बालो दा की 42वीं पुण्यतिथि पर देवघर भावुक, सेवा-संवेदना और खेल से शहर ने दी सच्ची श्रद्धांजलि

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

 

https://balo-da-42nd-punyatithi-deoghar

 

देवघर में बालो दा की 42वीं पुण्यतिथि पर भावुक श्रद्धांजलि। शहीद स्थल से केकेएन स्टेडियम तक कार्यक्रम, नारायण दास व प्रो सुरेश भारद्वाज के बयान, फुटबॉल फाइनल में देशबंधु क्लब विजेता।

 

बालो दा पुण्यतिथि, कमलकांत नरौने बालो दा, देवघर न्यूज, केकेएन स्टेडियम फुटबॉल, नारायण दास बयान, सुरेश भारद्वाज, देवघर श्रद्धांजलि समाचार

 

बालो दा की 42वीं पुण्यतिथि पर देवघर भावुक, सेवा-संवेदना और खेल से शहर ने दी सच्ची श्रद्धांजलि

गरीबों के मसीहा को नमन: शहीद स्थल से केकेएन स्टेडियम तक गूंजा बालो दा का नाम

Author | Location | Date:

सुनील झा| देवघर | 31 जनवरी 2026

 

 

देवघर में बालो दा की 42वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते शहरवासी

देवघर। शहरवासियों के सुख-दुख में हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले, गरीबों और जरूरतमंदों के सच्चे मसीहा रहे कमलकांत नरौने उर्फ बालो दा की 42वीं पुण्यतिथि पर देवघर भावनाओं से सराबोर हो उठा। हर वर्ष सेवा, संवेदना और सामाजिक एकता के संदेश के साथ मनाई जाने वाली पुण्यतिथि इस बार नगर निगम चुनाव और आदर्श आचार संहिता को ध्यान में रखते हुए सादगी से मनाई गई, लेकिन श्रद्धा और सम्मान में कोई कमी नहीं रही।

सुबह से ही शहीद आश्रम स्थित शहीद स्थल, केकेएन स्टेडियम में स्थापित बालो दा की प्रतिमा और शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर उनकी तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित करने का सिलसिला शुरू हो गया। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग—हर वर्ग के लोग श्रद्धा सुमन अर्पित करते नजर आए। लोगों की आंखों में नमी और चेहरों पर गर्व साफ दिखाई दे रहा था। पूरा वातावरण भावुक, शांत और स्मृतियों से भरा रहा।

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बालो दा की धर्मपत्नी सहित पूरा परिवार श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मौजूद रहा। उनके पुत्र राकेश नरौने के नेतृत्व में केकेएन ग्रुप द्वारा आयोजन की जिम्मेदारी निभाई गई। कार्यक्रम में पूर्व विधायक नारायण दास, पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष प्रो सुरेश भारद्वाज, उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खवाड़े, अरुणानंद झा, राकेश नरौने, राजेश नरौने, सोमेश पंडित, सचिन मिश्रा, बंटी झा, बापी दा, अमनदीप गोलू, संजय गुप्ता, अरविंद झा, संजय चटर्जी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और शहरवासी मौजूद रहे।

 

श्रद्धांजलि सभा में भावुक हुए वक्ता

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक नारायण दास भावुक हो उठे। उन्होंने कहा,

“बालो दा केवल एक व्यक्ति नहीं थे, वे देवघर की आत्मा थे। गरीबों, असहायों और पीड़ितों के लिए उन्होंने जो काम किया, वह आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। ऐसे लोग किसी पद या राजनीति से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से इतिहास बनाते हैं।”

उन्होंने कहा कि बालो दा का जीवन आने वाली पीढ़ियों को मानवता और सेवा का रास्ता दिखाता रहेगा।

पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष प्रो सुरेश भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा,

“बालो दा का जीवन त्याग, करुणा और सेवा का प्रतीक था। उन्होंने कभी अपने लिए नहीं सोचा, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का प्रयास किया। आज के दौर में जब संवेदनाएं कमजोर पड़ रही हैं, तब बालो दा के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गए हैं।”

