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देवघर कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य स्व. केएन सहाय की 112वीं जयंती पर आज विशेष व्याख्यान का आयोजन। डॉ आरके नीरद ‘देवघर के इतिहास को स्व केएन सहाय की देन’ विषय पर करेंगे संबोधन।
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स्व. केएन सहाय की 112वीं जयंती कल, देवघर के इतिहास पर होगा विशेष व्याख्यान
‘देवघर के इतिहास को स्व. केएन सहाय की देन’ विषय पर डॉ आरके नीरद करेंगे मुख्य संबोधन
Author | Location | Date
संवाददाता | देवघर | 16 फरवरी 2026

स्व. केएन सहाय की जयंती पर आईएमए हॉल में आज विशेष व्याख्यान का आयोजन।

देवघर कॉलेज के संस्थापक प्राचार्य, सुविख्यात इतिहासकार एवं भाषाविद् कृष्णनंदन सहाय की 112वीं जयंती कल सोमवार को देवघर में समारोहपूर्वक मनाई जाएगी। झारखंड शोध संस्थान और केएन सहाय फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एक विशेष व्याख्यान होगा, जिसका विषय है— ‘देवघर के इतिहास को स्व. केएन सहाय की देन’।
यह कार्यक्रम स्थानीय स्टेशन रोड स्थित आईएमए हॉल में पूर्वाह्न 11:30 बजे से अपराह्न 3:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार यह आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि समारोह है, बल्कि देवघर के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत पर गंभीर विमर्श का अवसर भी है।
इतिहास और संस्कृति पर केंद्रित रहेगा व्याख्यान
संस्थान के सचिव उमेश कुमार ने बताया कि मुख्य वक्ता के रूप में संताल परगना के इतिहास और संस्कृति पर लंबे समय से शोधरत वरिष्ठ पत्रकार डॉ आरके नीरद अपने विचार रखेंगे।
वे अपने संबोधन में शिवनगरी देवघर के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक विरासत और शैक्षणिक उन्नति के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालेंगे। साथ ही यह भी बताएंगे कि किस प्रकार स्व. केएन सहाय ने क्षेत्रीय इतिहास लेखन को एक नई दृष्टि और पद्धति प्रदान की।
व्याख्यान में विशेष रूप से इस बात पर चर्चा होगी कि स्थानीय इतिहास को प्रमाणिक स्रोतों और शोध के आधार पर किस तरह राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में स्थापित किया जा सकता है—यह कार्य केएन सहाय ने दशकों पहले आरंभ किया था।
विषय-प्रवेश और विद्वानों की सहभागिता
कार्यक्रम में विषय-प्रवेश जाने-माने रचनाकार डॉ उत्तम पीयूष द्वारा कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त आदि प्राचार्य की सारस्वत परंपरा से जुड़े विद्वान डॉ नागेश्वर शर्मा, डॉ सुमन लता, डॉ नंदन किशोर द्विवेदी, डॉ शंकर मोहन झा और ताराचंद जैन सहित अन्य विषय विशेषज्ञ भी अपने विचार साझा करेंगे।
संस्थान के वरिष्ठ सदस्य प्रो रामनंदन सिंह, संजय कुमार उपाध्याय तथा निदेशक डॉ राजीव रंजन कार्यक्रम की तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। आयोजन से संबंधित सभी आवश्यक अनुमतियां अनुमंडल पदाधिकारी से प्राप्त कर ली गई हैं और आदर्श आचार संहिता का पालन सुनिश्चित किया गया है।
डॉ राजीव रंजन ने इतिहास प्रेमियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर इस व्याख्यान का लाभ उठाने की अपील की है।
केएन सहाय: शिक्षा और इतिहास लेखन के पुरोधा
स्व. केएन सहाय ने न केवल देवघर में उच्च शिक्षा की मजबूत नींव रखी, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास को अकादमिक मान्यता दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने स्थानीय अभिलेखों, लोक परंपराओं और मौखिक इतिहास को व्यवस्थित कर शोधपरक लेखन की दिशा दी।
उनके प्रयासों से संताल परगना और देवघर के ऐतिहासिक दस्तावेजों को संरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने यह स्थापित किया कि किसी भी क्षेत्र की पहचान उसके इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से होती है।
इतिहासकारों का मानना है कि यदि स्व. केएन सहाय ने उस दौर में स्थानीय इतिहास पर शोध का कार्य प्रारंभ नहीं किया होता, तो आज देवघर की ऐतिहासिक धरोहरों का दस्तावेजीकरण इतनी व्यवस्थित रूप में उपलब्ध नहीं होता।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का अवसर
यह जयंती समारोह केवल स्मरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक माध्यम भी है। आज जब वैश्वीकरण के दौर में स्थानीय पहचान और परंपराएं चुनौती का सामना कर रही हैं, ऐसे में क्षेत्रीय इतिहास के महत्व को समझना और उसे संरक्षित करना आवश्यक हो गया है।
आयोजकों को उम्मीद है कि यह व्याख्यान देवघर के इतिहास के अध्ययन और शोध को नई ऊर्जा देगा तथा विद्यार्थियों में स्थानीय इतिहास के प्रति रुचि बढ़ाएगा।
कार्यक्रम में शहर के शिक्षाविद, शोधकर्ता, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल होने की संभावना है।
प्रश्न 1: कार्यक्रम कब और कहां आयोजित होगा?
उत्तर: कार्यक्रम 16 फरवरी 2026 को पूर्वाह्न 11:30 बजे से अपराह्न 3:30 बजे तक आईएमए हॉल, स्टेशन रोड, देवघर में आयोजित होगा।
प्रश्न 2: मुख्य वक्ता कौन होंगे?
उत्तर: वरिष्ठ पत्रकार एवं इतिहास शोधकर्ता डॉ आरके नीरद मुख्य वक्ता होंगे।
प्रश्न 3: व्याख्यान का विषय क्या है?
उत्तर: ‘देवघर के इतिहास को स्व. केएन सहाय की देन’।
प्रश्न 4: क्या आम नागरिक इसमें भाग ले सकते हैं?
उत्तर: हां, इतिहास प्रेमी, शोधार्थी और विद्यार्थी इसमें भाग ले सकते हैं।
निष्कर्ष
स्व. केएन सहाय की 112वीं जयंती पर आयोजित यह व्याख्यान देवघर की ऐतिहासिक चेतना को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह आयोजन न केवल एक महान शिक्षाविद और इतिहासकार को श्रद्धांजलि है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास के संरक्षण और संवर्धन के लिए सामूहिक संकल्प का प्रतीक भी है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और आयोजकों द्वारा साझा विवरण पर आधारित है। कार्यक्रम से संबंधित समय या व्यवस्था में परिवर्तन संभव है।








