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श्रावणी मेला 2026: बेहतर प्रबंधन से बाबा बैद्यनाथ धाम बन सकता है देश का आदर्श धार्मिक आयोजन
श्रावणी मेला 2026 से पहले देवघर में श्रद्धालुओं का आगमन तेज हो गया है। समाजसेवी महेश प्रसाद राय ने भीड़ नियंत्रण, श्रद्धालु सुविधाओं और आधुनिक प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
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श्रावणी मेला 2026: आस्था का महासंगम, बेहतर प्रबंधन से बाबा धाम बन सकता है देश का सबसे आदर्श तीर्थ
महेश प्रसाद राय बोले— आधुनिक तकनीक, बेहतर भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालु सुविधाओं पर विशेष ध्यान देकर श्रावणी मेले को मिल सकती है नई पहचान

बाबा बैद्यनाथ धाम में जलार्पण को पहुंचे श्रद्धालु
संवाददाता : देवघर : 23.07.2026
विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम का श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, सेवा, अनुशासन और प्रशासनिक क्षमता की सबसे बड़ी परीक्षा भी है। 29 जुलाई से प्रारंभ होने वाले श्रावणी मेला 2026 से पहले ही बाबा नगरी में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। बांग्ला सावन शुरू होते ही बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम सहित देश के विभिन्न हिस्सों से शिवभक्त देवघर पहुंचने लगे हैं। शहर के बाजारों में रौनक लौट आई है, होटल और धर्मशालाओं में चहल-पहल बढ़ गई है तथा पूरा वातावरण शिवमय होता दिखाई दे रहा है।
हर वर्ष उत्तरवाहिनी गंगा सुल्तानगंज से लगभग 105 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा कर लाखों कांवरिया बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जलार्पण करते हैं। इसके बाद श्रद्धालु बाबा बासुकीनाथ धाम जाकर अपनी धार्मिक यात्रा पूर्ण करते हैं। यही परंपरा श्रावणी मेले को देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में शामिल करती है।
अंतिम चरण में प्रशासनिक तैयारियां
झारखंड प्रवेश द्वार दुम्मा से लेकर बाबा मंदिर परिसर तक जिला प्रशासन और बाबा बैद्यनाथ मंदिर श्राइन बोर्ड की ओर से सुरक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश, ट्रैफिक और श्रद्धालु सुविधाओं की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। उपायुक्त सौरभ भुवानिया, पुलिस अधीक्षक प्रवीण पुष्कर, डीडीसी पीयूष कुमार तथा एसडीओ रवि कुमार लगातार मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर रहे हैं।
रात्रि में भी श्रद्धालुओं को सुविधा मिले, इसके लिए शहर को आकर्षक रोशनी से सजाया जा रहा है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
हर वर्ष सामने आती हैं ये चुनौतियां
श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने के कारण कई व्यावहारिक समस्याएं भी सामने आती हैं। लंबी कतारें, पेयजल की कमी, महिला श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त शौचालय एवं स्नानघर का अभाव, विश्राम स्थलों की सीमित संख्या, क्यू कॉम्प्लेक्स में भीड़ का दबाव तथा सूचना व्यवस्था जैसी चुनौतियां हर वर्ष चर्चा का विषय बनती हैं। ऐसे में पारंपरिक व्यवस्था के साथ आधुनिक तकनीक को अपनाना समय की आवश्यकता बन गया है।

महेश प्रसाद राय ने रखे कई महत्वपूर्ण सुझाव
समाजसेवी एवं भाजपा नेता महेश प्रसाद राय ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला केवल देवघर की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की पहचान है। इसलिए इसकी व्यवस्था भी राष्ट्रीय स्तर की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बांग्ला सावन से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो जाता है, इसलिए सभी व्यवस्थाएं पहले दिन से पूरी तरह सक्रिय रहनी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि कतार में खड़े श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पेयजल, मोबाइल शौचालय, डस्टबिन, स्नानघर और विश्राम स्थलों की संख्या बढ़ाई जाए। संस्कार मंडप, क्यू कॉम्प्लेक्स और आसपास के क्षेत्रों में नियमित सफाई तथा जल निकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
महिला श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने अलग स्नान एवं शौचालय परिसर विकसित करने की मांग की। उनका कहना है कि धार्मिक यात्रा के दौरान महिलाओं को सम्मानजनक और सुरक्षित सुविधाएं मिलनी चाहिए।
भीड़ नियंत्रण के लिए आधुनिक व्यवस्था अपनाने की जरूरत
महेश प्रसाद राय ने कहा कि मंदिर परिसर में अतिरिक्त अर्घा की व्यवस्था, पुरुष एवं महिला श्रद्धालुओं के लिए अलग और अधिक सुव्यवस्थित कतारें तथा बाहर विशाल एलईडी स्क्रीन पर बाबा बैद्यनाथ के लाइव दर्शन की सुविधा शुरू की जानी चाहिए। इससे लंबी कतार में खड़े श्रद्धालुओं को मानसिक संतोष मिलेगा और भीड़ का दबाव भी कम होगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सेवा शिविरों, चिकित्सा केंद्रों, सूचना केंद्रों, स्वयंसेवकों और एंबुलेंस सेवाओं की संख्या बढ़ाई जाए ताकि किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
जनसहभागिता से ही बनेगा आदर्श श्रावणी मेला
महेश प्रसाद राय ने कहा कि श्रावणी मेला केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज, स्वयंसेवी संस्थाओं, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों की भी साझा जिम्मेदारी है। यदि सभी मिलकर सेवा और स्वच्छता की भावना से कार्य करें तो यह मेला देश के सबसे व्यवस्थित धार्मिक आयोजनों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।
निष्कर्ष
श्रावणी मेला 2026 केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि बेहतर प्रबंधन की परीक्षा भी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए आधुनिक तकनीक, प्रभावी भीड़ नियंत्रण, स्वच्छता और महिला सुविधाओं पर विशेष ध्यान देना समय की मांग है। यदि प्रशासन और समाज मिलकर इन सुझावों को अमल में लाते हैं तो बाबा बैद्यनाथ धाम देश का सबसे पारदर्शी, सुरक्षित और श्रद्धालु-हितैषी धार्मिक स्थल बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा सकता है।
प्रश्न: श्रावणी मेला 2026 कब शुरू होगा?
उत्तर: 29 जुलाई 2026 से।
प्रश्न: कांवर यात्रा कहां से शुरू होती है?
उत्तर: उत्तरवाहिनी गंगा, सुल्तानगंज से।
प्रश्न: महेश प्रसाद राय ने क्या सुझाव दिए हैं?
उत्तर: बेहतर भीड़ नियंत्रण, अतिरिक्त अर्घा, एलईडी स्क्रीन पर लाइव दर्शन, मोबाइल शौचालय, महिला सुविधाएं, पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र और सेवा शिविरों का विस्तार।
प्रश्न: प्रशासन किन तैयारियों में जुटा है?
उत्तर: सुरक्षा, ट्रैफिक, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और श्रद्धालु सुविधाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।










