देवघर में अति रुद्र महायज्ञ का छठा दिव्य, अलौकिक व अविस्मरणीय दिवस

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देवघर में अति रुद्र महायज्ञ का छठा दिव्य दिवस: गोवर्धन पूजा, गीता जयंती और संत–समागम

 

 

 

 

 

देवघर में अति रुद्र महायज्ञ के छठे दिन गोवर्धन पूजा, कृष्ण बाल लीला, गीता जयंती, संत–समागम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया।

 

 

 

 

 

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देवघर में अति रुद्र महायज्ञ का छठा दिव्य, अलौकिक व अविस्मरणीय दिवस

 

गोवर्धन पूजा, कृष्ण बाल लीला, गीता जयंती और संत–समागम से आध्यात्मिक प्रकाश में नहाया बैद्यनाथधाम

 

देवघर। बाबा बैद्यनाथधाम की पावन भूमि पर चल रहे अति रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का छठा दिवस एक अलौकिक, दिव्य और ऐतिहासिक अध्याय बनकर उभरा।

सुबह से ही यज्ञशाला में प्रज्वलित अग्नि, वेद-मंत्रों की मधुर गूंज, शंख-नाद और भक्ति-ध्वनियों ने पूरे वातावरण को एक जीवंत तीर्थ बनाकर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।

 

यज्ञ परिसर में प्रवेश करते ही ऐसा प्रतीत होता था जैसे भक्त स्वयं शिवलोक, वैकुंठ और गंगा तट के त्रिवेणी-संगम में प्रवेश कर रहे हों।

चारों ओर दिव्यता, ऊर्जा और अनुष्ठानिक पवित्रता का अनोखा समन्वय देखने को मिला।

 

 

 

संतों के आगमन से वातावरण हुआ परम पावन

 

छठे दिन का विशेष आकर्षण रहा देश–विदेश के प्रतिष्ठित संत–महात्माओं का एक साथ देवघर आगमन। उनकी उपस्थिति से पूरा आयोजन एक आध्यात्मिक विद्युत-केंद्र में बदल गया।

 

आगमन करने वाले प्रमुख संत—

 

आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी महाराज

 

महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद जी महाराज

 

महामंडलेश्वर स्वामी आनंद चैतन्य जी महाराज

 

महामंडलेश्वर स्वामी पंचमानंद जी महाराज

 

स्वामी ज्योतिर्मयानंद जी महाराज

 

स्वामी विवेकानंद जी महाराज

 

 

इन संतों के चरण-स्पर्श मात्र ने यज्ञ परिसर को आध्यात्मिक ओज और तेज से भर दिया।

 

मंच संचालन की जिम्मेदारी स्वामी सर्वेश्वरानंद सरस्वती एवं आचार्य शुभेष शर्मा ने पूरी गरिमा के साथ निभाई।

 

 

 

 

कथा-पंडाल में कृष्ण जन्म, बाल लीला और गोवर्धन पूजा ने मोहा मन

 

आज के दिवस का सबसे भावपूर्ण क्षण रहा—

कृष्ण जन्म, बाल-कृष्ण की मनोहारी झांकी, गोवर्धन पूजा और 56 भोग की आकर्षक प्रस्तुति।

 

जैसे ही बाल-कृष्ण की झांकी मंच पर अवतरित हुई, पूरा परिसर

“जय कन्हैयालाल की” के नारों से गूंज उठा।

 

आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 108 विशेश्वरानंद भारती जी महाराज ने कहा—

 

> “श्रीकृष्ण का अवतरण केवल कथा नहीं, बल्कि धर्म की पुनर्स्थापना और अधर्म का विनाश है—एक शाश्वत संकल्प।”

 

 

 

गीता जयंती के अवसर पर स्वामी सर्वेश्वरानंद जी ने कहा—

 

> “जब संसार में अन्याय और अंधकार बढ़ता है, तब स्वयं श्रीकृष्ण धर्म का दीप पुनः प्रज्वलित करने अवतरित होते हैं।”

 

 

 

 

 

तुलसी महिमा पर वैश्विक मुहिम — यूरोप के योगगुरु इंद्रदेव बाबा का संदेश

 

आज के आयोजन में विशेष आकर्षण रहे—

विश्व सनातन धर्म यूरोप के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध योगगुरु इंद्रदेव बाबा (मास्टर जी) महाराज।

 

उन्होंने तुलसी के वैज्ञानिक, औषधीय, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय महत्व को विस्तार से समझाया।

सैंकड़ों श्रद्धालुओं को उन्होंने तुलसी पौधे का वितरण किया।

 

इंद्रदेव बाबा ने कहा—

 

> “तुलसी कोई सामान्य पौधा नहीं, यह भारतीय संस्कृति की जीवन-श्वास है।”

