिया से आए सात वर्षीय दीपक कुमार और आठ वर्षीय आदित्य कुमार ने लगभग एक माह तक दांडी देते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर न केवल अपनी मनोकामना की यात्रा पूरी की, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा, धैर्य और संकल्प का प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत किया। श्रावणी मेले में उनकी यह अनूठी यात्रा आने वाले श्रद्धालुओं को यह संदेश देती है कि सच्ची आस्था के सामने कठिन से कठिन मार्ग भी आसान हो जाता है।

प्रश्न: नन्हे दंडी बम कौन हैं?
उत्तर: भागलपुर जिले के नवगछिया निवासी आठ वर्षीय आदित्य कुमार और सात वर्षीय दीपक कुमार।

प्रश्न: दोनों बच्चों ने यात्रा कहां से शुरू की?
उत्तर: उत्तरवाहिनी गंगा तट सुल्तानगंज से 29 जून को दांडी बम यात्रा प्रारंभ की।

प्रश्न: बाबाधाम पहुंचने में कितना समय लगा?
उत्तर: लगभग एक माह की कठिन दांडी यात्रा के बाद दोनों बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे।

प्रश्न: जलार्पण के बाद उनकी आगे की यात्रा क्या है?
उत्तर: दीपक कुमार बासुकीनाथ धाम के लिए रवाना हुए, जबकि आदित्य कुमार बासुकीनाथ के बाद पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ तक दांडी यात्रा जारी रखेंगे।

 

 

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Author: Baba Wani

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