उन्होंने युवाओं से बालो दा के आदर्शों को अपनाने और समाज सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने की अपील की।

वहीं सभा को संबोधित व धन्यवाद ज्ञापन करते हुए चंद्रशेखर खवाड़े ने कहा,

“बालो दा ने देवघर को परिवार की तरह जिया। उनके नाम से होने वाले सेवा और खेल आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं। उनके पुत्र राकेश नरौने अपने पिता की विरासत को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से आगे बढ़ा रहे हैं।”

वक्ताओं ने राकेश नरौने को “कोहिनूर का हीरा” बताते हुए शहर और समाज के लिए आगे आने की अपील की।

 

सेवा, संवेदना और खेल के जरिए जीवित है बालो दा की विरासत

बालो दा की स्मृति को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से स्थानीय केकेएन स्टेडियम में फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जो पुण्यतिथि कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में पश्चिम बंगाल के पुरूलिया की आदिवासी फुटबॉल क्लब और रूपनारायणपुर की देशबंधु टीम आमने-सामने हुईं।

दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने बेहतरीन तालमेल, अनुशासन और खेल भावना का परिचय दिया। मैच के दौरान कई बार दर्शकों की सांसें थम गईं। निर्धारित समय तक मुकाबला बराबरी पर समाप्त होने के बाद टाई-ब्रेकर से विजेता का फैसला हुआ। रोमांचक टाई-ब्रेकर में देशबंधु क्लब रूपनारायणपुर ने आदिवासी फुटबॉल क्लब पुरूलिया को 3-2 से पराजित कर प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम किया।

जीत के बाद विजेता टीम के खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला, जबकि पराजित टीम के खेल की भी दर्शकों ने खुलकर सराहना की। आयोजन समिति की ओर से विजेता और उपविजेता टीम को आकर्षक कप प्रदान किए गए। इसके अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मोमेंटो और मेडल देकर सम्मानित किया गया।

आयोजकों ने बताया कि बालो दा खेलों के बड़े प्रोत्साहक थे। उनका मानना था कि खेल युवाओं को नशा, अपराध और भटकाव से दूर रखकर अनुशासन और सकारात्मक ऊर्जा की ओर ले जाते हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए हर वर्ष उनकी पुण्यतिथि पर फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जाती है।

 

समाज के लिए आज भी प्रेरणा हैं बालो दा

पूरे आयोजन के दौरान यह साफ संदेश उभरकर सामने आया कि बालो दा आज भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न हों, लेकिन उनके विचार, उनकी सेवा भावना और उनकी संवेदना देवघर की रग-रग में आज भी जीवित है। सादगी, समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी—यही बालो दा की पहचान रही है।

शहरवासियों ने एक स्वर में कहा कि बालो दा की स्मृति केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं, बल्कि सेवा, खेल और सामाजिक एकता के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती रहेगी। यही उनके प्रति सच्ची और स्थायी श्रद्धांजलि है।

 

प्रश्न 1: बालो दा की पुण्यतिथि कब मनाई गई?

उत्तर: बालो दा की 42वीं पुण्यतिथि 31 जनवरी 2026 को देवघर में मनाई गई।

प्रश्न 2: श्रद्धांजलि कार्यक्रम कहां आयोजित हुए?

उत्तर: शहीद आश्रम शहीद स्थल, केकेएन स्टेडियम और शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर।

प्रश्न 3: फुटबॉल प्रतियोगिता का विजेता कौन बना?

उत्तर: देशबंधु क्लब रूपनारायणपुर ने आदिवासी फुटबॉल क्लब पुरूलिया को 3-2 से हराकर खिताब जीता।

प्रश्न 4: कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता कौन रहे?

उत्तर: नारायण दास, प्रो सुरेश भारद्वाज और चंद्रशेखर खवाड़े।

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

Post view : 32

Leave a Comment

और पढ़ें