 

 

 

वे अब तक विश्व के कई देशों में 1000 से अधिक बार ‘रावण’ का मंच-चित्रण कर चुके हैं।

तुलसी-जागरूकता अभियान को वैश्विक स्तर पर सम्मान मिल रहा है।

 

 

 

सांस्कृतिक संध्या बनी भक्ति-रस की सुरसरिता

 

संध्या आरती के बाद राजकुमार एवं उनकी जमशेदपुर टीम ने भव्य झांकियां, रास-लीला, गोवर्धन लीला और भावपूर्ण भक्ति-गीत प्रस्तुत किए।

श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर देर रात तक इस दिव्य सांस्कृतिक संध्या का आनंद लेते रहे।

 

हजारों भक्तों के लिए भोजन-प्रसाद, स्वच्छता, पेयजल, परिक्रमा व्यवस्था और जूता-चप्पल गृह की व्यवस्था अत्यंत प्रशंसनीय रही।

 

 

 

 

यज्ञ परिसर बना दिव्य गंगा-तट — एक अद्भुत दृश्य

 

यज्ञ स्थल पर एक ओर विशाल अति रुद्र महायज्ञ मंडप, दूसरी ओर भागवत कथा पंडाल, और बीच में भक्तों की अविरल धारा—

मानो देवघर में स्वयं गंगा उतर आई हों।

 

गंगा दर्शन स्थल के समीप—

 

महामंडलेश्वर श्री हरिहरानंद सरस्वती जी का आवास

 

परमहंस स्वामी शारदानंद सरस्वती जी का नमन-स्थल

 

द्वादश ज्योतिर्लिंगों की दिव्य स्थापना

 

 

श्रद्धालुओं को अनोखी शांति, ऊर्जा और आध्यात्मिक बल प्रदान कर रही थी।

 

 

 

बड़े संतों और विशिष्ट अतिथियों का पावन आगमन

 

आज तीन महान संतों का आगमन विशेष चर्चा का विषय रहा—

 

परम पूज्य स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती जी महाराज (पूर्व गृह राज्य मंत्री, भारत सरकार)

 

आचार्य इंद्रदेव बाबा (अमेरिका)

 

महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती जी महाराज (मुंबई)

 

 

साथ ही विश्व हिंदू परिषद के श्री देवी सिंह जी भी कार्यक्रम स्थल पहुंचे।

 

सूत्रों के अनुसार कल राष्ट्रीय संरक्षक बड़े दिनेश जी भाईजी भी देवघर पहुंचेंगे।

 

 

 

 

गीता जयंती का संदेश — धर्म ही जीवन का आधार

 

वक्ताओं ने महाभारत के प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा—

 

> “अर्जुन के मोह और भ्रम को तोड़कर श्रीकृष्ण ने जो ज्ञान दिया, वह केवल युद्धभूमि के लिए नहीं—पूरा जीवन मार्गदर्शक है।”

 

 

 

संतों ने एक स्वर में कहा—

 

> “धर्म वही है जो सबका कल्याण करे। सर्वे भवन्तु सुखिनः—इसी भावना से यह महायज्ञ विश्व-कल्याण का केंद्र बन रहा है।”

 

 

 

महामंडलेश्वर स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज ने आशीर्वाद दिया—

 

> “बाबा बैद्यनाथ की कृपा से यह यज्ञ हर घर में शांति, समृद्धि और मंगल का प्रकाश फैलाए।”

 

 

 

 

 

कार्यक्रम संचालन में अनेक सेवाभावी व्यक्तियों का महत्वपूर्ण योगदान

 

पूरे आयोजन को सफल बनाने में अनेक सेवाभावी लोगों ने दिन-रात समर्पण के साथ कार्य किया—

 

गोपाल कृष्ण अग्रवाल, राज चोपड़ा, प्रवीण गर्ग, पवन गर्ग, केशव गर्ग, गिरधारी अग्रवाल, शुभेश शर्मा सहित कई कार्यकर्ता अनवरत सेवा में जुटे रहे।

 

 

आयोजन के प्रमुख—

 

संयोजक – प्रेम कुमार सिंघानिया

 

मुख्य यजमान – राजेश सतनालीवाला

 

अध्यक्ष – विनोद कुमार सुल्तानिया

 

महामंत्री – रमेश कुमार बाजला

 

कोषाध्यक्ष – CA गोपाल चौधरी

 

 

