वार्ड संख्या 27 में जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति, प्रत्याशी को अयोग्य घोषित करने की मांग

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देवघर नगर निगम चुनाव 2026 में वार्ड संख्या 27 से जुड़े जाति प्रमाण पत्र विवाद ने तूल पकड़ा। सागर यादव ने प्रियंका देवी के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कर अयोग्यता की मांग की। जानें पूरा मामला।

 

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वार्ड संख्या 27 में जाति प्रमाण पत्र पर आपत्ति, प्रत्याशी को अयोग्य घोषित करने की मांग

देवघर नगर निगम चुनाव 2026 में आरक्षण श्रेणी को लेकर विवाद, निर्वाची पदाधिकारी को सौंपा गया आवेदन

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संवाददाता | देवघर | 18 फरवरी 2026

 

देवघर नगर निगम चुनाव 2026 के तहत वार्ड संख्या 27 में जाति प्रमाण पत्र को लेकर नया विवाद सामने आया है। वार्ड संख्या 27, जो पिछड़ा वर्ग-द्वितीय के लिए आरक्षित है, वहां से नामांकन दाखिल करने वाली प्रत्याशी के प्रमाण पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई गई है।

शिकायतकर्ता सागर यादव ने निर्वाची पदाधिकारी को लिखित आवेदन सौंपते हुए प्रत्याशी प्रियंका देवी (पति: धुव्र साह) के नामांकन को निरस्त करने की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि नामांकन के साथ संलग्न जाति प्रमाण पत्र वास्तविक श्रेणी से भिन्न है, जिससे आरक्षण नियमों के उल्लंघन की आशंका उत्पन्न होती है।

 

क्या है पूरा मामला?

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार वार्ड संख्या 27 का पद पिछड़ा वर्ग-द्वितीय (OBC-II) के लिए आरक्षित है। शिकायतकर्ता का दावा है कि संबंधित प्रत्याशी हलवाई जाति से संबंधित हैं, जिसे झारखंड सरकार द्वारा प्रकाशित जाति सूची में पिछड़ा वर्ग-प्रथम (OBC-I) में रखा गया है।

आरोप है कि प्रत्याशी ने अपनी वास्तविक जाति श्रेणी को छुपाते हुए स्वयं को पिछड़ा वर्ग-द्वितीय का सदस्य दर्शाया और उसी आधार पर नामांकन पत्र दाखिल किया। शिकायत पत्र में इसे गंभीर अनियमितता करार देते हुए तत्काल जांच की मांग की गई है।

 

आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि प्रस्तुत आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल आरक्षण संबंधी प्रावधानों का उल्लंघन होगा, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न लगाएगा। आवेदन में निर्वाची पदाधिकारी से आग्रह किया गया है कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच कराई जाए।

साथ ही यह भी मांग की गई है कि तथ्यों की पुष्टि होने पर संबंधित प्रत्याशी को वार्ड संख्या 27 से चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जाए और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाए।

 

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

इस पूरे प्रकरण पर निर्वाचन कार्यालय की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। सूत्रों के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की प्रारंभिक जांच प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

देवघर नगर निगम चुनाव 2026 के दौरान नामांकन प्रक्रिया में उठी इस आपत्ति ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। चुनावी माहौल के बीच यह मामला अब प्रशासनिक जांच और विधिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

 

विशेषज्ञों की राय: क्या कहता है नियम?

चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार, आरक्षित सीट पर नामांकन के लिए संबंधित श्रेणी का वैध और प्रमाणित दस्तावेज अनिवार्य होता है। यदि किसी प्रकार की त्रुटि या गलत जानकारी पाई जाती है तो नामांकन रद्द किए जाने का प्रावधान मौजूद है। हालांकि अंतिम निर्णय निर्वाची पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट और वैधानिक प्रक्रिया पर आधारित होगा।

 

आगे क्या?

अब निगाहें प्रशासनिक जांच और निर्वाचन कार्यालय के निर्णय पर टिकी हैं। यदि शिकायत सही पाई जाती है तो चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। वहीं, यदि प्रमाण पत्र वैध सिद्ध होता है तो विवाद स्वतः समाप्त हो जाएगा।

देवघर नगर निगम चुनाव 2026 में यह प्रकरण पारदर्शिता और नियम पालन की कसौटी साबित हो सकता है।

 

प्रश्न 1. वार्ड संख्या 27 किस श्रेणी के लिए आरक्षित है?

उत्तर: वार्ड संख्या 27 पिछड़ा वर्ग-द्वितीय (OBC-II) के लिए आरक्षित है।

प्रश्न 2. आपत्ति किसने दर्ज कराई है?

उत्तर: सागर यादव ने निर्वाची पदाधिकारी को लिखित आवेदन देकर आपत्ति दर्ज कराई है।

प्रश्न 3. आपत्ति का मुख्य आधार क्या है?

उत्तर: मुख्य आरोप यह है कि प्रत्याशी ने अपनी वास्तविक जाति श्रेणी से अलग श्रेणी का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया है।

प्रश्न 4. क्या प्रशासन ने कोई आधिकारिक बयान दिया है?

उत्तर: अब तक निर्वाचन कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं हुई है।

 

निष्कर्ष

वार्ड संख्या 27 में जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठी आपत्ति ने देवघर नगर निगम चुनाव 2026 में नया राजनीतिक मोड़ ला दिया है। अब प्रशासनिक जांच और आधिकारिक निर्णय ही यह तय करेंगे कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे की कार्रवाई क्या होगी।

 

Disclaimer: यह खबर प्राप्त शिकायत पत्र और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार की गई है। अंतिम निर्णय संबंधित निर्वाचन प्राधिकारी द्वारा की गई जांच और वैधानिक प्रक्रिया के अधीन होगा।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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