प्रचार–प्रसार टीम में

पंकज कुमार पचेरीवाला, संजीव चोपड़ा, गज्जू भैया गजानंद, संजय बंका, बजरंग बथवाल, संजय बाजला, हरीश तोलासरिया, अक्षत सिंघानिया, प्रत्यूष सुल्तानिया, कृष्ण सुल्तानिया, अनिल टेकरीवाल, दिलीप सिंघानिया, आनंद मोदी, महेश डालमिया, सुनील अग्रवाल, सुनील भोपालपुरिया, संतोष भुवानियां, प्रमोद बाजला, अमित केसरी, शुभकरण सुल्तानिया, रेनू सिंघानिया, सुनील मोदी, संगीता मोदी सहित सैकड़ों स्वयंसेवकों का योगदान सराहनीय रहा।

 

 

 

 

आज का संदेश — धर्म, संस्कृति और भक्ति का महासंगम

 

छठे दिवस का मूल भाव यही रहा—

 

> “यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं—धर्म-जागरण, संस्कृति-संवर्धन और विश्व-कल्याण का भव्य महोत्सव है।”

 

 

 

देवघर इन दिनों सचमुच दिव्यता में नहाया हुआ है और अति रुद्र महायज्ञ इसकी आध्यात्मिक पहचान को नई ऊंचाई प्रदान कर रहा है।

 

 

संत–समागम, भजन संध्या और महिलाओं की अद्भुत भागीदारी से गूंजी बाबा नगरी

 

देवघर। बाबा बैद्यनाथधाम की पावन धरा पर आयोजित नौ दिवसीय अति रुद्र महायज्ञ के छठे दिन दिव्यता, अध्यात्म और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। यज्ञ मंडप के 108 हवन कुंडों में विराजमान आचार्यों को ठंड से राहत देने हेतु एक भक्त द्वारा कम्बल दान किया गया, जिसने सेवा और करुणा का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया।

 

हनुमान चालीसा ने भक्ति का संचार किया

 

सोमवार को दोपहर 3 बजे से भागवत कथा मंच पर भजन गायकों की टीम द्वारा संगीतमय हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। पूरा प्रशाल “जय हनुमान ज्ञान गुन सागर” की गुंज से आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

 

 

जमशेदपुर के राजकुमार एंड पार्टी की भजन संध्या ने बांधा समां

 

शाम 7 बजे से आयोजित सांस्कृतिक संध्या में जमशेदपुर के प्रसिद्ध भजन गायक राजकुमार एंड पार्टी ने अपनी गायकी से सभी का मन मोह लिया।

उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत—

 

भक्ति नृत्य

 

रास-लीला

 

 

ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा यज्ञ परिसर गुंजायमान हो उठा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने महायज्ञ के वातावरण में नई आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।

 

महिलाओं की अद्भुत भागीदारी बनी आकर्षण का केंद्र

 

छठे दिन कार्यक्रम की सबसे खास झलक रही महिलाओं की विशाल उपस्थिति।

माथे पर सिंदूर, पूजा थाल हाथों में, पारंपरिक परिधान और समूह में भजन-नृत्य करती महिलाएँ—

सारा यज्ञ परिसर भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक सौंदर्य से खिल उठा।

महिलाओं के उत्साह ने आयोजन में नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान की।

आज के मुख्य आकर्षण रहे— विहिप के देवी सिंह, जबकि मंगलवार को विहिप के बड़े दिनेश जी मुख्य आकर्षण होंगे।

 

कल के कार्यक्रमों की रुपरेखा

 

मंगलवार को—

 

प्रातःकाल यज्ञ मंडप में परिक्रमा एवं आहुतियाँ

 

भागवत कथा में पंडित रामाकांत मिश्र द्वारा रुक्मिणी विवाह का दिव्य वर्णन

 

अलौकिक झांकी का आयोजन

 

रात 7 बजे भक्ति-भाव से भरपूर सांस्कृतिक संध्या

 

अखिल भारतीय संत सभा के प्रमुख स्वामी बाबा सत्यनारायण मौर्य का विशेष कार्यक्रम

 

 

महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी महाराज का तुलसी पर वैश्विक व्याख्यान

 

देवघर पहुंचे महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी महाराज ने तुलसी के वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आधारित अपना विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया। वे अब तक विश्वभर में 1000 से अधिक बार रावण का किरदार निभा चुके हैं। तुलसी पौधा वितरण के लिए भी वे लगातार प्रेरित करते हैं।

 

अध्यात्म और वैदिक परंपरा का अद्भुत संगम

 

देवघर में चल रहा अति रुद्र महायज्ञ अध्यात्म, संस्कृति, वैदिक परंपरा और भक्ति का ऐसा विराट संगम है जिसे आने वाले वर्षों तक श्रद्धालु स्मरण करते रहेंगे। छठे दिन की दिव्यता इस बात की पुष्टि करती है कि जब आस्था और आध्यात्मिकता एक साथ प्रवाहित होती हैं, तो वातावरण स्वयं दिव्य ऊर्जा से भर उठता है।

 

 

Baba Wani
Author: Baba Wani

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